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श्रीराम कृष्णन का व्हाइट हाउस से इस्तीफा, एआई की बड़ी चुनौतियों पर नए संस्थान बनाएंगे

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श्रीराम कृष्णन का व्हाइट हाउस से इस्तीफा, एआई की बड़ी चुनौतियों पर नए संस्थान बनाएंगे

सारांश

ट्रंप प्रशासन के एआई सलाहकार श्रीराम कृष्णन 18 महीने की सेवा के बाद व्हाइट हाउस छोड़ रहे हैं। वह एआई की ऊर्जा, डेटा और सामाजिक चुनौतियों पर नए संस्थान बनाने की दिशा में काम करेंगे — सरकार और निजी क्षेत्र के बीच एआई नीति की बढ़ती आवाजाही का एक और संकेत।

मुख्य बातें

श्रीराम कृष्णन ने जून 2026 के अंत में व्हाइट हाउस में अपनी एआई सलाहकार भूमिका छोड़ने की घोषणा की।
कृष्णन पिछले 18 महीनों से ट्रंप प्रशासन की एआई रणनीति बनाने में केंद्रीय भूमिका में थे।
उन्होंने फ्रांस, भारत, ब्रिटेन और मध्य पूर्व में एआई सम्मेलनों व कूटनीतिक बैठकों में अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया।
अब वह ऊर्जा, डेटा सेंटर और एआई के सामाजिक लाभ जैसी चुनौतियों पर नए संस्थान बनाने पर ध्यान देंगे।
एआई और क्रिप्टो सलाहकार डेविड सैक्स ने कहा कि कृष्णन सरकार से बाहर रहते हुए भी प्रशासन को सलाह देते रहेंगे ।

ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ एआई सलाहकार श्रीराम कृष्णन ने जून 2026 के अंत में व्हाइट हाउस में अपनी भूमिका छोड़ने की घोषणा की है। पिछले 18 महीनों से वह अमेरिकी प्रशासन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रणनीति के केंद्र में रहे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिकी एआई हितों की पैरवी करते रहे। उनके जाने की सूचना सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विस्तृत बयान के ज़रिए सामने आई।

इस्तीफे की घोषणा

कृष्णन ने अपने बयान में लिखा, 'मैं इस महीने के अंत में व्हाइट हाउस में अपनी भूमिका छोड़ रहा हूं। थोड़े आराम के बाद मैं अमेरिका के सामने एआई से जुड़ी बड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करने पर काम करूंगा।' उन्होंने सरकार में अपनी सेवा को 'जीवन का सबसे बड़ा सम्मान' बताया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व के बिना अमेरिका एआई की वैश्विक दौड़ में इस मुकाम पर नहीं होता।

अंतरराष्ट्रीय एआई कूटनीति में भूमिका

कृष्णन ने अपने कार्यकाल के दौरान सहयोगी देशों के बीच अमेरिकी एआई तकनीक और प्रणालियों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने फ्रांस और भारत में आयोजित एआई सम्मेलनों के साथ-साथ ब्रिटेन और मध्य पूर्व की सरकारी यात्राओं में भाग लिया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई नीति और तकनीकी वर्चस्व को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।

डेविड सैक्स की प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस के एआई और क्रिप्टो सलाहकार डेविड सैक्स ने कृष्णन के योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सैक्स ने लिखा, 'पिछले 18 महीनों में आपके साथ इतनी नज़दीकी से काम करना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात रही है।' उन्होंने कृष्णन की एआई की गहरी तकनीकी समझ, नीति-निर्माण में दक्षता, रणनीतिक सोच और कूटनीतिक कौशल को 'अनोखा संयोजन' बताया। सैक्स ने यह भी स्पष्ट किया कि कृष्णन सरकार से बाहर रहते हुए भी प्रशासन को सलाह देते रहेंगे।

आगे की योजना: नए संस्थान और बड़ी चुनौतियाँ

कृष्णन ने कहा कि एआई की तेज़ रफ़्तार दुनिया कई नई जटिलताएं लेकर आ रही है — चाहे वह ऊर्जा आपूर्ति हो, डेटा सेंटरों का विस्तार हो या आम अमेरिकियों तक एआई के लाभ पहुंचाने का सवाल। उन्होंने कहा कि अब वह ऐसे संस्थान बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे जो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम बना सकें। गौरतलब है कि कृष्णन भारतीय-अमेरिकी तकनीकी समुदाय में एक प्रमुख आवाज़ रहे हैं और उनका यह कदम एआई नीति के क्षेत्र में निजी क्षेत्र व सरकार के बीच बढ़ती आवाजाही की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ वे नीति को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती रहती हैं। सवाल यह है कि 18 महीनों में बनाई गई एआई रणनीति की निरंतरता कौन सुनिश्चित करेगा, खासकर जब वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा — चीन के साथ — अपने चरम पर है। 'नए संस्थान बनाने' की घोषणा महत्वाकांक्षी है, लेकिन बिना ठोस ब्यौरे के यह अभी एक इरादे से अधिक नहीं है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीराम कृष्णन कौन हैं और व्हाइट हाउस में उनकी क्या भूमिका थी?
श्रीराम कृष्णन एक भारतीय-अमेरिकी टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ हैं जो ट्रंप प्रशासन में एआई सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। पिछले 18 महीनों में उन्होंने अमेरिका की एआई रणनीति बनाने और अंतरराष्ट्रीय एआई कूटनीति में केंद्रीय भूमिका निभाई।
श्रीराम कृष्णन ने व्हाइट हाउस क्यों छोड़ा?
कृष्णन ने स्वयं बताया कि वह थोड़ा विराम लेने के बाद एआई से जुड़ी बड़ी चुनौतियों — जैसे ऊर्जा, डेटा सेंटर और एआई के सामाजिक लाभ — पर स्वतंत्र रूप से काम करना चाहते हैं। उन्होंने इस्तीफे को नकारात्मक नहीं, बल्कि अगले चरण की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया।
कृष्णन के जाने के बाद व्हाइट हाउस की एआई नीति पर क्या असर पड़ेगा?
डेविड सैक्स ने स्पष्ट किया कि कृष्णन सरकार से बाहर रहते हुए भी प्रशासन को सलाह देते रहेंगे। हालांकि, उनकी दैनिक उपस्थिति की अनुपस्थिति में एआई रणनीति की निरंतरता एक महत्वपूर्ण प्रश्न बनी रहेगी।
कृष्णन ने अपने कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या किया?
कृष्णन ने फ्रांस और भारत में एआई सम्मेलनों तथा ब्रिटेन और मध्य पूर्व की सरकारी यात्राओं में अमेरिकी एआई तकनीक और प्रणालियों को सहयोगी देशों के बीच बढ़ावा दिया। यह अमेरिकी एआई कूटनीति का एक अहम हिस्सा रहा।
कृष्णन आगे क्या करने वाले हैं?
कृष्णन ने कहा है कि वह ऐसे संस्थान बनाने पर ध्यान देंगे जो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को एआई की बड़ी चुनौतियों — ऊर्जा, डेटा सेंटर, और एआई के व्यापक सामाजिक लाभ — से निपटने में सक्षम बना सकें।
राष्ट्र प्रेस
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