यूपीआई और डीपीआई को ग्लोबल साउथ तक पहुँचाएगा भारत, फिनटेक निर्यात ₹8 अरब से ₹60-80 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य: वाणिज्य सचिव
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार, 9 सितंबर को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में कहा कि भारत को अपनी फिनटेक क्षमताओं — विशेष रूप से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) — का लाभ उठाते हुए वैश्विक बाज़ारों में विस्तार करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों को भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली के लिए सबसे बड़े अवसर के रूप में रेखांकित किया।
फिनटेक निर्यात का बड़ा लक्ष्य
अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर फिनटेक सेवाओं का बाज़ार तेज़ी से विस्तार कर रहा है। उनके अनुसार, यदि भारत इस वैश्विक व्यापार में मात्र 10 प्रतिशत हिस्सेदारी भी हासिल कर लेता है, तो देश का फिनटेक सेवा निर्यात मौजूदा 8 अरब डॉलर से बढ़कर 60 से 80 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है।
उन्होंने कहा, "फिनटेक सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है। यदि हम इसमें 10 प्रतिशत योगदान भी हासिल करते हैं, तो यह 8 अरब डॉलर से 60-80 अरब डॉलर के निर्यात तक पहुँचने की यात्रा हो सकती है।"
23 देशों के साथ डीपीआई सहयोग
वाणिज्य सचिव ने बताया कि भारत पहले से ही अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) मॉडल को अन्य देशों तक पहुँचाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इस उद्देश्य के तहत भारत अब तक लगभग 23 देशों के साथ डीपीआई सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर चुका है।
अग्रवाल ने कहा, "हमने डीपीआई सहयोग के लिए लगभग 23 देशों के साथ समझौते किए हैं। हम जिन भी मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत करते हैं, उनमें भुगतान प्रणालियों के समन्वय पर भी चर्चा करते हैं, खासकर उन देशों के साथ जहाँ भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है।" यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई पहले से ही सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और कई अन्य देशों में सक्रिय है।
प्रेषण और ऋण सेवाओं को सस्ता बनाने पर ज़ोर
अग्रवाल ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि प्रौद्योगिकी वित्तीय सेवाओं की लागत कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से प्रेषण (रेमिटेंस), ऋण वितरण और भुगतान सेवाओं को अधिक सस्ता एवं सुलभ बनाने के लिए भारत की फिनटेक क्षमताओं का वैश्विक विस्तार किया जा सकता है। गौरतलब है कि भारत दुनिया में सबसे अधिक प्रेषण प्राप्त करने वाले देशों में से एक है, और इस क्षेत्र में डिजिटल समाधान की माँग लगातार बढ़ रही है।
मुक्त व्यापार समझौतों में फिनटेक की भूमिका
वाणिज्य सचिव ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में फिनटेक क्षेत्र को प्राथमिकता देने की भारत की रणनीति को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि भारत एफटीए वार्ताओं में वित्तीय विनियमन, दूरसंचार, सीमा-पार डेटा प्रवाह, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), निवेश और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़ी बाधाओं को दूर करने का प्रयास करता है।
उन्होंने कहा, "जब हम एफटीए पर बातचीत करते हैं, तो वित्तीय विनियमन, दूरसंचार, डेटा प्रवाह, एआई, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़ी बाधाओं को कम करने का प्रयास करते हैं, ताकि फिनटेक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके।" उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चार से पाँच वर्षों में भारत नौ मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है, जिनके दायरे में आने वाले देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर है।
आगे की राह
भारत की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान प्रणालियों को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और कई देश अपने स्वयं के भुगतान नेटवर्क विकसित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत अपने डीपीआई मॉडल को समय रहते ग्लोबल साउथ के देशों में स्थापित कर लेता है, तो यह न केवल निर्यात राजस्व बढ़ाएगा, बल्कि भू-राजनीतिक प्रभाव का भी एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है।