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भारत के डीपटेक सेक्टर में 2015 से अब तक $11.4 अरब का निवेश, 2025 बना सबसे मज़बूत साल: IVCA रिपोर्ट

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भारत के डीपटेक सेक्टर में 2015 से अब तक $11.4 अरब का निवेश, 2025 बना सबसे मज़बूत साल: IVCA रिपोर्ट

सारांश

स्टार्टअप फंडिंग की वैश्विक सुस्ती के बीच भारत का डीपटेक सेक्टर अपवाद बना हुआ है — 2015 से अब तक $11.4 अरब का निवेश और 2025 सबसे मज़बूत साल। AI, सेमीकंडक्टर और स्पेसटेक की अगुवाई में यह इकोसिस्टम परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है, लेकिन सीरीज-बी फंडिंग की खाई अभी भी बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

भारत के डीपटेक सेक्टर ने 2015 से 2026 के बीच PE/VC निवेश में $11.4 अरब डॉलर आकर्षित किए।
2025 डीपटेक निवेश के लिहाज़ से अब तक का सबसे मज़बूत वर्ष रहा, व्यापक स्टार्टअप सुस्ती के बावजूद।
AI, जेनरेटिव AI, EV और बैटरी टेक्नोलॉजी सर्वाधिक निवेश आकर्षित करने वाले क्षेत्र रहे; सेमीकंडक्टर और स्पेसटेक ने सबसे तेज़ विकास दर्ज किया।
बेंगलुरु में पिछले एक दशक के कुल निवेश और सौदों का लगभग आधा हिस्सा केंद्रित रहा; अहमदाबाद, कोच्चि और कोलकाता नए हब के रूप में उभर रहे हैं।
IVCA अध्यक्ष रजत टंडन ने सीरीज-बी/सीरीज-सी फंडिंग अंतर और घरेलू LP भागीदारी को प्रमुख चुनौतियाँ बताया।

भारत के डीपटेक सेक्टर ने 2015 से 2026 के बीच निजी इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) निवेश के रूप में लगभग $11.4 अरब डॉलर आकर्षित किए हैं — और यह रफ़्तार थमने का नाम नहीं ले रही। 17 अगस्त 2026 को जारी इंडियन वेंचर एंड अल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन (IVCA) की रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्टअप फंडिंग में व्यापक सुस्ती के बावजूद 2025 डीपटेक निवेश के लिहाज़ से अब तक का सबसे मज़बूत वर्ष साबित हुआ है।

निवेश की रफ़्तार और प्रमुख क्षेत्र

IVCA की रिपोर्ट बताती है कि 2016 के बाद से डीपटेक क्षेत्र में निवेश गतिविधियों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक स्तर पर अत्याधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ते निवेश रुझान का हिस्सा है। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेनरेटिव AI, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और बैटरी टेक्नोलॉजी ने निवेशकों को सर्वाधिक आकर्षित किया है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर और स्पेसटेक ऐसे उभरते क्षेत्र रहे हैं जिन्होंने सबसे तेज़ विकास दर्ज किया।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि केंद्र सरकार की सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष क्षेत्र को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।

विशेषज्ञ की राय

IVCA के अध्यक्ष रजत टंडन ने कहा कि भारत का डीपटेक इकोसिस्टम अब केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तेज़ी से निवेश-योग्य अवसरों वाले एक परिपक्व क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी इस परिवर्तन का स्पष्ट प्रमाण है।

टंडन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को वैश्विक स्तर की डीपटेक कंपनियाँ तैयार करने के लिए कुछ प्रमुख चुनौतियों से पार पाना होगा — जिनमें सीरीज-बी और सीरीज-सी फंडिंग के बीच की खाई को पाटना, घरेलू सीमित भागीदारों (LP) की हिस्सेदारी बढ़ाना, बेहतर एग्ज़िट अवसर सुनिश्चित करना और नीतिगत ढाँचे को और सुदृढ़ बनाना शामिल है।

भौगोलिक केंद्र और नए उभरते हब

भौगोलिक दृष्टि से बेंगलुरु डीपटेक निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है — पिछले एक दशक में कुल निवेश और सौदों का लगभग आधा हिस्सा इसी शहर में संपन्न हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब अहमदाबाद, कोच्चि और कोलकाता जैसे नए शहर भी डीपटेक गतिविधियों और निवेश को आकर्षित करने में सक्रिय हो रहे हैं, जो इस इकोसिस्टम के विकेंद्रीकरण का संकेत है।

