भारत-दक्षिण अफ्रीका ने खगोल विज्ञान में वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत किया, आईयूसीएए का बैनर सौंपा

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भारत-दक्षिण अफ्रीका ने खगोल विज्ञान में वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत किया, आईयूसीएए का बैनर सौंपा

सारांश

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने केप टाउन में खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अपने सहयोग को औपचारिक रूप से मजबूत किया। उच्चायुक्त प्रभात कुमार द्वारा आईयूसीएए का बैनर सौंपना दोनों देशों के वैज्ञानिक संबंधों की गहराई और ब्रिक्स के तहत बढ़ते सहयोग का संकेत है।

मुख्य बातें

प्रभात कुमार , दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त, ने 10 मई 2026 को एसएएओ को आईयूसीएए का बैनर सौंपा।
रॉयल ऑब्जर्वेटरी , केप टाउन में आयोजित समारोह में दोनों देशों के बीच खगोल विज्ञान सहयोग को मजबूत किया गया।
एसएएओ की मैनेजिंग डायरेक्टर रोजालिंड स्केल्टन ने बताया कि एसएलटी सुविधा पिछले 20 वर्षों में कई बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर चुकी है।
दोनों संस्थाएँ अक्टूबर-नवंबर 2026 में नए कैमरा डिटेक्टर और कंट्रोलर विकास पर सहयोग कर रही हैं।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है; दक्षिण अफ्रीका 13 वर्किंग ग्रुप्स में सक्रिय भागीदारी कर रहा है।

केप टाउन में 10 मई 2026 को दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (एसएएओ) को भारत के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) का एक बैनर औपचारिक रूप से सौंपा। रॉयल ऑब्जर्वेटरी में आयोजित इस समारोह का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे वैज्ञानिक सहयोग को और गहरा करना था।

उच्चायुक्त की प्रशंसा और संदेश

समारोह में प्रभात कुमार ने एसएएओ की 'बेहतरीन शोध' उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आईयूसीएए का बैनर लगाना इस बात का प्रतीक है कि भारत सरकार वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को कितनी प्राथमिकता देती है। उन्होंने जोर दिया कि विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग भारत की विदेश नीति का एक मूल स्तंभ है।

उच्चायुक्त ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

डिटेक्टर विकास और कर्मचारी प्रशिक्षण में तब्दील हो रही है। जो उल्लेखनीय है वह यह है कि दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका, जिनेवा और फ्रांस-आधारित वैश्विक परियोजनाओं में भारतीय सहयोगियों के साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह वैश्विक विज्ञान संस्थानों की गतिशीलता को प्रतिबिंबित करता है — जहाँ भूराजनीतिक ब्लॉक सीमाएँ विज्ञान के सहयोग को रोक नहीं सकते।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खगोल विज्ञान सहयोग क्या है?
भारत के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) और दक्षिण अफ्रीका के दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (एसएएओ) के बीच एक औपचारिक साझेदारी है। यह सहयोग एसएलटी (साउथ अफ्रीकन लार्ज टेलीस्कोप) के लिए नए कैमरा डिटेक्टर और नियंत्रक विकास पर केंद्रित है।
10 मई 2026 को केप टाउन में क्या हुआ?
प्रभात कुमार , दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त, ने रॉयल ऑब्जर्वेटरी में एक औपचारिक समारोह में एसएएओ को आईयूसीएए का एक बैनर सौंपा। यह समारोह दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक था।
एसएलटी सुविधा ने क्या उपलब्धियाँ हासिल की हैं?
एसएओ की मैनेजिंग डायरेक्टर रोजालिंद स्केल्टन के अनुसार, एसएलटी सुविधा पिछले 20 वर्षों में कई बड़ी खगोलीय खोजें कर चुकी है। वर्तमान में, भारतीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक नया कैमरा डिटेक्टर और नियंत्रक विकसित किया जा रहा है।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता में क्या भूमिका निभा रहा है?
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहा है। इसके तहत खगोल विज्ञान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें ब्रिक्स खगोल विज्ञान वर्किंग ग्रुप की बैठकें, एसएलटी वर्कशॉप और बोर्ड मीटिंग शामिल हैं।
दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिक भारत कब आ रहे हैं?
दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिक अक्टूबर और नवंबर 2026 में भारत आने के लिए तैयार हैं। इस दौरान ब्रिक्स खगोल विज्ञान वर्किंग ग्रुप की बैठक, एसएलटी वर्कशॉप और बोर्ड मीटिंग होंगी।
राष्ट्र प्रेस