26 जुलाई 2026
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कानितकर की खिलाड़ियों को सलाह: नकल नहीं, अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली पर रखें भरोसा

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कानितकर की खिलाड़ियों को सलाह: नकल नहीं, अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली पर रखें भरोसा

सारांश

हरारे में भारत के अंतरिम बल्लेबाजी कोच ऋषिकेश कानितकर ने साफ कहा — टीम में जगह पाने की होड़ में खिलाड़ी किसी की नकल न करें, बल्कि अपनी पहचान और स्वाभाविक शैली पर भरोसा रखें। साथ ही अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की युवा ओपनिंग जोड़ी को खुलकर खेलने की सलाह दी।

मुख्य बातें

अंतरिम बल्लेबाजी कोच ऋषिकेश कानितकर ने 26 जुलाई को हरारे में खिलाड़ियों को नकल छोड़कर अपनी स्वाभाविक शैली अपनाने की सलाह दी।
कानितकर भारत अंडर-19 टीम के हेड कोच भी हैं और महिला टीम के साथ भी काम कर चुके हैं।
उनके अनुसार सीनियर स्तर पर कोचिंग में बुनियादी नहीं, बल्कि बारीक तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।
युवा ओपनर अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की जोड़ी की सराहना करते हुए उन्हें खुलकर खेलने और आत्मविश्वास बनाए रखने की सलाह दी।
यह बयान भारत बनाम जिम्बाब्वे टी20 सीरीज के तीसरे मैच से पहले आया।

भारत के अंतरिम बल्लेबाजी कोच ऋषिकेश कानितकर ने 26 जुलाई को हरारे में स्पष्ट किया कि सीनियर पुरुष टीम में जगह पाने की दौड़ में शामिल खिलाड़ियों को किसी अन्य बल्लेबाज की नकल करने की बजाय अपनी व्यक्तिगत पहचान और स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार, खुद की खूबियों को पहचानकर उन पर काम करना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।

मुख्य घटनाक्रम

भारत बनाम जिम्बाब्वे टी20 सीरीज के तीसरे मैच से पहले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में प्रसारकों से बातचीत के दौरान कानितकर ने यह बात कही। उन्होंने कहा, 'हाँ, कई खिलाड़ी मुकाबला कर रहे हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर कोई खिलाड़ी भारत के लिए खेलना और टीम में बने रहना चाहता है, तो उसे खुद जैसा ही रहना होगा। वह किसी और जैसा बनने की कोशिश नहीं कर सकता। उसे अपनी खूबियाँ पहचाननी होंगी, यह देखना होगा कि उसे कहाँ सुधार की जरूरत है, और उन चीजों पर काम करना होगा। किसी को कुछ साबित करने की कोशिश करने के बजाय, जैसे आप हैं वैसे ही खुश रहें, बस अपना सर्वश्रेष्ठ दें।'

जूनियर से सीनियर कोचिंग: बदलता नजरिया

कानितकर भारत की अंडर-19 टीम के हेड कोच भी हैं और महिला क्रिकेट टीम के साथ भी बतौर बल्लेबाजी कोच काम कर चुके हैं। उन्होंने जूनियर से सीनियर स्तर पर आने पर कोचिंग के तरीके में आए बदलाव को समझाते हुए कहा, 'जब मैं अंडर-19 से यहाँ आया, तो भूमिका बदल गई क्योंकि खिलाड़ी पहले से ही बहुत कुशल होते हैं। उनके पास काफी अनुभव होता है। इसलिए आप बहुत बुनियादी चीजों के बजाय छोटी-छोटी, बारीक चीजों पर बात करते हैं।'

गौरतलब है कि सीनियर स्तर पर खिलाड़ियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार तेजी से खुद को ढाल सकें, क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट का व्यापक अनुभव होता है।

