12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर CJI सूर्यकांत बोले — व्यस्त कार्यक्रम में भी योग दिखाता है सेहत का रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 21 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासनिक भवन परिसर में आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि योग मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक स्थायी ढाँचा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक संतुलन के लिए भी उतना ही आवश्यक है — विशेषकर उच्च दबाव वाले पेशेवर परिवेश में।
भारतीय सभ्यता की विरासत
CJI सूर्यकांत ने योग को भारत की सभ्यतागत विरासत का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा, 'हम वास्तव में भारतीय विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्से का उत्सव मना रहे हैं। सदियों से हमारी सभ्यता की समझ ने इस बात पर बल दिया है कि सच्ची वेलनेस केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है — यह मन, शरीर और आत्मा के बीच तालमेल के बारे में है।' उनके अनुसार, योग इसी सोच का व्यावहारिक माध्यम है, जो अस्त-व्यस्त आधुनिक जीवन में शांति की तलाश करने वालों को एक स्थायी मार्ग देता है।
न्यायपालिका में काम का दबाव और योग की भूमिका
न्यायपालिका में कार्य की जटिल प्रकृति का उल्लेख करते हुए CJI ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री के कर्मचारियों को प्रतिदिन अत्यधिक काम, कड़ी समय-सीमाओं और न्याय-प्रशासन के निरंतर दबाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह माहौल मानसिक स्पष्टता और शारीरिक ऊर्जा दोनों को प्रभावित करता है। उनके अनुसार, ऐसे परिवेश में योग एक प्रभावशाली समाधान के रूप में उभर सकता है।
गलतफहमी और व्यावहारिक सच्चाई
CJI सूर्यकांत ने एक प्रचलित भ्रांति को भी दूर किया। उन्होंने कहा, 'यह एक आम गलतफहमी है कि योग के लिए पूर्ण लचीलापन या घंटों का खाली समय चाहिए। मैं स्वयं भी योग सीख रहा हूँ, फिर भी पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि कुछ मिनट सचेत श्वास लेना या बुनियादी स्ट्रेचिंग भी तनाव प्रबंधन को काफी हद तक बदल सकती है।' उन्होंने ध्यान (मेडिटेशन), स्ट्रेचिंग और माइंडफुल ब्रीदिंग को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी।
निरंतरता ही असली कुंजी
CJI ने इस बात पर विशेष बल दिया कि योग के वास्तविक लाभ कभी-कभार अभ्यास से नहीं, बल्कि नियमितता से मिलते हैं। उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बदलाव का एक सुनहरा अवसर है — मैट पर कदम रखने और इसे नियमित आदत बनाने का क्षण। असली फायदे साल में एक बार के अभ्यास से नहीं, बल्कि लगातार अभ्यास से आते हैं।' उन्होंने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे आज के सत्र के अनुभव को अपने कार्यस्थल और घर तक ले जाएँ और स्वास्थ्य एवं माइंडफुलनेस को प्रतिदिन प्राथमिकता दें।
इस वर्ष की थीम और संयुक्त राष्ट्र का दृष्टिकोण
इस वर्ष के 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग' (Yoga for Healthy Ageing) रही, जो सभी आयु वर्गों में योग की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, योग संतुलन, लचीलापन, शक्ति और गतिशीलता को बेहतर बनाकर स्वस्थ उम्र बढ़ने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही, गतिविधि, स्ट्रेचिंग, श्वास व्यायाम और माइंडफुलनेस के संयोजन से मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम के अंत में CJI ने सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री टीम को आयोजन के लिए धन्यवाद दिया और सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं।