13 सितंबर 2026
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भारत-यूएई रक्षा-अंतरिक्ष सहयोग पर सहमत, ओडिशा में $11.5 अरब के एल्युमिनियम प्लांट की चर्चा

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भारत-यूएई रक्षा-अंतरिक्ष सहयोग पर सहमत, ओडिशा में $11.5 अरब के एल्युमिनियम प्लांट की चर्चा

सारांश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर मोदी-शेख खालिद बैठक ने भारत-यूएई रिश्तों को नया आयाम दिया। रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग की सहमति के साथ-साथ ओडिशा में $11.5 अरब की एल्युमिनियम परियोजना ने संकेत दिया कि यूएई का भारत में निवेश फोकस ऊर्जा से विनिर्माण की ओर तेज़ी से शिफ्ट हो रहा है।

मुख्य बातें

PM मोदी और अबू धाबी क्राउन प्रिंस शेख खालिद ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा एवं प्रौद्योगिकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
यूएई की IHC द्वारा ओडिशा में $11.5 अरब की ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना प्रस्तावित — भारत का अब तक का सबसे बड़ा एकीकृत एल्युमिनियम निवेश।
संप्रभु निवेश मंच एल-इमाद को दीर्घकालिक निवेश साझेदारी का माध्यम बनाने पर सहमति।
बैठक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई; भारत इस वर्ष ब्रिक्स अध्यक्ष है।
16 जून 2026 को जी7 में मोदी-शेख मोहम्मद बैठक के बाद तीन महीने में दूसरी उच्चस्तरीय भारत-यूएई वार्ता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय बैठक में रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के मुख्य बिंदु

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने पिछले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और यूएई साझा हितों एवं प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स मंच सहित अन्य बहुपक्षीय मंचों पर समन्वित कार्य जारी रखेंगे। ऊर्जा, व्यापार, निवेश, बुनियादी ढाँचा और नई प्रौद्योगिकियों सहित अनेक क्षेत्रों में साझेदारी लगातार नई ऊँचाइयों तक पहुँचने की बात स्वीकारी गई।

ओडिशा में $11.5 अरब की ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना

बैठक में विशेष रूप से यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) द्वारा ओडिशा में प्रस्तावित $11.5 अरब की एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना का उल्लेख किया गया। इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा एकीकृत एल्युमिनियम निवेश माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने कहा कि यह परियोजना ओडिशा को वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकती है और भारत-यूएई निवेश सहयोग का एक बड़ा उदाहरण बनेगी।

संप्रभु निवेश मंच 'एल-इमाद' की भूमिका

दोनों नेताओं ने माना कि संप्रभु निवेश मंच एल-इमाद दोनों देशों के बीच निवेश एवं आर्थिक सहयोग को और गहरा करने में महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। इस मंच के ज़रिये दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश और विकास साझेदारी को नई दिशा मिलने की संभावना जताई गई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को लेकर सरकार लगातार नए द्विपक्षीय ढाँचों को मज़बूत कर रही है।

शीर्ष स्तर पर नियमित संवाद की परंपरा

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मुलाकात दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद और पीढ़ियों से चली आ रही निरंतरता को दर्शाती है। गौरतलब है कि क्राउन प्रिंस शेख खालिद शुक्रवार को भारत पहुँचे थे ताकि भारत की अध्यक्षता वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग ले सकें। इस वर्ष भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय पर केंद्रित है।

पिछली बैठकों से तुलना

इससे पहले 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात हुई थी, जिसमें निवेश, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को विस्तारित करने पर चर्चा की गई थी। तीन महीने से भी कम समय में दूसरी उच्चस्तरीय बैठक इस बात का संकेत है कि दोनों देश आर्थिक और रक्षा सहयोग को तेज़ी से आगे बढ़ाना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा एल्युमिनियम परियोजना और एल-इमाद जैसे निवेश ढाँचे अगले दो-तीन वर्षों में भारत-यूएई व्यापारिक संबंधों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंतरिक्ष और विनिर्माण में विस्तार एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। $11.5 अरब की ओडिशा एल्युमिनियम परियोजना कागज़ पर प्रभावशाली है, लेकिन भारत में बड़ी FDI प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन का ट्रैक रिकॉर्ड मिश्रित रहा है — वेदांता-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर डील का ठंडा पड़ना ताज़ा उदाहरण है। असली कसौटी यह होगी कि निवेश समयसीमा पर ज़मीनी काम शुरू होता है या नहीं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूएई ब्रिक्स बैठक 2026 में किन क्षेत्रों पर सहमति बनी?
दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। ऊर्जा, व्यापार, निवेश और बुनियादी ढाँचे में मौजूदा साझेदारी को और मज़बूत करने पर भी चर्चा हुई।
ओडिशा एल्युमिनियम परियोजना क्या है और इसका निवेश कितना है?
यह यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) द्वारा ओडिशा में $11.5 अरब की लागत से प्रस्तावित एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना है। इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा एकीकृत एल्युमिनियम निवेश माना जा रहा है।
एल-इमाद निवेश मंच क्या है?
एल-इमाद भारत और यूएई के बीच एक संप्रभु निवेश मंच है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश और विकास साझेदारी को गहरा करना है।
मोदी और यूएई नेतृत्व की पिछली बैठक कब हुई थी?
इससे पहले 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और यूएई राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की बैठक हुई थी।
2026 में ब्रिक्स अध्यक्षता किसकी है और विषय क्या है?
2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। इस वर्ष की थीम 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' है।
राष्ट्र प्रेस
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