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यदाद्री थर्मल प्लांट संकट: तेलंगाना सरकार कोल इंडिया से खरीदेगी जी-9 कोयला, दशहरे तक पूरी क्षमता का लक्ष्य

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यदाद्री थर्मल प्लांट संकट: तेलंगाना सरकार कोल इंडिया से खरीदेगी जी-9 कोयला, दशहरे तक पूरी क्षमता का लक्ष्य

सारांश

यदाद्री थर्मल प्लांट में जी-9 कोयले की कमी से बिजली उत्पादन ठप — तेलंगाना सरकार ने कोल इंडिया से आपातकालीन खरीद का फैसला किया। बीआरएस पर ₹40,000 करोड़ के अतिरिक्त बोझ का आरोप, और विपक्षी पार्टी ने पलटवार में फैक्ट-फाइंडिंग टीम मैदान में उतारी।

मुख्य बातें

तेलंगाना सरकार ने यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन के लिए महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया से जी-9 ग्रेड कोयला खरीदने का निर्णय लिया।
रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को दशहरे तक प्लांट में पूरी क्षमता से उत्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का जल्द केंद्रीय कोयला मंत्री किशन रेड्डी से मिलकर जी-9 कोयले की आपूर्ति पर चर्चा करेंगे।
पिछली बीआरएस सरकार पर आरोप — खदानों से दूर प्लांट बनाने से राज्य पर ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त कोयला परिवहन बोझ।
सिंगरेनी में 14 कोयला ब्लॉक बंद; जी-9 उत्पादन की कोई निकट-भविष्य की संभावना नहीं।
बीआरएस ने केटी रामा राव के निर्देश पर फैक्ट-फाइंडिंग टीम गठित कर थर्मल प्लांट और सिंगरेनी का दौरा करने की घोषणा की।

तेलंगाना सरकार ने यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन में बिजली उत्पादन ठप होने के संकट से निपटने के लिए 24 सितंबर 2026 को बड़ा फैसला लिया — महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया से अस्थायी रूप से जी-9 ग्रेड का कोयला खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई ऊर्जा क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया, और अधिकारियों को दशहरे तक प्लांट में पूरी क्षमता से उत्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

संकट की जड़: क्या है समस्या

अधिकारियों ने बैठक में मुख्यमंत्री को स्पष्ट किया कि यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन की तकनीक केवल जी-9 ग्रेड के कोयले पर ही संचालित हो सकती है। समस्या यह है कि राज्य की प्रमुख कोयला आपूर्तिकर्ता सिंगरेनी के पास जी-9 कोयले का उत्पादन करने वाला कोई कोयला ब्लॉक नहीं है, और निकट भविष्य में भी इसकी कोई संभावना नहीं है।

इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि सिंगरेनी में 14 कोयला ब्लॉक पहले ही बंद हो चुके हैं। पिछली सरकार द्वारा ई-नीलामी में भाग न लेने के कारण जी-9 कोयले के नए ब्लॉक हासिल करने का अवसर भी चूक गया।

उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और केंद्र से बैठक की योजना

ऊर्जा मंत्री और उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि वे जल्द ही केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात कर जी-9 ग्रेड कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चर्चा करेंगे। उपमुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया कि पिछली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार के गलत निर्णयों के कारण प्लांट को कोयला खदानों से बहुत दूर बनाया गया, जिससे राज्य पर कोयला परिवहन का लगभग ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।

उन्होंने कहा, 'लोगों को लगातार अच्छी गुणवत्ता वाली बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हमने अधिकारियों को महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया से अस्थायी रूप से कोयला खरीदने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।'

बीआरएस का पलटवार: फैक्ट-फाइंडिंग टीम मैदान में

इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच, बीआरएस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और विधायकों की एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम गठित की। बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव के निर्देश पर बनाई गई यह टीम गुरुवार को प्रमुख थर्मल पावर प्लांट और सिंगरेनी मुख्यालय का दौरा करेगी।

बीआरएस के अनुसार, इस कवायद का उद्देश्य बिजली क्षेत्र के प्रबंधन, परियोजनाओं की प्रगति और किसी भी परिचालन देरी से जुड़े तथ्यों का पता लगाना है। फील्ड विजिट के बाद पार्टी एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसमें यह भी बताया जाएगा कि केसीआर सरकार के दौरान बनाई गई परियोजनाओं के बारे में कथित तौर पर फैलाई गई गलत जानकारी का जवाब क्या है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में त्योहारी सीजन की शुरुआत होने वाली है और बिजली की मांग अपने चरम पर होती है। यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन तेलंगाना के बिजली उत्पादन का एक अहम हिस्सा है, और इसके ठप रहने से उपभोक्ताओं को सीधा नुकसान होता है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में थर्मल प्लांट के लिए विशिष्ट ग्रेड के कोयले की उपलब्धता एक गंभीर चुनौती बनी हो। विशेषज्ञों के अनुसार, प्लांट की तकनीक और कोयले की ग्रेड में तालमेल न होना दीर्घकालिक योजना की एक बड़ी चूक है। अब केंद्र सरकार से बातचीत और कोल इंडिया से आपूर्ति शुरू होने के बाद ही यह संकट टल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का परिवहन बोझ और 14 बंद कोयला ब्लॉक — ये आँकड़े बताते हैं कि समस्या किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा नीति की अदूरदर्शिता की है। मौजूदा सरकार का 'अस्थायी खरीद' का समाधान तात्कालिक राहत तो दे सकता है, लेकिन जब तक सिंगरेनी या किसी अन्य स्रोत से स्थायी जी-9 आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती, यह राज्य की बिजली सुरक्षा पर एक स्थायी प्रश्नचिह्न बना रहेगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यदाद्री थर्मल पावर प्लांट में बिजली उत्पादन क्यों रुका?
यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन की तकनीक केवल जी-9 ग्रेड के कोयले पर संचालित होती है, लेकिन राज्य की प्रमुख आपूर्तिकर्ता सिंगरेनी के पास जी-9 कोयला उत्पादन के लिए कोई ब्लॉक नहीं है। पिछली सरकार द्वारा ई-नीलामी में भाग न लेने से यह स्थिति और गंभीर हो गई।
तेलंगाना सरकार ने कोयला संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया से अस्थायी रूप से जी-9 कोयला खरीदने का फैसला किया गया। साथ ही उपमुख्यमंत्री को केंद्रीय कोयला मंत्री किशन रेड्डी से बैठक कर स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बीआरएस ने तेलंगाना के बिजली संकट पर क्या रुख अपनाया?
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव के निर्देश पर एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम गठित की है, जो थर्मल पावर प्लांट और सिंगरेनी मुख्यालय का दौरा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। बीआरएस का कहना है कि केसीआर सरकार की परियोजनाओं के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
सिंगरेनी से जी-9 कोयला क्यों नहीं मिल सकता?
अधिकारियों के अनुसार सिंगरेनी के पास जी-9 ग्रेड कोयले का उत्पादन करने वाला कोई कोयला ब्लॉक नहीं है। इसके अलावा, सिंगरेनी में 14 कोयला ब्लॉक पहले ही बंद हो चुके हैं और निकट भविष्य में जी-9 उत्पादन की कोई संभावना नहीं है।
यदाद्री प्लांट पर ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ कैसे पड़ा?
उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पिछली बीआरएस सरकार ने यदाद्री थर्मल प्लांट को कोयला खदानों से बहुत दूर बनाया, जिससे राज्य पर कोयला परिवहन का लगभग ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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