अभय सिंह को एशियन गेम्स 2026 स्क्वैश फाइनल में सिल्वर, बोले — 'गोल्ड न जीत पाना दुखद'
सारांश
मुख्य बातें
भारत के स्क्वैश खिलाड़ी अभय सिंह को एशियन गेम्स 2026 के मेंस सिंगल्स स्क्वैश फाइनल में रविवार, 27 सितंबर को नागोया में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मलेशिया के मौजूदा चैंपियन ईन यो एनजी ने उन्हें 11-9, 11-5, 11-5 के स्कोर से हराया। मैच के बाद अभय ने खुलकर स्वीकार किया कि यह उनका आखिरी एशियन गेम्स हो सकता है।
फाइनल में क्या हुआ
पहले गेम में अभय ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन दूसरे और तीसरे गेम में ईन यो एनजी ने वर्चस्व कायम किया। 28 वर्षीय अभय ने कहा, 'मुझे लगता है कि उन्होंने दूसरे गेम में बेहतर स्क्वैश खेलना शुरू किया। उन्होंने गेंद को बहुत अच्छी जगहों पर रखा, बहुत साफ-सुथरा स्क्वैश खेला और अच्छी तरह से मूव किया। सारा श्रेय उन्हें जाता है। आज वह बेहतर एथलीट थे।'
इस हार के साथ अभय लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक का वह सीधा क्वालिफिकेशन स्पॉट नहीं पा सके, जो गोल्ड मेडल विजेता को मिलता है।
ऐतिहासिक उपलब्धि
इस सिल्वर मेडल के साथ अभय सिंह, सौरव घोषाल के बाद एशियन गेम्स में पुरुष स्क्वैश में रजत पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। यह उपलब्धि भारतीय स्क्वैश के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। गौरतलब है कि एशियन गेम्स में भारतीय स्क्वैश की यह निरंतर मजबूती दर्शाती है कि खेल का स्तर देश में लगातार ऊपर उठ रहा है।
निराशा के बावजूद कृतज्ञता
अभय ने हार को खेल भावना से स्वीकार करते हुए कहा, 'बड़े नजरिए से देखूं तो मैं निराश नहीं हूं। जाहिर है, आज रात के नतीजे से मैं निराश हूं। बहुत से लोगों ने मुझ पर बहुत मेहनत की है। मैं बस कुछ वापस देना चाहता था।' उन्होंने अपनी टीम, सरकारी स्पॉन्सर और समर्थकों का आभार जताया।
अभय ने यह पदक अपने पूरे सपोर्ट सिस्टम को समर्पित किया। उन्होंने कहा, 'यह मेडल असल में सभी के लिए है। मुझे नहीं लगता कि किसी एक को दूसरों से ज्यादा श्रेय मिलना चाहिए।' उन्होंने तमिलनाडु की राज्य सरकार और प्रधानमंत्री के भारतीय खेलों के प्रति समर्थन का भी उल्लेख किया।
माता-पिता की मौजूदगी रही खास
अभय के लिए इस हफ्ते को और भी यादगार बनाया उनके माता-पिता की नागोया में उपस्थिति ने। उन्होंने कहा, 'मेरे माता-पिता बहुत अच्छे हैं। उन्हें पता होता है कि कब और क्या कहना है। वे पिछले एशियन गेम्स में नहीं आ पाए थे, लेकिन मुझे खुशी है कि वे इस हफ्ते का खेल देख पाए।'
आगे का रास्ता
अभय अब टीम इवेंट पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिसके बाद वे यूएस ओपन में हिस्सा लेंगे। ओलंपिक क्वालिफिकेशन का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है — वर्ल्ड रैंकिंग के जरिए भी लॉस एंजिल्स 2028 के लिए रास्ता बनाया जा सकता है। अभय का भविष्य एशियन गेम्स में उनकी भागीदारी को लेकर भले ही अनिश्चित हो, लेकिन उनकी खेल यात्रा अभी जारी है।