भारत-दक्षिण अफ्रीका का वैज्ञानिक सहयोग मजबूत, केप टाउन में आईयूसीएए बैनर समर्पण
सारांश
मुख्य बातें
केप टाउन में रॉयल ऑब्जर्वेटरी में दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (एसएएओ) को भारत के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) का बैनर औपचारिक रूप से सौंपा। यह कार्यक्रम भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से चल रहे वैज्ञानिक सहयोग को गहरा करने का प्रतीक है।
भारतीय उच्चायुक्त की टिप्पणी
उच्चायुक्त कुमार ने एसएएओ की उत्कृष्ट शोध कार्य की सराहना की और कहा कि आईयूसीएए का बैनर भारत सरकार की वैज्ञानिक शोध और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग भारत की विदेश नीति का केंद्रीय अंग है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं और हमें संयुक्त रूप से आगे बढ़ते रहना चाहिए।" उन्होंने जोड़ा कि उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास से किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो तो वह सदैव उपलब्ध है।
एसएएओ के प्रबंधन का दृष्टिकोण
एसएएओ की प्रबंध निदेशक रोजालिंड स्केल्टन ने इस साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों में एसएएलटी सुविधा ने असंख्य महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। स्केल्टन ने कहा, "हम विशेषकर उस तकनीकी विकास पर गर्व करते हैं जो एसएएलटी को भविष्य की ओर ले जा रहा है। वर्तमान में हम भारतीय सहयोगियों के साथ एक नया कैमरा डिटेक्टर और नियंत्रक प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जिसे आने वाले महीनों में टेलीस्कोप में स्थापित किया जाएगा।"
ब्रिक्स ढाँचे में सहयोग
स्केल्टन ने ब्रिक्स के अंतर्गत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग में वृद्धि की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिक इस वर्ष भारत में होने वाली महत्वपूर्ण खगोल विज्ञान बैठकों में भाग लेंगे। "हम अक्टूबर और नवंबर में भारत आने के लिए उत्सुक हैं, जिसमें ब्रिक्स एस्ट्रोनॉमी वर्किंग ग्रुप की बैठक, एसएएलटी कार्यशाला और बोर्ड मीटिंग शामिल हैं," उन्होंने कहा।
दक्षिण अफ्रीकी सरकार की प्रतिबद्धता
दक्षिण अफ्रीकी विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विभाग के टेबोगो माकोमा ने इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व पर बल दिया। माकोमा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के कई वर्किंग ग्रुप्स में सक्रिय है और भारत की 2026 की अध्यक्षता के दौरान इसके कार्यक्रमों को पूर्ण समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "ब्रिक्स के अंतर्गत हमारे 13 वर्किंग ग्रुप हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि उनमें सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और भारत के कार्यक्रमों को समर्थन दें।"
बहुआयामी वैश्विक सहयोग
माकोमा ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों का सहयोग केवल खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं है। वे अंटार्कटिका, जिनेवा और फ्रांस से संबद्ध वैश्विक विज्ञान परियोजनाओं में भी संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। यह भारत-दक्षिण अफ्रीका वैज्ञानिक साझेदारी की व्यापकता और गहराई को प्रदर्शित करता है, जो ब्रिक्स सहयोग के ढाँचे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।