मारुति सुजुकी का रेल लॉजिस्टिक्स में रिकॉर्ड: 30 लाख वाहन डिस्पैच, हिस्सेदारी 26.5% तक पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
भारत की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल निर्माता मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने 13 मई 2026 को घोषणा की कि उसने भारतीय रेलवे नेटवर्क के माध्यम से 30 लाख से अधिक वाहनों की डिलीवरी का ऐतिहासिक आँकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि कंपनी की ग्रीन और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स रणनीति की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव है।
एक दशक में नौ गुना वृद्धि
वित्त वर्ष 2014-15 में मारुति सुजुकी के कुल वाहन डिस्पैच में रेल परिवहन की हिस्सेदारी मात्र 5 प्रतिशत थी। एक दशक की निरंतर कोशिशों के बाद यह हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 26.5 प्रतिशत हो गई है — यानी लगभग नौ गुना की छलाँग। कंपनी के अनुसार, 20 लाख से 30 लाख वाहनों की ढुलाई का यह सफर मात्र 21 महीनों में पूरा किया गया, जो कंपनी के इतिहास में रेलवे के जरिए 10 लाख अतिरिक्त वाहनों की सबसे तेज़ वृद्धि है।
कंपनी प्रमुख का बयान
मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी की ग्रीन लॉजिस्टिक्स यात्रा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद से रेल आधारित माल ढुलाई लगभग नौ गुना बढ़ चुकी है और अब यह कुल वाहन परिवहन के एक चौथाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। ताकेउची ने यह भी बताया कि कंपनी ने समर्पित ग्रीन लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹1,372 करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
पीएम गति शक्ति योजना की भूमिका
ताकेउची ने केंद्र सरकार की पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की सराहना करते हुए कहा कि इस योजना ने इंटीग्रेटेड और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के लिए मज़बूत ढाँचा तैयार किया है, जिससे उद्योगों को रेल आधारित माल परिवहन अपनाने में मदद मिली है। कंपनी के हंसलपुर (गुजरात) और मानेसर (हरियाणा) स्थित दोनों मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में इन-प्लांट रेलवे साइडिंग की सुविधा पीएम गति शक्ति के तहत ही विकसित की गई है। मारुति सुजुकी के अनुसार, वह भारत की पहली और एकमात्र पैसेंजर व्हीकल निर्माता है जिसके दो संयंत्रों में यह सुविधा उपलब्ध है।
मौजूदा नेटवर्क और क्षमता
वर्तमान में कंपनी का रेल नेटवर्क हब-एंड-स्पोक लॉजिस्टिक्स मॉडल के तहत 22 हब्स के ज़रिए देश के 600 से अधिक शहरों को सेवाएँ प्रदान कर रहा है। दोनों इन-प्लांट रेलवे साइडिंग्स की संयुक्त वार्षिक डिस्पैच क्षमता 7.5 लाख वाहन है। कंपनी का कहना है कि रेल परिवहन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, ईंधन की बचत होती है और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी घटता है।
आगे की योजना
मारुति सुजुकी ने स्पष्ट किया कि वह वित्त वर्ष 2030-31 तक रेल आधारित वाहन डिस्पैच की हिस्सेदारी को 35 प्रतिशत तक पहुँचाना चाहती है। इसके अतिरिक्त, कंपनी अपनी आगामी खरखोदा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में भी इन-प्लांट रेलवे साइडिंग स्थापित करेगी, जिससे उत्पादन और वितरण के बीच की आपूर्ति श्रृंखला और अधिक हरित बनेगी।