फंडिंग की चुनौतियाँ

रिपोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया है। शुरुआती चरण के बाद निवेशकों की संख्या में तेज़ गिरावट आती है और विकास चरण में पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं हो पाती। डीपटेक स्टार्टअप्स को व्यावसायिक सफलता तक पहुँचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है, जबकि पारंपरिक फंड संरचनाएँ प्रायः इतनी लंबी समयावधि के लिए तैयार नहीं होतीं।

गौरतलब है कि सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश फंड्स ने AI, जेनरेटिव AI और SaaS क्षेत्रों में सर्वाधिक रुचि दिखाई, जबकि स्पेसटेक और डिफेंस टेक्नोलॉजी में भी निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

निवेश आधार और आगे की राह

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डीपटेक निवेश आधार फिलहाल मुख्य रूप से फैमिली ऑफिस, संस्थागत निवेशकों और उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों (HNI) पर टिका है। हालाँकि हाल के वर्षों में वैश्विक निवेशकों और कॉर्पोरेट LP की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जो भारत के डीपटेक इकोसिस्टम की बढ़ती वैश्विक साख का संकेत है। आने वाले वर्षों में सीरीज-बी और उससे आगे की फंडिंग में सुधार ही इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह पूंजी किस चरण पर रुक जाती है। रिपोर्ट खुद स्वीकार करती है कि सीरीज-बी और सीरीज-सी पर निवेशकों की संख्या तेज़ी से घटती है — यानी अधिकांश पूंजी शुरुआती दांव तक सीमित है, न कि उन कंपनियों तक जो वास्तव में वैश्विक प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं। बेंगलुरु में आधे से ज़्यादा निवेश का केंद्रित होना भी चिंताजनक है — विविधीकरण के दावों के बावजूद इकोसिस्टम अभी भी एक शहर पर टिका है। जब तक घरेलू LP संस्थागत रूप से मज़बूत नहीं होते और फंड ढाँचे डीपटेक की लंबी परिपक्वता अवधि के अनुकूल नहीं बनते, तब तक यह क्षेत्र वैश्विक नेतृत्व के बजाय 'होनहार बाज़ार' की छवि से बाहर नहीं निकल पाएगा।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के डीपटेक सेक्टर में 2015 से कितना निवेश आया है?
IVCA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डीपटेक सेक्टर ने 2015 से 2026 के बीच PE और VC निवेश में लगभग $11.4 अरब डॉलर आकर्षित किए हैं। इस दौरान 2025 अब तक का सबसे मज़बूत निवेश वर्ष रहा।
भारत में डीपटेक के कौन-से क्षेत्रों में सबसे अधिक निवेश हुआ?
AI, जेनरेटिव AI, EV और बैटरी टेक्नोलॉजी ने सर्वाधिक निवेश आकर्षित किया। सेमीकंडक्टर और स्पेसटेक ने सबसे तेज़ विकास दर्ज किया, जिसमें सरकार की प्रोत्साहन नीतियों की भी भूमिका रही।
डीपटेक स्टार्टअप्स को सीरीज-बी फंडिंग में कठिनाई क्यों होती है?
डीपटेक कंपनियों को व्यावसायिक सफलता तक पहुँचने में अधिक समय लगता है, जबकि पारंपरिक फंड संरचनाएँ इतनी लंबी समयावधि के लिए तैयार नहीं होतीं। इसी कारण शुरुआती चरण के बाद निवेशकों की संख्या तेज़ी से घट जाती है और सीरीज-बी व सीरीज-सी पर पूंजी की कमी हो जाती है।
भारत में डीपटेक निवेश का सबसे बड़ा केंद्र कौन सा है?
बेंगलुरु भारत का सबसे बड़ा डीपटेक निवेश केंद्र है, जहाँ पिछले एक दशक के कुल निवेश और सौदों का लगभग आधा हिस्सा केंद्रित रहा है। हालाँकि अहमदाबाद, कोच्चि और कोलकाता भी नए हब के रूप में उभर रहे हैं।
IVCA के अनुसार भारत के डीपटेक इकोसिस्टम की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
IVCA अध्यक्ष रजत टंडन के अनुसार, सीरीज-बी और सीरीज-सी फंडिंग अंतर को कम करना, घरेलू LP की भागीदारी बढ़ाना, बेहतर एग्ज़िट अवसर सुनिश्चित करना और नीतिगत ढाँचे को मज़बूत बनाना प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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