तकनीक और अनुकूलनशीलता पर जोर

कानितकर ने आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों की बहुमुखी प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा, 'आजकल खिलाड़ी दुनिया भर में अलग-अलग हालात में बहुत ज्यादा क्रिकेट खेलते हैं। इस समय तक, हम चाहते हैं कि खिलाड़ी हालात के हिसाब से खुद को ढाल सकें और जरूरत पड़ने पर अपनी तकनीक में बदलाव कर सकें। तकनीक के मामले में पहले की गई मेहनत बहुत मायने रखती है।'

अभिषेक-वैभव की ओपनिंग जोड़ी पर विश्वास

कानितकर ने युवा ओपनर अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की जोड़ी की तारीफ करते हुए कहा, 'बहुत अच्छी ओपनिंग पार्टनरशिप है। मुझे लगता है कि उन्हें बस खुद जैसा ही रहना चाहिए। उनके पास जरूरी सभी शॉट्स हैं, सही सोच है और स्किल भी है। उन्हें बस खुद जैसा रहना है और खुलकर खेलना है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत जिम्बाब्वे दौरे पर युवा खिलाड़ियों को परखने का अवसर दे रहा है।

आगे की राह

कानितकर का यह संदेश उन युवा खिलाड़ियों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जो राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश में हैं। आत्मविश्वास और व्यक्तिगत पहचान को बनाए रखते हुए तकनीकी परिपक्वता हासिल करना ही आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट की नींव को मजबूत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस गहरे दबाव को उजागर करता है जो चयन की होड़ में खिलाड़ियों पर होता है — जहाँ वे अक्सर किसी स्थापित खिलाड़ी की नकल करके 'सुरक्षित' दिखने की कोशिश करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय क्रिकेट में T20 फॉर्मेट के लिए नई पीढ़ी तैयार करने की जरूरत है। अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवाओं को 'खुद जैसा रहने' की सलाह देना दरअसल एक बड़े कोचिंग दर्शन की झलक है — व्यक्तित्व को दबाने के बजाय उसे निखारना। असली परीक्षा यह होगी कि यह दर्शन चयन समिति के मानदंडों से कितना मेल खाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋषिकेश कानितकर ने खिलाड़ियों को क्या सलाह दी?
कानितकर ने कहा कि खिलाड़ियों को किसी अन्य बल्लेबाज की नकल करने की बजाय अपनी स्वाभाविक शैली और व्यक्तिगत खूबियों पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार खुद को साबित करने की कोशिश में पहचान खोने से बेहतर है कि खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।
ऋषिकेश कानितकर भारतीय क्रिकेट में क्या भूमिका निभाते हैं?
ऋषिकेश कानितकर भारत के अंतरिम बल्लेबाजी कोच हैं और साथ ही भारत की अंडर-19 टीम के हेड कोच भी हैं। वे पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम के साथ भी बतौर बल्लेबाजी कोच काम कर चुके हैं।
जूनियर और सीनियर टीम की कोचिंग में क्या फर्क होता है?
कानितकर के अनुसार अंडर-19 स्तर पर बुनियादी तकनीक पर ध्यान दिया जाता है, जबकि सीनियर टीम में खिलाड़ी पहले से कुशल और अनुभवी होते हैं। इसलिए सीनियर स्तर पर बारीक तकनीकी पहलुओं और परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन पर जोर दिया जाता है।
अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की जोड़ी के बारे में कानितकर ने क्या कहा?
कानितकर ने इस जोड़ी को 'बहुत अच्छी ओपनिंग पार्टनरशिप' बताया और कहा कि दोनों के पास जरूरी शॉट्स, सही सोच और स्किल हैं। उन्होंने दोनों को खुद जैसा रहने और खुलकर खेलने की सलाह दी।
यह बयान किस मौके पर आया?
यह बयान 26 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में भारत बनाम जिम्बाब्वे टी20 सीरीज के तीसरे मैच से पहले प्रसारकों के साथ बातचीत के दौरान आया।
राष्ट्र प्रेस
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