यदाद्री पावर प्लांट संकट: तेलंगाना सरकार कोल इंडिया से खरीदेगी जी-9 कोयला, दशहरे तक पूर्ण उत्पादन का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार ने यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन में बिजली उत्पादन ठप होने की संकट-स्थिति से निपटने के लिए महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया से अस्थायी रूप से जी-9 ग्रेड कोयला खरीदने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में 24 सितंबर 2026 को हुई ऊर्जा क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया गया। सरकार का लक्ष्य दशहरे तक प्लांट में पूर्ण क्षमता से बिजली उत्पादन बहाल करना है।
संकट की जड़: जी-9 कोयले की अनुपलब्धता
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन की तकनीक केवल जी-9 ग्रेड कोयले पर निर्भर है, जबकि राज्य की अपनी कोयला कंपनी सिंगरेनी के पास इस ग्रेड का कोयला उत्पादन करने वाले ब्लॉक उपलब्ध नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार, सिंगरेनी के 14 कोयला ब्लॉक पहले ही बंद हो चुके हैं और निकट भविष्य में वहाँ से जी-9 कोयले की आपूर्ति की कोई संभावना नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बिजली की माँग चरम पर है। गौरतलब है कि ई-नीलामी में पूर्व में भागीदारी न करने के कारण भी आपूर्ति श्रृंखला में बाधा उत्पन्न हुई।
सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया
ऊर्जा मंत्री और उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय कोयला खान विभाग के मंत्री किशन रेड्डी से मुलाकात कर आवश्यक कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि राज्य की जनता को निर्बाध और अच्छी गुणवत्ता वाली बिजली देना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, 'हमने अधिकारियों को महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया से अस्थायी रूप से कोयला खरीदने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।' ऊर्जा विभाग के अधिकारी इस प्रक्रिया को तत्काल आगे बढ़ाएँगे।
पूर्व सरकार पर आरोप और वित्तीय बोझ
वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार पर आरोप लगाया कि उसके 'गलत फैसलों' के चलते यदाद्री प्लांट को कोयला खदानों से बहुत दूर बनाया गया। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, इस कारण राज्य पर कोयला परिवहन का करीब ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बैठक में यह सवाल भी उठाया कि प्लांट निर्माण में ऐसी विशिष्ट तकनीक क्यों अपनाई गई जो सिंगरेनी में उपलब्ध जी-9 कोयले से असंगत थी। यह राजनीतिक जवाबदेही का एक तीखा प्रश्न है जिसका उत्तर अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
बीआरएस का पलटवार: फैक्ट-फाइंडिंग दौरा
दूसरी ओर, बीआरएस ने भी मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव के निर्देश पर वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और विधायकों की एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम प्रमुख थर्मल पावर प्लांट और सिंगरेनी मुख्यालय का दौरा करेगी।
बीआरएस का कहना है कि यह दल बिजली क्षेत्र के प्रबंधन, परियोजनाओं की प्रगति और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुई किसी भी देरी या परिचालन संबंधी कमियों की जाँच करेगा। पार्टी फील्ड विजिट के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की योजना बना रही है।
आगे क्या होगा
ऊर्जा विभाग के अधिकारी महानदी कोलफील्ड्स और कोल इंडिया के साथ आपूर्ति अनुबंध की प्रक्रिया शुरू करेंगे। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का और केंद्रीय कोयला मंत्री किशन रेड्डी के बीच बैठक अपेक्षित है। सरकार ने दशहरे तक पूर्ण उत्पादन बहाली की समय-सीमा तय की है, जो तकनीकी और लॉजिस्टिक दोनों मोर्चों पर एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है।