भारत का एआई नियामक ढांचा: आईटी सचिव एस. कृष्णन बोले — सुरक्षा और नवाचार दोनों साधेंगे
सारांश
मुख्य बातें
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने 19 जुलाई को स्पष्ट किया कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए एक ऐसा नियामक ढांचा तैयार कर रहा है जो आवश्यक सुरक्षा उपायों और नवाचार की स्वतंत्रता के बीच सोचा-समझा संतुलन बनाए। इस प्रक्रिया में अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों के विकसित होते नियामक मॉडलों का गहन अध्ययन किया जा रहा है।
वैश्विक सहमति: एआई को बिना नियमन नहीं छोड़ा जा सकता
कृष्णन ने कहा कि दुनियाभर में यह धारणा अब स्थापित हो चुकी है कि शक्तिशाली एआई मॉडलों को पूरी तरह अनियंत्रित नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा, "वैश्विक स्तर पर यह धारणा बन चुकी है कि एआई के लिए नियमन जरूरी है। पहले एआई नियमन का सबसे मुखर विरोध अमेरिका करता था, लेकिन अब वही कुछ अत्याधुनिक (फ्रंटियर) एआई मॉडलों तक पहुंच को नियंत्रित कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि इस विषय पर सोच किस तरह बदली है।"
यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर की सरकारें तेज़ी से विकसित होती एआई क्षमताओं — जनरेटिव एआई से लेकर फ्रंटियर मॉडलों तक — के संभावित जोखिमों से निपटने के लिए नीतिगत उपाय खोज रही हैं।
भारत का अपना रास्ता: न EU मॉडल, न अमेरिकी ढील
सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भारत न तो यूरोपीय संघ के व्यापक एआई एक्ट की हूबहू नकल करेगा और न ही अमेरिका के शुरुआती दौर के अपेक्षाकृत हल्के नियामक मॉडल को अपनाएगा। इसके बजाय नीति-निर्माता एक ऐसा ढांचा तैयार करने पर काम कर रहे हैं जो फ्रंटियर एआई मॉडलों के संभावित जोखिमों का समाधान करे और साथ ही स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और नवाचार-आधारित उद्यमों के लिए पर्याप्त लचीलापन भी सुनिश्चित करे।
कृष्णन ने कहा, "हमारी प्रतिक्रिया एक संतुलित और सोच-समझकर तैयार किए गए नियमों का समूह होनी चाहिए। एआई प्लेटफॉर्म के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय और गाइडलाइन होना जरूरी है, लेकिन साथ ही ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि नियम नवाचार को बाधित कर दें।"
इंडियाएआई मिशन और घरेलू इकोसिस्टम
गौरतलब है कि भारत इंडियाएआई मिशन के माध्यम से अपने एआई इकोसिस्टम का विस्तार कर रहा है — सार्वजनिक कंप्यूटिंग अवसंरचना को मजबूत बनाया जा रहा है और स्वदेशी एआई विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नियामक ढांचा इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, ताकि घरेलू नवाचार को बाधित किए बिना जोखिमों को नियंत्रित किया जा सके।
वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी
आईटी सचिव ने बताया कि भारत एआई गवर्नेंस से जुड़े वैश्विक विमर्श में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। इसमें यूरोपीय संघ और अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल के साथ बातचीत भी शामिल है, जहां एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच और जिम्मेदार एआई विकास जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।
उन्होंने कहा, "हमने यूरोपीय संघ और पैक्स सिलिका सहित कई देशों और समूहों के साथ इस बात पर विचार-विमर्श किया है कि एआई का नियामक ढांचा कैसा होना चाहिए।"
चुनौती: तकनीक की गति से कदम मिलाना
कृष्णन ने स्वीकार किया कि एआई से संबंधित कानून बनाना आसान नहीं है, क्योंकि यह तकनीक बेहद तेज़ी से विकसित हो रही है। उन्होंने कहा, "कानून को तकनीक की गति के साथ कदम मिलाकर चलना होगा। यह एक बेहद नाजुक संतुलन है और ऐसा ढांचा तैयार करना चुनौतीपूर्ण है। इसमें कुछ समय लगेगा।"
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस नाजुक संतुलन को नीतिगत दस्तावेज़ में किस रूप में ढालता है — और क्या यह ढांचा वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को मजबूत कर पाता है।