9 सितंबर 2026
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डॉ. पी. कृष्णन बने FAO के वैश्विक मत्स्य नेटवर्क RSN के अध्यक्ष, भारत को 2026-28 तक नेतृत्व की भूमिका

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डॉ. पी. कृष्णन बने FAO के वैश्विक मत्स्य नेटवर्क RSN के अध्यक्ष, भारत को 2026-28 तक नेतृत्व की भूमिका

सारांश

भारतीय मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. पी. कृष्णन को FAO के RSN का अध्यक्ष चुना गया है — 50 से अधिक वैश्विक मत्स्य निकायों के इस नेटवर्क की कमान अब भारत के हाथ में है। यह चयन ऐसे समय हुआ है जब भारत लघु-स्तरीय मछुआरों के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना के अंतिम चरण में है।

मुख्य बातें

कृष्णन को FAO के RSN का अध्यक्ष चुना गया; कार्यकाल 2026-28 तक।
चयन रोम में FAO की मत्स्य समिति ( COFI ) के 37वें सत्र के दौरान हुआ।
RSN में दुनिया भर के 50 से अधिक क्षेत्रीय मत्स्य निकायों के सचिवालय शामिल हैं।
भारत की NPOA-SSF का मसौदा दिसंबर 2026 तक सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी होगा; 2027 में लागू होने की उम्मीद।
कृष्णन BOBP-IGO के निदेशक हैं और लघु-स्तरीय मत्स्य पालन, जलवायु अनुकूलन व BBNJ क्रियान्वयन पर काम करेंगे।

भारतीय मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. पी. कृष्णन को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के क्षेत्रीय मत्स्य निकाय सचिवालय नेटवर्क (RSN) का अध्यक्ष चुना गया है। 8 सितंबर 2026 को सामने आई इस खबर के साथ भारत को वैश्विक मत्स्य शासन में 2026 से 2028 तक के लिए एक निर्णायक नेतृत्व भूमिका प्राप्त हुई है। यह चयन रोम में आयोजित FAO की मत्स्य समिति (COFI) के 37वें सत्र के दौरान संपन्न हुआ।

कौन हैं डॉ. पी. कृष्णन

डॉ. पी. कृष्णन वर्तमान में बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। BOBP-IGO एक बहुपक्षीय संगठन है जो बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों में मत्स्य प्रबंधन और तटीय समुदायों की आजीविका के लिए काम करता है। उनकी विशेषज्ञता लघु-स्तरीय मत्स्य पालन, समुद्री जैव विविधता और क्षेत्रीय शासन के क्षेत्र में मानी जाती है।

RSN और उसका वैश्विक महत्व

RSN दुनिया भर के 50 से अधिक क्षेत्रीय मत्स्य निकायों के सचिवालयों का वैश्विक नेटवर्क है। यह नेटवर्क लघु-स्तरीय मत्स्य पालन व्यवस्था, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और महासागर शासन जैसे जटिल वैश्विक मुद्दों पर समन्वय के लिए प्रमुख मंच के रूप में कार्य करता है। FAO मुख्यालय में आयोजित विश्व लघु-स्तरीय मत्स्य शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. कृष्णन ने कहा कि 'बंगाल की खाड़ी की क्षेत्रीय पहल दुनिया के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।'

भारत की राष्ट्रीय कार्ययोजना और तैयारियाँ

BOBP-IGO, FAO के सहयोग से भारत और तीन अन्य दक्षिण एशियाई देशों को लघु-स्तरीय मत्स्य पालन के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (NPOA-SSF) तैयार करने में सहायता दे रहा है। भारत इस दिशा में प्रारंभिक तैयारियाँ पूरी कर चुका है। भारतीय टास्क फोर्स ने मत्स्य क्षेत्र से जुड़े कानूनी ढाँचे की समीक्षा की है और छोटे स्तर के मत्स्य क्षेत्र का विस्तृत प्रोफाइल भी तैयार किया है।

क्षेत्रीय प्रक्रिया के तहत दिसंबर 2026 तक राष्ट्रीय कार्ययोजनाओं का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा, जबकि इन्हें औपचारिक रूप से 2027 में लागू किए जाने की उम्मीद है।

