कानितकर की खिलाड़ियों को सलाह: नकल नहीं, अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली पर रखें भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के अंतरिम बल्लेबाजी कोच ऋषिकेश कानितकर ने 26 जुलाई को हरारे में स्पष्ट किया कि सीनियर पुरुष टीम में जगह पाने की दौड़ में शामिल खिलाड़ियों को किसी अन्य बल्लेबाज की नकल करने की बजाय अपनी व्यक्तिगत पहचान और स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार, खुद की खूबियों को पहचानकर उन पर काम करना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।
मुख्य घटनाक्रम
भारत बनाम जिम्बाब्वे टी20 सीरीज के तीसरे मैच से पहले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में प्रसारकों से बातचीत के दौरान कानितकर ने यह बात कही। उन्होंने कहा, 'हाँ, कई खिलाड़ी मुकाबला कर रहे हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर कोई खिलाड़ी भारत के लिए खेलना और टीम में बने रहना चाहता है, तो उसे खुद जैसा ही रहना होगा। वह किसी और जैसा बनने की कोशिश नहीं कर सकता। उसे अपनी खूबियाँ पहचाननी होंगी, यह देखना होगा कि उसे कहाँ सुधार की जरूरत है, और उन चीजों पर काम करना होगा। किसी को कुछ साबित करने की कोशिश करने के बजाय, जैसे आप हैं वैसे ही खुश रहें, बस अपना सर्वश्रेष्ठ दें।'
जूनियर से सीनियर कोचिंग: बदलता नजरिया
कानितकर भारत की अंडर-19 टीम के हेड कोच भी हैं और महिला क्रिकेट टीम के साथ भी बतौर बल्लेबाजी कोच काम कर चुके हैं। उन्होंने जूनियर से सीनियर स्तर पर आने पर कोचिंग के तरीके में आए बदलाव को समझाते हुए कहा, 'जब मैं अंडर-19 से यहाँ आया, तो भूमिका बदल गई क्योंकि खिलाड़ी पहले से ही बहुत कुशल होते हैं। उनके पास काफी अनुभव होता है। इसलिए आप बहुत बुनियादी चीजों के बजाय छोटी-छोटी, बारीक चीजों पर बात करते हैं।'
गौरतलब है कि सीनियर स्तर पर खिलाड़ियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार तेजी से खुद को ढाल सकें, क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट का व्यापक अनुभव होता है।
तकनीक और अनुकूलनशीलता पर जोर
कानितकर ने आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों की बहुमुखी प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा, 'आजकल खिलाड़ी दुनिया भर में अलग-अलग हालात में बहुत ज्यादा क्रिकेट खेलते हैं। इस समय तक, हम चाहते हैं कि खिलाड़ी हालात के हिसाब से खुद को ढाल सकें और जरूरत पड़ने पर अपनी तकनीक में बदलाव कर सकें। तकनीक के मामले में पहले की गई मेहनत बहुत मायने रखती है।'
अभिषेक-वैभव की ओपनिंग जोड़ी पर विश्वास
कानितकर ने युवा ओपनर अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की जोड़ी की तारीफ करते हुए कहा, 'बहुत अच्छी ओपनिंग पार्टनरशिप है। मुझे लगता है कि उन्हें बस खुद जैसा ही रहना चाहिए। उनके पास जरूरी सभी शॉट्स हैं, सही सोच है और स्किल भी है। उन्हें बस खुद जैसा रहना है और खुलकर खेलना है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत जिम्बाब्वे दौरे पर युवा खिलाड़ियों को परखने का अवसर दे रहा है।
आगे की राह
कानितकर का यह संदेश उन युवा खिलाड़ियों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जो राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश में हैं। आत्मविश्वास और व्यक्तिगत पहचान को बनाए रखते हुए तकनीकी परिपक्वता हासिल करना ही आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट की नींव को मजबूत करेगा।