क्या अपर्णा पोपट ने महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए रास्ता आसान किया?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अपर्णा पोपट का नाम भारत की महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने उस समय इस खेल में अपने करियर को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, जब देश में बैडमिंटन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पॉन्सरशिप की कमी थी।
अपर्णा पोपट का जन्म 18 जनवरी, 1978 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने मुंबई के बीएआई प्रशिक्षण केंद्र में बैडमिंटन का प्रशिक्षण लिया। अपर्णा के बैडमिंटन के प्रति जुनून ने उन्हें जल्दी ही देश की शीर्ष महिला खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। 1990 के दशक के अंत और 2000 के प्रारंभ में, उन्होंने भारतीय बैडमिंटन पर अपनी छाप छोड़ना शुरू किया।
अपर्णा पोपट 16 बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं और उन्होंने दो बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 1998 में कुआलालंपुर में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में एकल में सिल्वर मेडल और टीम प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीते। 2002 में मैनचेस्टर में कॉमनवेल्थ खेलों में महिला एकल में कांस्य और 2006 में मेलबर्न में मिक्स टीम में भी कांस्य पदक जीता।
संन्यास के बाद, पोपट इस खेल से गहराई से जुड़ी रहीं। उन्होंने बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के लिए एक चयनकर्ता के रूप में काम किया और एथलीट वेलफेयर, गवर्नेंस रिफॉर्म्स, और स्ट्रक्चर्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम्स की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने एक कमेंटेटर और मेंटर के रूप में भी कार्य किया, और अपने अंतरराष्ट्रीय करियर से प्राप्त ज्ञान को साझा किया।
अपर्णा पोपट की विरासत मेडल्स और रैंकिंग से परे है। वह भारतीय बैडमिंटन के बदलाव के समय में लचीलापन, नेतृत्व और मेहनत का प्रतीक हैं। उनके सफर ने साइना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसे सितारों के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जिन्हें पोपट जैसे ट्रेलब्लेजर्स के प्रयासों से बने मजबूत इकोसिस्टम का लाभ मिला।
उन्हें 2005 में अर्जुन अवॉर्ड मिला, जो भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक प्रमुख खेल सम्मान है।