आम मछुआरों पर असर

भारत में छोटे और पारंपरिक मछुआरे देश के मत्स्य कार्यबल का बड़ा हिस्सा हैं और खाद्य सुरक्षा व तटीय आजीविका में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्ययोजना का उद्देश्य इस बड़े लेकिन अब तक काफी हद तक असंगठित क्षेत्र के लिए एक औपचारिक नीतिगत ढाँचा तैयार करना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत और दक्षिण एशिया के तीन अन्य देश इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

आगे की राह

RSN के अध्यक्ष के रूप में डॉ. कृष्णन 2026-28 के दौरान FAO और क्षेत्रीय मत्स्य निकायों के साथ मिलकर लघु-स्तरीय मत्स्य पालन व्यवस्था, जलवायु अनुकूलन, हाई सीज़ बायोडायवर्सिटी एग्रीमेंट (BBNJ) के क्रियान्वयन और महासागर शासन में सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर कार्य करेंगे। भारत की यह उपलब्धि वैश्विक समुद्री नीति-निर्माण में देश की बढ़ती साख को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या यह नेतृत्व देश के लाखों छोटे मछुआरों की ज़मीनी स्थिति को बदल पाता है। NPOA-SSF की रूपरेखा तैयार होने के बावजूद, भारत का लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र दशकों से नीतिगत उपेक्षा झेलता आया है। वैश्विक मंच पर नेतृत्व और घरेलू नीति क्रियान्वयन के बीच की यह खाई पाटना ही इस उपलब्धि की वास्तविक परीक्षा होगी। 2027 की समयसीमा महत्वाकांक्षी है — और इसे पूरा करने के लिए केंद्र, राज्यों और तटीय समुदायों के बीच असाधारण समन्वय की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. पी. कृष्णन को किस पद के लिए चुना गया है?
डॉ. पी. कृष्णन को FAO के क्षेत्रीय मत्स्य निकाय सचिवालय नेटवर्क (RSN) का अध्यक्ष चुना गया है। यह पद उन्हें 2026 से 2028 तक के कार्यकाल के लिए मिला है और इसके तहत वे दुनिया भर के 50 से अधिक क्षेत्रीय मत्स्य निकायों के साथ समन्वय करेंगे।
FAO का RSN क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
RSN यानी क्षेत्रीय मत्स्य निकाय सचिवालय नेटवर्क, FAO के अंतर्गत 50 से अधिक वैश्विक मत्स्य निकायों का समन्वय मंच है। यह लघु-स्तरीय मत्स्य पालन, जलवायु अनुकूलन और महासागर शासन जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नीति-निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
भारत की NPOA-SSF क्या है और इसे कब लागू किया जाएगा?
NPOA-SSF यानी लघु-स्तरीय मत्स्य पालन के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना, छोटे और पारंपरिक मछुआरों के लिए एक औपचारिक नीतिगत ढाँचा है। इसका मसौदा दिसंबर 2026 तक सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी होगा और 2027 में इसे औपचारिक रूप से लागू किए जाने की उम्मीद है।
BOBP-IGO क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
BOBP-IGO यानी बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन, बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों में मत्स्य प्रबंधन के लिए कार्यरत एक बहुपक्षीय संस्था है। डॉ. कृष्णन इसके निदेशक हैं और यह संगठन FAO के सहयोग से भारत समेत दक्षिण एशिया के चार देशों में NPOA-SSF तैयार करने में मदद कर रहा है।
इस नियुक्ति से भारत के मछुआरों को क्या फायदा होगा?
इस नेतृत्व भूमिका से भारत को वैश्विक मत्स्य नीति-निर्माण में सीधी आवाज़ मिलेगी, जो देश के लाखों छोटे और पारंपरिक मछुआरों के हितों की पैरवी में सहायक हो सकती है। साथ ही, NPOA-SSF के ज़रिए अब तक असंगठित इस क्षेत्र को एक औपचारिक नीतिगत सुरक्षा मिलने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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