भारत-यूएई रक्षा-अंतरिक्ष सहयोग पर सहमत, ओडिशा में $11.5 अरब के एल्युमिनियम प्लांट की चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय बैठक में रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के मुख्य बिंदु
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने पिछले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और यूएई साझा हितों एवं प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स मंच सहित अन्य बहुपक्षीय मंचों पर समन्वित कार्य जारी रखेंगे। ऊर्जा, व्यापार, निवेश, बुनियादी ढाँचा और नई प्रौद्योगिकियों सहित अनेक क्षेत्रों में साझेदारी लगातार नई ऊँचाइयों तक पहुँचने की बात स्वीकारी गई।
ओडिशा में $11.5 अरब की ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना
बैठक में विशेष रूप से यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) द्वारा ओडिशा में प्रस्तावित $11.5 अरब की एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना का उल्लेख किया गया। इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा एकीकृत एल्युमिनियम निवेश माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने कहा कि यह परियोजना ओडिशा को वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकती है और भारत-यूएई निवेश सहयोग का एक बड़ा उदाहरण बनेगी।
संप्रभु निवेश मंच 'एल-इमाद' की भूमिका
दोनों नेताओं ने माना कि संप्रभु निवेश मंच एल-इमाद दोनों देशों के बीच निवेश एवं आर्थिक सहयोग को और गहरा करने में महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। इस मंच के ज़रिये दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश और विकास साझेदारी को नई दिशा मिलने की संभावना जताई गई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को लेकर सरकार लगातार नए द्विपक्षीय ढाँचों को मज़बूत कर रही है।
शीर्ष स्तर पर नियमित संवाद की परंपरा
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मुलाकात दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद और पीढ़ियों से चली आ रही निरंतरता को दर्शाती है। गौरतलब है कि क्राउन प्रिंस शेख खालिद शुक्रवार को भारत पहुँचे थे ताकि भारत की अध्यक्षता वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग ले सकें। इस वर्ष भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय पर केंद्रित है।
पिछली बैठकों से तुलना
इससे पहले 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात हुई थी, जिसमें निवेश, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को विस्तारित करने पर चर्चा की गई थी। तीन महीने से भी कम समय में दूसरी उच्चस्तरीय बैठक इस बात का संकेत है कि दोनों देश आर्थिक और रक्षा सहयोग को तेज़ी से आगे बढ़ाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा एल्युमिनियम परियोजना और एल-इमाद जैसे निवेश ढाँचे अगले दो-तीन वर्षों में भारत-यूएई व्यापारिक संबंधों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।