भारत-दक्षिण अफ्रीका का वैज्ञानिक सहयोग मजबूत, केप टाउन में आईयूसीएए बैनर समर्पण

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भारत-दक्षिण अफ्रीका का वैज्ञानिक सहयोग मजबूत, केप टाउन में आईयूसीएए बैनर समर्पण

सारांश

भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने केप टाउन में दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला को आईयूसीएए का बैनर सौंपा, जो भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच दशकों पुराने वैज्ञानिक सहयोग को गहरा करता है। ब्रिक्स की भारतीय अध्यक्षता के तहत, दोनों देश खगोल विज्ञान, अंटार्कटिका अनुसंधान और अन्य वैश्विक परियोजनाओं में संयुक्त प्रयास बढ़ा रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने केप टाउन के रॉयल ऑब्जर्वेटरी में दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला को आईयूसीएए का बैनर सौंपा।
एसएएओ की प्रबंध निदेशक रोजालिंड स्केल्टन ने बताया कि भारतीय सहयोगियों के साथ नया कैमरा डिटेक्टर और नियंत्रक प्रणाली विकसित की जा रही है।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जिसके तहत खगोल विज्ञान पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
दक्षिण अफ्रीकी विज्ञान विभाग के टेबोगो माकोमा ने ब्रिक्स के 13 वर्किंग ग्रुप्स में भारत की अध्यक्षता को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई।
दोनों देश अंटार्कटिका, जिनेवा और फ्रांस से संबद्ध वैश्विक विज्ञान परियोजनाओं में भी संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।

केप टाउन में रॉयल ऑब्जर्वेटरी में दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (एसएएओ) को भारत के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) का बैनर औपचारिक रूप से सौंपा। यह कार्यक्रम भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से चल रहे वैज्ञानिक सहयोग को गहरा करने का प्रतीक है।

भारतीय उच्चायुक्त की टिप्पणी

उच्चायुक्त कुमार ने एसएएओ की उत्कृष्ट शोध कार्य की सराहना की और कहा कि आईयूसीएए का बैनर भारत सरकार की वैज्ञानिक शोध और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग भारत की विदेश नीति का केंद्रीय अंग है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं और हमें संयुक्त रूप से आगे बढ़ते रहना चाहिए।" उन्होंने जोड़ा कि उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास से किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो तो वह सदैव उपलब्ध है।

एसएएओ के प्रबंधन का दृष्टिकोण

एसएएओ की प्रबंध निदेशक रोजालिंड स्केल्टन ने इस साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों में एसएएलटी सुविधा ने असंख्य महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। स्केल्टन ने कहा, "हम विशेषकर उस तकनीकी विकास पर गर्व करते हैं जो एसएएलटी को भविष्य की ओर ले जा रहा है। वर्तमान में हम भारतीय सहयोगियों के साथ एक नया कैमरा डिटेक्टर और नियंत्रक प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जिसे आने वाले महीनों में टेलीस्कोप में स्थापित किया जाएगा।"

ब्रिक्स ढाँचे में सहयोग

स्केल्टन ने ब्रिक्स के अंतर्गत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग में वृद्धि की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिक इस वर्ष भारत में होने वाली महत्वपूर्ण खगोल विज्ञान बैठकों में भाग लेंगे। "हम अक्टूबर और नवंबर में भारत आने के लिए उत्सुक हैं, जिसमें ब्रिक्स एस्ट्रोनॉमी वर्किंग ग्रुप की बैठक, एसएएलटी कार्यशाला और बोर्ड मीटिंग शामिल हैं," उन्होंने कहा।

दक्षिण अफ्रीकी सरकार की प्रतिबद्धता

दक्षिण अफ्रीकी विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विभाग के टेबोगो माकोमा ने इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व पर बल दिया। माकोमा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के कई वर्किंग ग्रुप्स में सक्रिय है और भारत की 2026 की अध्यक्षता के दौरान इसके कार्यक्रमों को पूर्ण समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "ब्रिक्स के अंतर्गत हमारे 13 वर्किंग ग्रुप हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि उनमें सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और भारत के कार्यक्रमों को समर्थन दें।"

बहुआयामी वैश्विक सहयोग

माकोमा ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों का सहयोग केवल खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं है। वे अंटार्कटिका, जिनेवा और फ्रांस से संबद्ध वैश्विक विज्ञान परियोजनाओं में भी संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। यह भारत-दक्षिण अफ्रीका वैज्ञानिक साझेदारी की व्यापकता और गहराई को प्रदर्शित करता है, जो ब्रिक्स सहयोग के ढाँचे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अंटार्कटिका से लेकर कणीय भौतिकी तक फैला हुआ है, पश्चिमी-प्रभुत्व वाले अनुसंधान ढाँचों से परे एक स्वतंत्र वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने की भारत की दीर्घकालीन रणनीति को प्रतिबिंबित करता है। हालांकि, सफलता सहयोग की घोषणाओं में नहीं, बल्कि साझा अनुसंधान से निकलने वाली वास्तविक खोजों में निहित है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खगोल विज्ञान सहयोग क्या है?
भारत और दक्षिण अफ्रीका दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (एसएएओ) के माध्यम से खगोल विज्ञान में सहयोग कर रहे हैं। भारत के उच्चायुक्त ने आईयूसीएए का बैनर सौंपा, और दोनों देश नए कैमरा डिटेक्टर विकास, ब्रिक्स खगोल विज्ञान वर्किंग ग्रुप और एसएएलटी कार्यशालाओं में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
ब्रिक्स की भारतीय अध्यक्षता में दक्षिण अफ्रीका की क्या भूमिका है?
दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के 13 वर्किंग ग्रुप्स में भारत की 2026 की अध्यक्षता को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिक अक्टूबर-नवंबर में भारत में होने वाली ब्रिक्स एस्ट्रोनॉमी वर्किंग ग्रुप बैठकों, एसएएलटी वर्कशॉप और बोर्ड मीटिंग्स में भाग लेंगे।
एसएएलटी सुविधा क्या है और इसमें नया क्या विकसित हो रहा है?
एसएएलटी (दक्षिण अफ्रीकी बड़ी दूरबीन) 20 वर्षों से अनुसंधान में योगदान दे रही है। वर्तमान में, भारतीय सहयोगियों के साथ एक नया कैमरा डिटेक्टर और नियंत्रक प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसे आने वाले महीनों में दूरबीन में स्थापित किया जाएगा।
भारत-दक्षिण अफ्रीका सहयोग केवल खगोल विज्ञान तक सीमित है क्या?
नहीं, दोनों देशों का सहयोग बहुआयामी है। वे अंटार्कटिका अनुसंधान, जिनेवा और फ्रांस से संबद्ध वैश्विक विज्ञान परियोजनाओं सहित कई क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस