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अदाणी पोर्ट्स, एनएमडीसी और वेले मिलकर आयरन ओर के लिए एसईजेड आधारित इकोसिस्टम का करेंगे विकास

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अदाणी पोर्ट्स, एनएमडीसी और वेले मिलकर आयरन ओर के लिए एसईजेड आधारित इकोसिस्टम का करेंगे विकास

सारांश

अदाणी पोर्ट्स, एनएमडीसी और वेले ब्राज़ील ने मिलकर गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित करने का समझौता किया है, जिससे भारत के पूर्वी तट पर आयरन ओर निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने की संभावना है।

मुख्य बातें

अदाणी पोर्ट्स , एनएमडीसी और वेले ने एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया।
गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
इस विकास से गंगावरम की क्षमता 75 एमएमटी तक पहुंचेगी।
यह समझौता भारत-ब्राज़ील के व्यापार संबंधों को मजबूत करेगा।
यह परियोजना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करेगी।

अहमदाबाद, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अदाणी पोर्ट्स और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एपीएसईजेड) ने अपनी सहयोगी कंपनी आदानी गंगावरम पोर्ट लिमिटेड (एजीपीएल) के माध्यम से सरकारी कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड और वेले एस.ए. (वेले ब्राज़ील) के साथ एक महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह एमओयू भारत-ब्राज़ील व्यापार फोरम सम्मेलन के दौरान संपन्न हुआ। इसके तहत गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर ब्लेंडिंग सुविधा और एक समर्पित विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के विकास के लिए एक ठोस ढांचा तैयार किया जाएगा।

समझौते पर ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर हुए। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे, जो भारत-ब्राज़ील के मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है।

एपीएसईजेड के निदेशक और सीईओ अश्विनी गुप्ता ने कहा कि यह सहयोग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को और मजबूत करने के लिए एक भविष्य-उन्मुख और लचीला बुनियादी ढांचा विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले खनिज लॉजिस्टिक्स को उन्नत बंदरगाह क्षमताओं के साथ जोड़कर उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ देश की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान दिया जाएगा।

इस सहयोग के तहत गंगावरम पोर्ट पर एक समग्र एसईजेड-आधारित इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिसमें आयरन ओर की ब्लेंडिंग, मूल्य संवर्धन और व्यावसायीकरण शामिल होगा। इस पहल का उद्देश्य भारत के पूर्वी तट पर आयरन ओर निर्यात वैल्यू चेन को सशक्त बनाना और खनिज प्रसंस्करण एवं व्यापार में दक्षता, पैमाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है।

इस विकास के साथ गंगावरम पोर्ट की क्षमता बढ़कर 75 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुंच जाएगी और यह भारत तथा क्षेत्र के लिए आयरन ओर निर्यात का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

गुप्ता ने कहा कि एनएमडीसी और वेले के साथ यह साझेदारी पूर्वी तट पर आयरन ओर क्षेत्र के लिए एक आधुनिक, कुशल और सतत इकोसिस्टम स्थापित करने में मदद करेगी। गंगावरम पोर्ट भारत का पहला ऐसा बंदरगाह बनने की दिशा में अग्रसर है, जो ‘वैलेमैक्स’ जहाजों, दुनिया के सबसे बड़े वेरी लार्ज ओर कैरियर्स (वीएलओसी) को संभालने में सक्षम होगा, जिनकी क्षमता 4,00,000 एमएमटी तक है।

परियोजना के तहत पूर्ण रूप से मशीनीकृत बर्थिंग और कार्गो हैंडलिंग सुविधाओं का विकास, एंड-टू-एंड यार्ड प्रबंधन, ब्लेंडिंग ऑपरेशन, और जहाजों की लोडिंग-अनलोडिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी, जिससे आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति को भी मजबूत बनाएगी।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित करना है।
यह परियोजना कब शुरू होगी?
इस परियोजना की शुरुआत के लिए कोई निश्चित तिथि नहीं बताई गई है, लेकिन समझौता हाल ही में किया गया है।
कौन-कौन से कंपनियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं?
इस समझौते पर अदाणी पोर्ट्स, एनएमडीसी लिमिटेड और वेले एस.ए. ने हस्ताक्षर किए हैं।
गंगावरम पोर्ट की क्षमता कितनी होगी?
गंगावरम पोर्ट की क्षमता बढ़कर 75 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुंच जाएगी।
इस पहल का क्या महत्व है?
इस पहल का महत्व भारत के पूर्वी तट पर आयरन ओर निर्यात को मजबूत करने और खनिज प्रसंस्करण में दक्षता बढ़ाने में है।
राष्ट्र प्रेस
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