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यादद्रि थर्मल पावर स्टेशन की यूनिट 5 ग्रिड से जुड़ी, 4,000 मेगावाट क्षमता पूरी होने के करीब

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यादद्रि थर्मल पावर स्टेशन की यूनिट 5 ग्रिड से जुड़ी, 4,000 मेगावाट क्षमता पूरी होने के करीब

सारांश

तेलंगाना के यादाद्रि थर्मल पावर स्टेशन की पाँचवीं और अंतिम इकाई ग्रिड से जुड़ गई है। ₹36,131 करोड़ की इस परियोजना के पूर्ण होते ही राज्य को 4,000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता मिलेगी — ऐसे वक्त में जब 'अल नीनो' के चलते बिजली माँग 20,003 मेगावाट के असाधारण स्तर पर पहुँच चुकी है।

मुख्य बातें

यादाद्रि थर्मल पावर स्टेशन (YTPS) की यूनिट 5 को 21 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:06 बजे विद्युत ग्रिड से सिंक्रोनाइज़ किया गया।
परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 4,000 मेगावाट ( 800 मेगावाट की 5 इकाइयाँ); संशोधित अनुमानित लागत ₹36,131 करोड़ ।
YTPS को स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा राज्य-संचालित थर्मल पावर प्लांट बताया जा रहा है; परियोजना 2017 में शुरू हुई थी।
अक्टूबर में तेलंगाना की बिजली माँग सामान्य 15,000 मेगावाट से बढ़कर 20,003 मेगावाट हो गई है।
उपमुख्यमंत्री विक्रमार्का ने कहा कि पिछली BRS सरकार के फैसले से राज्य पर कोयला परिवहन का ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा।

तेलंगाना के नलगोंडा जिले में स्थित यादाद्रि थर्मल पावर स्टेशन (YTPS) की पाँचवीं इकाई (यूनिट 5) को बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:06 बजे विद्युत ग्रिड से सिंक्रोनाइज़ कर दिया गया। इस उपलब्धि के साथ, ₹36,131 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना की 4,000 मेगावाट की पूर्ण स्थापित क्षमता के लक्ष्य की दिशा में अंतिम और निर्णायक कदम उठाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यूनिट 5 को ग्रिड से सिंक्रोनाइज़ करने के बाद कमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) की प्रक्रिया पूरी करने के लिए इसे मैन्युअल रूप से ट्रिप किया गया। तेलंगाना पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TSGENCO) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एस. हरीश ने इस उपलब्धि के लिए भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और TSGENCO की संयुक्त टीमों के प्रयासों की सराहना की।

यह परियोजना डमरचेरला मंडल के वीरलापालेम गाँव में स्थापित की जा रही है। इसमें 800 मेगावाट की पाँच इकाइयाँ हैं — स्टेज-I में दो और स्टेज-II में तीन। इससे पहले यूनिट 1, 2, 3 और 4 पहले ही कमीशन होकर व्यावसायिक रूप से सक्रिय हो चुकी हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

यह उपलब्धि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का और सरकार के विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) नवीन मित्तल के मार्गदर्शन में हासिल बताई जा रही है। उपमुख्यमंत्री विक्रमार्का ने कहा कि पिछली भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार के गलत फैसलों के चलते इस प्लांट को कोयला खदानों से दूर बनाया गया, जिससे राज्य पर कोयला परिवहन का लगभग ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन बाधित होने के मामले को पहले से गंभीरता से लिया था। पिछले महीने राज्य सरकार ने YTPS के लिए महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया से जी-9 ग्रेड का कोयला खरीदने का निर्णय भी लिया था।

आम जनता पर असर

अक्टूबर में तेलंगाना की बिजली माँग सामान्य 15,000 मेगावाट से बढ़कर 20,003 मेगावाट तक पहुँच गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस 5,000 मेगावाट की वृद्धि के पीछे मुख्य कारण कृषि पंप सेटों का अधिक उपयोग है। इसके अलावा, अक्टूबर में भी मार्च जैसी गर्मी के कारण घरेलू बिजली खपत में भी उल्लेखनीय इज़ाफ़ा दर्ज हुआ है।

