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प्रकाश पादुकोण: 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय

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प्रकाश पादुकोण: 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय

सारांश

प्रकाश पादुकोण सिर्फ एक चैंपियन नहीं थे — वे भारतीय बैडमिंटन की नींव थे। 1978 कॉमनवेल्थ स्वर्ण से लेकर 1980 में विश्व नंबर 1 की रैंकिंग तक, उन्होंने वह रास्ता बनाया जिस पर बाद में साइना, सिंधु और श्रीकांत चले।

मुख्य बातें

प्रकाश पादुकोण का जन्म 10 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ।
1978 कॉमनवेल्थ गेम्स (एडमोंटन) में पुरुष एकल स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी।
1980 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय; उसी वर्ष विश्व नंबर 1 रैंकिंग हासिल की।
1972 में अर्जुन पुरस्कार और 1982 में पद्मश्री से सम्मानित।
1993–1996 तक भारतीय राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के मुख्य कोच रहे।
गीत सेठी के साथ मिलकर ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट फाउंडेशन की स्थापना की।

भारतीय बैडमिंटन के पितामह कहे जाने वाले प्रकाश पादुकोण ने 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था — वे कॉमनवेल्थ खेलों में भारत की ओर से स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले बैडमिंटन खिलाड़ी बने। 1980 में वह विश्व के नंबर 1 खिलाड़ी की रैंकिंग तक पहुँचे, जो उस दौर में किसी भारतीय के लिए एक असाधारण उपलब्धि थी।

शुरुआती जीवन और बैडमिंटन की विरासत

प्रकाश पादुकोण का जन्म 10 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उनके पिता रमेश पादुकोण, जो लंबे समय तक मैसूर बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रहे, ने उन्हें इस खेल से परिचित कराया। पारिवारिक पृष्ठभूमि और पिता की प्रेरणा ने प्रकाश को बचपन से ही रैकेट थामने का अवसर दिया।

1962 में उन्होंने अपना पहला आधिकारिक टूर्नामेंट — कर्नाटक स्टेट जूनियर चैंपियनशिप — खेला। पहले प्रयास में निराशा मिली, लेकिन उन्होंने शीघ्र ही स्टेट जूनियर खिताब अपने नाम किया। 1972 में उन्होंने इंडियन नेशनल जूनियर और उसी वर्ष सीनियर दोनों खिताब जीते — और अगले सात वर्षों तक लगातार राष्ट्रीय चैंपियन बने रहे।

अंतरराष्ट्रीय करियर की ऊँचाइयाँ

एडमोंटन, कनाडा में आयोजित 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष एकल स्वर्ण पदक जीतकर प्रकाश ने अपनी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। 1979 में उन्होंने लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में प्रतिष्ठित 'इवनिंग ऑफ चैंपियंस' खिताब जीता।

1980 का वर्ष उनके करियर का शिखर रहा — उन्होंने डेनिश ओपन, स्वीडिश ओपन और इंडोनेशिया के दिग्गज लिएम स्वी किंग को हराते हुए ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप में पुरुष एकल खिताब जीता — यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे पहले भारतीय बने। इसी वर्ष वे विश्व रैंकिंग में नंबर 1 पर पहुँचे।

अन्य प्रमुख उपलब्धियाँ

प्रकाश पादुकोण की उपलब्धियों की सूची विस्तृत है। 1981 विश्व कप में पुरुष एकल स्वर्ण पदक, 1980 विश्व कप में कांस्य, 1983 विश्व चैंपियनशिप (कोपेनहेगन) में एकल कांस्य, वर्ल्ड गेम्स 1981 में कांस्य, एशियन गेम्स तेहरान 1974 में कांस्य, एशियन गेम्स सियोल 1986 में कांस्य, एशियन चैंपियनशिप 1976 में कांस्य और 1983 में रजत पदक उनकी झोली में आए।

संन्यास के बाद का योगदान

1991 में सक्रिय खेल से संन्यास लेने के बाद प्रकाश ने बैडमिंटन के प्रशासन और विकास में अपना ध्यान लगाया। वे कुछ समय के लिए बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे और 1993 से 1996 तक भारतीय राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के मुख्य कोच के रूप में कार्य किया।

उन्होंने बिलियर्ड्स खिलाड़ी गीत सेठी के साथ मिलकर ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट की स्थापना की — यह फाउंडेशन भारत में ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने और एथलीटों को समर्थन देने के लिए काम करती है। इसके अलावा, उनकी अपनी प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकेडमी आज भी युवा प्रतिभाओं को तराशने में सक्रिय है।

सम्मान और विरासत

भारत सरकार ने उनके असाधारण योगदान को देखते हुए 1972 में अर्जुन पुरस्कार और 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया। गौरतलब है कि उनकी बेटी दीपिका पादुकोण बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं, जिससे पादुकोण परिवार भारतीय खेल और मनोरंजन दोनों जगत में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। प्रकाश पादुकोण की विरासत आज भी भारतीय बैडमिंटन की नींव में जीवित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और एक खिलाड़ी ने अकेले दम पर वैश्विक मानचित्र पर देश का नाम लिखा। विडंबना यह है कि जिस खिलाड़ी ने 1980 में विश्व नंबर 1 की रैंकिंग हासिल की, उसे बाद की पीढ़ियाँ अक्सर 'दीपिका के पिता' के रूप में अधिक पहचानती हैं। ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट जैसी संस्था बनाकर उन्होंने साबित किया कि असली चैंपियन खेल छोड़ने के बाद भी खेल नहीं छोड़ता। भारतीय बैडमिंटन आज जिस मुकाम पर है, उसकी जड़ें पादुकोण के उस एकाकी संघर्ष में हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रकाश पादुकोण ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक कब जीता था?
प्रकाश पादुकोण ने 1978 में कनाडा के एडमोंटन में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता था। वे कॉमनवेल्थ खेलों में बैडमिंटन स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
प्रकाश पादुकोण विश्व नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी कब बने?
प्रकाश पादुकोण 1980 में विश्व के नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी बने। उसी वर्ष उन्होंने ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप, डेनिश ओपन और स्वीडिश ओपन भी जीते।
प्रकाश पादुकोण को कौन-कौन से सरकारी पुरस्कार मिले हैं?
भारत सरकार ने प्रकाश पादुकोण को 1972 में अर्जुन पुरस्कार और 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया। ये सम्मान बैडमिंटन में उनके असाधारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय योगदान को मान्यता देते हैं।
प्रकाश पादुकोण ने संन्यास के बाद बैडमिंटन के लिए क्या किया?
1991 में संन्यास के बाद प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे और 1993 से 1996 तक राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच रहे। उन्होंने गीत सेठी के साथ ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट फाउंडेशन की स्थापना की और अपनी बैडमिंटन अकेडमी के ज़रिये युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
क्या प्रकाश पादुकोण अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के पिता हैं?
हाँ, बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, प्रकाश पादुकोण की बेटी हैं। इस प्रकार पादुकोण परिवार भारतीय खेल और मनोरंजन दोनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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