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भारत में पेट का मोटापा: संपूर्ण मोटापे से अधिक स्वास्थ्य का खतरा - डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत में पेट का मोटापा: संपूर्ण मोटापे से अधिक स्वास्थ्य का खतरा - डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

पेट का मोटापा स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में दुबले दिखने वाले लोगों में भी अंदरूनी चर्बी हो सकती है। जानिए इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव और उपाय।

मुख्य बातें

पेट का मोटापा समग्र मोटापे से अधिक खतरनाक है।
यह डायबिटीज और हृदय रोग का कारण बन सकता है।
दुबले व्यक्तियों में भी आंतरिक चर्बी हो सकती है।
संतुलित आहार और व्यायाम करें।
सही जानकारी और उपायों से हम इस समस्या से निपट सकते हैं।

नई दिल्ली, २९ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि पेट का मोटापा समग्र मोटापे की तुलना में स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। विशेष रूप से भारत में, जहाँ दुबले दिखने वाले व्यक्तियों में भी हानिकारक आंतरिक चर्बी हो सकती है।

कार्डियोलॉजी की एक पुस्तक 'एडवांसेज इन ओबेसिटी एंड लिपिड मैनेजमेंट इन सीवीडी' के विमोचन अवसर पर बोलते हुए, डॉ. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पेट के आसपास फैट जमा होने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, भले ही व्यक्ति का वजन सामान्य हो।

उन्होंने बताया कि सेंट्रल मोटापा एक अलग जोखिम कारक है, जिससे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां, फैटी लिवर और लिपिड असंतुलन जैसी कई मेटाबोलिक बीमारियाँ हो सकती हैं। यह समस्या भारतीयों में खास तौर पर देखी जाती है, जहाँ दुबले दिखने के बावजूद पेट के आस-पास चर्बी जमा हो जाती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापे का स्तर बढ़ रहा है, विशेष रूप से पेट का मोटापा, जो कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने इस छिपे हुए स्वास्थ्य खतरे का जल्दी पता लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बदलती जीवनशैली को देखते हुए उन्होंने बताया कि खराब खान-पान की आदतें, कम शारीरिक गतिविधि और दैनिक दिनचर्या में असंतुलन, कम उम्र के लोगों में टाइप-2 डायबिटीज और दिल से जुड़ी समस्याओं को बढ़ाने में सहायक हो रही हैं।

मंत्री ने अत्यधिक या बिना वैज्ञानिक फिटनेस प्रैक्टिस के खिलाफ चेतावनी दी, यह बताते हुए कि बिना उचित तैयारी या आराम के अधिक शारीरिक मेहनत भी स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकती है। उन्होंने संतुलित जीवनशैली, पूर्ण नींद और वैज्ञानिक तरीके से गाइडेड प्रिवेंटिव केयर के महत्व पर जोर दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पेट का मोटापा भारतीय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। इस मुद्दे की गंभीरता को समझना जरूरी है, ताकि हम सही कदम उठा सकें।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट का मोटापा क्यों खतरनाक है?
पेट का मोटापा कई मेटाबोलिक समस्याओं का कारण बन सकता है, जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, और दिल की बीमारियाँ।
भारत में पेट के मोटापे का स्तर क्या है?
भारत में पेट का मोटापा बढ़ता जा रहा है, खासकर दुबले व्यक्तियों में भी।
पेट के मोटापे से कैसे बचा जा सकता है?
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर पेट के मोटापे से बचा जा सकता है।
क्या पेट के मोटापे की पहचान संभव है?
जी हाँ, पेट के आकार और शरीर के अन्य मापों के माध्यम से पेट के मोटापे की पहचान की जा सकती है।
क्या वैज्ञानिक तरीके से फिटनेस प्रैक्टिस करना जरूरी है?
हाँ, वैज्ञानिक तरीके से फिटनेस प्रैक्टिस करना स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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