यूनिट 5 के कमर्शियल ऑपरेशन में आने से 'अल नीनो' की मौसमी परिस्थितियों के चलते बढ़ती इस असाधारण माँग को पूरा करने में TSGENCO की क्षमता मज़बूत होगी।

परियोजना की पृष्ठभूमि

YTPS को स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा राज्य-संचालित थर्मल पावर प्लांट बताया जा रहा है। इस परियोजना की शुरुआत 2017 में हुई थी और इसकी संशोधित अनुमानित लागत ₹36,131 करोड़ है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ऊर्जा सुरक्षा और राज्यों की स्वयं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर नीतिगत जोर दिया जा रहा है।

क्या होगा आगे

यूनिट 5 का कमर्शियल ऑपरेशन जल्द शुरू होने की संभावना है। एक बार COD की प्रक्रिया पूरी होने पर YTPS की कुल 4,000 मेगावाट क्षमता पूर्ण रूप से चालू हो जाएगी, जो तेलंगाना की बिजली आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹36,131 करोड़ की यह परियोजना कोयला परिवहन की ₹40,000 करोड़ की अतिरिक्त लागत के साथ दीर्घकालिक रूप से किफायती है या नहीं। विपक्षी सरकार पर BRS के 'गलत फैसलों' का आरोप राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन मौजूदा सरकार की जिम्मेदारी यह है कि वह इस अतिरिक्त लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर न डाले। 'अल नीनो' के कारण माँग में 5,000 मेगावाट की उछाल यह भी दर्शाती है कि जलवायु-प्रेरित ऊर्जा संकट अब सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक चुनौती है जिसके लिए कोयला-निर्भर थर्मल क्षमता के परे भी योजना बनानी होगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यादाद्रि थर्मल पावर स्टेशन की यूनिट 5 का ग्रिड सिंक्रोनाइज़ेशन क्या है?
यूनिट 5 को 21 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:06 बजे विद्युत ग्रिड से जोड़ा गया, यानी इसका बिजली उत्पादन मुख्य ग्रिड में शामिल हो गया। इसके बाद कमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) की प्रक्रिया के लिए इसे मैन्युअली ट्रिप किया गया, जिसके बाद यह व्यावसायिक रूप से चालू होगी।
YTPS परियोजना की कुल क्षमता और लागत कितनी है?
यादाद्रि थर्मल पावर स्टेशन में 800 मेगावाट की 5 इकाइयाँ हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 4,000 मेगावाट है। परियोजना की संशोधित अनुमानित लागत ₹36,131 करोड़ है और इसकी शुरुआत 2017 में हुई थी।
तेलंगाना में अक्टूबर में बिजली की माँग इतनी क्यों बढ़ी है?
अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर में बिजली माँग सामान्य 15,000 मेगावाट से बढ़कर 20,003 मेगावाट हो गई है। इसके पीछे मुख्य कारण कृषि पंप सेटों का अधिक उपयोग और 'अल नीनो' की स्थिति के चलते मार्च जैसी गर्मी के कारण घरेलू बिजली खपत में वृद्धि है।
कोयला परिवहन पर ₹40,000 करोड़ के अतिरिक्त बोझ का क्या मामला है?
उपमुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि पिछली BRS सरकार के फैसले के कारण YTPS को कोयला खदानों से दूर बनाया गया। इससे राज्य पर कोयला परिवहन के लिए लगभग ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है।
यूनिट 5 का कमर्शियल ऑपरेशन कब शुरू होगा?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार यूनिट 5 का कमर्शियल ऑपरेशन जल्द शुरू होने की संभावना है। COD प्रक्रिया पूरी होते ही YTPS की कुल 4,000 मेगावाट क्षमता पूरी तरह चालू हो जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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