BAI का बड़ा फैसला: जुलाई 2026 से घरेलू बैडमिंटन में लागू होगा 3x15 स्कोरिंग सिस्टम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) ने जुलाई 2026 से अपने समस्त घरेलू टूर्नामेंट्स में 3x15 स्कोरिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम विश्व बैडमिंटन महासंघ (BWF) द्वारा जनवरी 2027 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रणाली को लागू किए जाने से पहले भारतीय खिलाड़ियों, कोचों और तकनीकी अधिकारियों को पर्याप्त प्रतिस्पर्धी अनुभव दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नई व्यवस्था की शुरुआत 7 से 14 जुलाई तक एर्नाकुलम, केरल में आयोजित होने वाले ऑल इंडिया सीनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट से होगी।
नई स्कोरिंग प्रणाली में क्या बदला
मौजूदा 3x21 फॉर्मेट की जगह अब प्रत्येक गेम 21 के बजाय 15 प्वाइंट्स का होगा। मैच 'बेस्ट-ऑफ-थ्री-गेम्स' और 'रैली-प्वाइंट' प्रणाली में ही खेले जाएंगे। 14-14 के स्कोर पर खिलाड़ी या जोड़ी को दो प्वाइंट्स के अंतर से जीतना अनिवार्य होगा, जबकि गेम की अधिकतम सीमा 21 प्वाइंट्स रहेगी — 20-20 होने पर अगला प्वाइंट विजेता तय करेगा।
मैच प्रक्रिया में बदलाव
स्कोरिंग के साथ-साथ मैच की आंतरिक प्रक्रियाओं में भी संशोधन किया गया है। अब मिड-गेम ब्रेक तब होगा जब आगे चल रहा खिलाड़ी या जोड़ी 11 के बजाय 8 प्वाइंट हासिल कर ले। इस अंतराल में 60 सेकंड का ब्रेक होगा और निर्णायक गेम में साइड परिवर्तन भी किया जाएगा। गेमों के बीच दो मिनट का ब्रेक पूर्ववत रहेगा। पिछले गेम का विजेता ही अगले गेम में पहले सर्विस करेगा।
BAI महासचिव का बयान
BAI के जनरल सेक्रेटरी संजय मिश्रा ने कहा, "मुकाबलों में एकरूपता सुनिश्चित करने, बेहतर तैयारी में मदद करने और खिलाड़ियों, कोचों, तकनीकी अधिकारियों और सभी स्टेकहोल्डर्स को नए स्कोरिंग फॉर्मेट का पूरी तरह से आदी बनाने के लिए — खासकर BWF की जनवरी 2027 से इसे लागू करने की योजना को देखते हुए — 3x15 स्कोरिंग सिस्टम को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है।" उन्होंने जोड़ा कि इससे सभी उम्र के खिलाड़ी बदले हुए फॉर्मेट के अनुसार खेलने की क्षमता विकसित कर सकेंगे।
किन टूर्नामेंट्स और आयु वर्गों पर होगा असर
यह प्रणाली भारत के पूरे घरेलू बैडमिंटन कैलेंडर में समान रूप से लागू होगी — जिसमें जोनल चैंपियनशिप, रैंकिंग टूर्नामेंट और नेशनल चैंपियनशिप शामिल हैं। यह अंडर-11 से लेकर सीनियर और मास्टर्स (वेटरन) तक के सभी आयु वर्गों पर लागू होगी। गौरतलब है कि यह BWF के वैश्विक बदलाव से पहले घरेलू सर्किट में एक समान प्रतिस्पर्धी ढाँचा तैयार करने का सुनियोजित प्रयास है।
खेल पर संभावित प्रभाव
माना जा रहा है कि छोटे फॉर्मेट से मैच अधिक तेज गति वाले होंगे और गेम के उतार-चढ़ाव में रोमांच बढ़ेगा। रणनीतिक खेल और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता पर अधिक जोर पड़ेगा। यह बदलाव भारतीय बैडमिंटन को 2027 में BWF की अंतरराष्ट्रीय अनिवार्यता के लिए सबसे तैयार देशों में से एक बना सकता है।