शुभांशु शुक्ला ने बताया स्पेस मिशन का मेन्यू कैसे बनता है, लॉन्च से पहले लंच की परंपरा क्यों है ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना के अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अपनी इंस्टाग्राम सीरीज 'स्पेस लर्निंग विद एसएचयूएक्स' के ज़रिए खुलासा किया है कि स्पेस मिशन का भोजन मेन्यू किस तरह तैयार किया जाता है और लॉन्च से ठीक पहले एस्ट्रोनॉट्स के एक साथ लंच करने की परंपरा के पीछे क्या वजह है। उनके अनुसार, अंतरिक्ष में भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि यात्री के मानसिक और शारीरिक संतुलन का अनिवार्य हिस्सा है।
लॉन्च से पहले लंच — एक पुरानी परंपरा
शुक्ला के अनुसार, मानव अंतरिक्ष उड़ानों में लॉन्च से पहले सभी एस्ट्रोनॉट्स का एक साथ लंच करना एक स्थापित परंपरा है। यह महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि मिशन की तैयारी का अभिन्न अंग है — जिससे अंतरिक्ष यात्री लंबी और कठिन यात्रा के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हो सकें।
200 से अधिक खाद्य पदार्थों की होती है टेस्टिंग
स्पेस मिशन के मेन्यू को अंतिम रूप देने से पहले एस्ट्रोनॉट्स को 200 से अधिक खाद्य पदार्थों का स्वाद चखना पड़ता है। इस प्रक्रिया को 'फूड टेस्टिंग' कहा जाता है। प्रत्येक खाद्य पदार्थ को एक हेडोनिक स्केल पर रेटिंग दी जाती है, जिसके आधार पर यह तय होता है कि मिशन के दौरान मेन्यू में क्या शामिल होगा।
हालाँकि यह प्रक्रिया सुनने में सरल लगती है, लेकिन शुक्ला ने बताया कि लगातार सैकड़ों चीज़ें चखते-चखते एस्ट्रोनॉट्स का पेट भर जाता है और अंतिम चरण में अच्छे भोजन को भी कम अंक मिलने का जोखिम रहता है — जिससे सही मूल्यांकन एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
माइक्रोग्रैविटी में बदल जाता है स्वाद का अनुभव
शुक्ला ने यह भी बताया कि अंतरिक्ष में भोजन का स्वाद पृथ्वी जैसा नहीं रहता। माइक्रोग्रैविटी के कारण शरीर के तरल पदार्थ सिर की ओर खिंच जाते हैं, जिससे हल्की सर्दी जैसा अनुभव होता है। इससे सूंघने की क्षमता प्रभावित होती है और स्वाद का अनुभव भी फीका पड़ जाता है। यही कारण है कि पृथ्वी पर स्वादिष्ट लगने वाला भोजन अंतरिक्ष में अपेक्षाकृत बेस्वाद महसूस हो सकता है।
भोजन बनता है भावनात्मक सहारा
जब कोई एस्ट्रोनॉट कई सप्ताह या महीनों तक एक सीमित और बंद वातावरण में रहता है, तो पसंदीदा भोजन उसे पृथ्वी की याद दिलाता है और मानसिक राहत का स्रोत बनता है। शुक्ला के अनुसार, इसीलिए मेन्यू चयन में व्यक्तिगत पसंद को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने बताया कि नाश्ते में ग्रेनोला और ओट्स उनके पसंदीदा विकल्पों में रहे हैं।
आगे की राह
'स्पेस लर्निंग विद एसएचयूएक्स' सीरीज के ज़रिए शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियों को आम लोगों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी यह पहल युवा पीढ़ी को अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रति जागरूक और प्रेरित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।