भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच खगोल विज्ञान में सहयोग गहरा, केप टाउन में IUCAA बैनर समर्पण
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने 10 मई को केप टाउन के रॉयल ऑब्जर्वेटरी में दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (SAAO) को भारत के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) का बैनर औपचारिक रूप से सौंपा। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच दो दशक से अधिक समय से चल रहे वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने और ब्रिक्स खगोल विज्ञान पहल के तहत संयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।
उच्चायुक्त की प्रतिबद्धता
समारोह में उच्चायुक्त कुमार ने SAAO की उत्कृष्ट अनुसंधान उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि IUCAA बैनर का समर्पण भारत सरकार की वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग भारत की विदेश नीति का एक मूल स्तंभ है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं, और हमें संयुक्त रूप से आगे बढ़ते रहना चाहिए। उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास से किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हम सदैव तैयार हैं।"
SAAO की नई पहल
SAAO की प्रबंध निदेशक रोजालिंड स्केल्टन ने भारतीय सहयोगियों के साथ चल रही एक महत्वपूर्ण परियोजना का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि SAALT सुविधा के पिछले 20 वर्षों में कई उल्लेखनीय वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हुई हैं। स्केल्टन ने कहा, "हम विशेष रूप से उस तकनीकी विकास पर गर्वित हैं जो SAALT को भविष्य की ओर ले जा रहा है। वर्तमान में हम भारतीय सहयोगियों के साथ एक नया कैमरा डिटेक्टर और नियंत्रक प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जिसे आने वाले महीनों में दूरबीन में स्थापित किया जाएगा। यह हमारे लिए एक रोमांचक नया कदम है।"
ब्रिक्स खगोल विज्ञान कार्यक्रम
स्केल्टन ने संकेत दिया कि ब्रिक्स ढाँचे के तहत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होगा। दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिकों को अक्टूबर और नवंबर में भारत की यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है, जहाँ वे ब्रिक्स एस्ट्रोनॉमी वर्किंग ग्रुप की बैठक, SAALT वर्कशॉप और बोर्ड मीटिंग में भाग लेंगे। स्केल्टन ने कहा, "हम अक्टूबर और नवंबर में भारत जाने के लिए उत्साहित हैं। इसमें ब्रिक्स खगोल विज्ञान कार्य समूह की बैठक, SAALT कार्यशाला और बोर्ड मीटिंग शामिल है।"
दक्षिण अफ्रीकी सरकार की भूमिका
दक्षिण अफ्रीकी सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विभाग के टेबोगो माकोमा ने इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। माकोमा ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के 13 कार्य समूहों में सक्रिय है और भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान सभी कार्यक्रमों को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि हमारे कार्य समूह सक्रिय रहें और भारत के कार्यक्रमों को समर्थन दें। हम पहले भी कई सफल कार्यक्रमों में भाग लिया है और आगे भी पूर्ण सहयोग जारी रखेंगे।"
व्यापक वैज्ञानिक सहयोग
माकोमा ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों का सहयोग केवल खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं है। भारत और दक्षिण अफ्रीका अंटार्कटिका, जिनेवा और फ्रांस से संबंधित कई वैश्विक विज्ञान परियोजनाओं में संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। यह व्यापक सहयोग दोनों राष्ट्रों की बहु-विषयक अनुसंधान क्षमता और BRICS के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एजेंडे के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं में और गहरी भागीदारी की अपेक्षा की जा रही है।