10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मोदी की यूएई यात्रा से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत, एलपीजी आपूर्ति और रक्षा साझेदारी पर अहम समझौते

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मोदी की यूएई यात्रा से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत, एलपीजी आपूर्ति और रक्षा साझेदारी पर अहम समझौते

सारांश

मोदी की यूएई यात्रा महज कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी — यह ऊर्जा संकट के बीच एक रणनीतिक दांव था। एलपीजी आपूर्ति, पेट्रोलियम भंडार और रक्षा रूपरेखा समझौतों के साथ, भारत ने खाड़ी अनिश्चितता के बीच अपनी ऊर्जा निर्भरता को सुरक्षित करने की कोशिश की है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 15 मई को यूएई की यात्रा की, जिसे विदेश मंत्रालय ने 'अत्यंत सफल' बताया।
एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने के लिए अहम समझौते संपन्न हुए।
यूएई और अबू धाबी से भारत में बुनियादी ढाँचे सहित अन्य क्षेत्रों में नए निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ।
भारत ने यूएई के साथ रक्षा रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा पर भी हस्ताक्षर किए।
पश्चिम एशिया संकट से 40% क्रूड, 90% एलपीजी और 65% प्राकृतिक गैस आयात प्रभावित हुआ, फिर भी घरेलू आपूर्ति बाधित नहीं हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 मई को संपन्न संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा के दौरान हुए समझौतों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ठोस बल मिला है — विशेष रूप से एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के मोर्चे पर। विदेश मंत्रालय ने 25 मई को मध्य एशिया के हालिया घटनाक्रम पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।

यात्रा में क्या हासिल हुआ

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री की यूएई यात्रा अत्यंत सफल रही। उन्होंने कहा, 'इस दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती प्रदान की है — विशेष रूप से एलपीजी आपूर्ति और हमारे रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को सुदृढ़ करने के संदर्भ में।'

जायसवाल के अनुसार, निवेश से जुड़े समझौते भी इस यात्रा का अहम हिस्सा रहे, जिनसे अबू धाबी और यूएई से भारत तथा भारतीय संस्थाओं में बुनियादी ढाँचे एवं अन्य क्षेत्रों में नए निवेश के प्रवाह को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रक्षा साझेदारी को नई दिशा

इस यात्रा के दौरान भारत ने यूएई के साथ रक्षा रणनीतिक साझेदारी के लिए एक रूपरेखा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। जायसवाल ने कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और अधिक सुदृढ़ हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है और भारत अपनी रणनीतिक साझेदारियों को विविध बनाने पर ज़ोर दे रहा है।

आयात पर पश्चिम एशिया संकट का असर

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने आयात पर पड़े प्रभाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया, 'पश्चिम एशिया संकट के चलते 40 फीसदी क्रूड आयात, 90 फीसदी एलपीजी आयात और 65 फीसदी प्राकृतिक गैस आयात पर असर पड़ा है।' गौरतलब है कि यूएई भारत के शीर्ष ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में से एक है, और इन आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत की ऊर्जा निर्भरता इस क्षेत्र पर कितनी गहरी है।

शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि इन दबावों के बावजूद देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

सरकार की नज़र खाड़ी पर

विदेश मंत्रालय ने बताया कि सरकार खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रम पर करीबी नज़र बनाए हुए है। मंत्रालय के अनुसार, यूएई के साथ हुए ये समझौते भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को दीर्घकालिक स्थिरता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। आने वाले समय में इन समझौतों के क्रियान्वयन की निगरानी दोनों देशों के संबंधित मंत्रालय मिलकर करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये दीर्घकालिक ऊर्जा विविधीकरण की रणनीति का हिस्सा हैं या केवल संकटकालीन प्रबंधन। 90 फीसदी एलपीजी आयात एक ही क्षेत्र पर निर्भर होना एक संरचनात्मक कमज़ोरी है जिसे एक यात्रा से नहीं पाटा जा सकता। रक्षा रूपरेखा समझौता संकेत देता है कि भारत खाड़ी संबंधों को केवल ऊर्जा व्यापार से आगे ले जाना चाहता है — यह सही दिशा है, लेकिन क्रियान्वयन की कसौटी अभी बाकी है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की यूएई यात्रा में कौन-से प्रमुख समझौते हुए?
15 मई को हुई यूएई यात्रा में भारत ने एलपीजी आपूर्ति, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने, बुनियादी ढाँचे में निवेश और रक्षा रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा पर समझौते किए। विदेश मंत्रालय के अनुसार इन समझौतों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया संकट का भारत के ऊर्जा आयात पर क्या असर पड़ा?
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट से भारत का 40 फीसदी क्रूड आयात, 90 फीसदी एलपीजी आयात और 65 फीसदी प्राकृतिक गैस आयात प्रभावित हुआ है। हालाँकि सरकार ने देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है।
भारत और यूएई के बीच रक्षा समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
इस यात्रा के दौरान भारत ने यूएई के साथ रक्षा रणनीतिक साझेदारी की एक रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के संबंधों को केवल व्यापार और ऊर्जा से आगे ले जाता है। यह खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मज़बूत करने की दिशा में एक कदम है।
यूएई से निवेश समझौतों का भारत को क्या फायदा होगा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, अबू धाबी और यूएई से भारत में बुनियादी ढाँचे और अन्य क्षेत्रों में नए निवेश के प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। इन समझौतों से भारतीय संस्थाओं को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यूएई कितना अहम है?
यूएई भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। 90 फीसदी एलपीजी आयात खाड़ी क्षेत्र से आता है, जो इस साझेदारी की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करता है। यूएई के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भारत की घरेलू ऊर्जा उपलब्धता को स्थिर रखने में सहायक माने जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 15 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले