28 जुलाई 2026
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बिंद्यारानी देवी ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, 2028 ओलंपिक के लिए 53 किग्रा में उतरने का ऐलान

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बिंद्यारानी देवी ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, 2028 ओलंपिक के लिए 53 किग्रा में उतरने का ऐलान

सारांश

मणिपुर की बिंद्यारानी देवी ने ग्लासगो में लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ पदक जीता — इस बार 58 किग्रा में ब्रॉन्ज। लेकिन असली कहानी आगे की है: 2028 ओलंपिक के लिए वे 53 किग्रा में उतरेंगी। भार-वर्ग की यह रणनीतिक पारी उनकी लॉस एंजिल्स की महत्वाकांक्षा को साफ़ बयां करती है।

मुख्य बातें

बिंद्यारानी देवी सोरोखाइबम ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की 58 किग्रा वेटलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
उन्होंने कुल 199 किग्रा (स्नैच 87 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 112 किग्रा ) वजन उठाया।
यह उनका लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ पदक है — बर्मिंघम 2022 में 55 किग्रा में सिल्वर जीता था।
लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए बिंद्यारानी 53 किग्रा भार वर्ग में उतरने की योजना बना रही हैं।
मीराबाई चानू ( 48 किग्रा , गोल्ड), ऋषिकांत सिंह ( 60 किग्रा , सिल्वर), मुथुपांडी राजा ( 65 किग्रा , सिल्वर) और ज्ञानेश्वरी यादव ( 53 किग्रा , सिल्वर) ने भी पदक जीते।
हेड कोच विजय शर्मा को उम्मीद है कि टीम एशियन गेम्स में 25 साल के मेडल सूखे को खत्म करेगी।

भारत की स्टार वेटलिफ्टर बिंद्यारानी देवी सोरोखाइबम ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की महिलाओं की 58 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। मणिपुर की इस खिलाड़ी ने कुल 199 किग्रा वजन उठाया — स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 112 किग्रा — और तीसरा स्थान हासिल किया। यह उनका लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ पदक है; इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में 55 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था।

स्पर्धा का स्कोरकार्ड

गोल्ड मेडल नाइजीरिया की राफियातू फोलाशादे लावल ने जीता, जिन्होंने कुल 229 किग्रा (स्नैच 103 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 126 किग्रा) वजन उठाया। कनाडा की एन सोफी ताशेरो ने कुल 215 किग्रा (स्नैच 94 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 121 किग्रा) के साथ सिल्वर पर कब्जा किया। बिंद्यारानी के एक लिफ्ट में चूकने से उनका कुल योग प्रभावित हुआ, जिससे वे शीर्ष दो से पीछे रह गईं।

बिंद्यारानी का ओलंपिक रोडमैप

मेडल जीतने के बाद बिंद्यारानी देवी ने कहा, 'ये मेरा दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स है, जिसमें मैंने मेडल जीता है। मेडल जीतकर मुझे काफी अच्छा लग रहा है। आगामी एशियन गेम्स में भी मेडल जीतने की कोशिश करूंगी।' उन्होंने अपनी भार-वर्ग रणनीति भी स्पष्ट की: 'पहले 55 किग्रा कैटेगरी ओलंपिक में नहीं थी, जिसकी वजह से मैंने 58 किग्रा वर्ग में खेलना शुरू किया। उसके बाद 55 किग्रा ओलंपिक में शामिल हो गया। मैं एशियन गेम्स तक 58 किग्रा वर्ग में खेलूंगी, जिसके बाद 53 किग्रा वर्ग में लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारी करूंगी।'

भारतीय वेटलिफ्टिंग दल का प्रदर्शन

ग्लासगो में भारतीय वेटलिफ्टरों ने कुल मिलाकर शानदार प्रदर्शन किया। मीराबाई चानू ने 48 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का परचम बुलंद किया। ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों की 60 किग्रा स्पर्धा में सिल्वर हासिल किया, जबकि मुथुपांडी राजा ने 65 किग्रा वर्ग में सिल्वर जीता। ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। गौरतलब है कि फेडरेशन ने टीम के लिए बर्मिंघम में एक महीने का विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था।

हेड कोच की प्रतिक्रिया और एशियन गेम्स की उम्मीद

हेड कोच विजय शर्मा ने कहा, 'जैसा हमने अनुमान लगाया था, वैसे ही मेडल मिल रहे हैं। हमें खुशी है कि एथलीट्स ने बेहतर प्रदर्शन किया है। ज्ञानेश्वरी ने अपने बेस्ट में 6 किलोग्राम जोड़ा है। हालांकि, बिंद्यारानी के एक लिफ्ट में चूकने से उनका कुल योग कम हो गया।' उन्होंने आगे कहा कि कुछ युवा एथलीट पहले ही एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि टीम 25 साल से चले आ रहे एशियन गेम्स में मेडल के सूखे को इस बार खत्म करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वेटलिफ्टिंग लॉस एंजिल्स 2028 को ध्यान में रखकर व्यवस्थित तैयारी कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रणनीतिक है — 58 से 53 किग्रा की यह छलांग ओलंपिक क्वालीफिकेशन के गणित को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम है। गौरतलब है कि भारतीय वेटलिफ्टिंग ने कॉमनवेल्थ मंच पर बार-बार चमक दिखाई है, लेकिन एशियन गेम्स और ओलंपिक में रूपांतरण दर कमज़ोर रही है। हेड कोच का 25 साल के एशियन गेम्स सूखे का जिक्र इस अंतर को रेखांकित करता है। असली कसौटी यह है कि क्या फेडरेशन का समर्थन और प्रशिक्षण ढाँचा इस प्रतिभा को ओलंपिक पोडियम तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिंद्यारानी देवी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा मेडल जीता?
बिंद्यारानी देवी ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की महिलाओं की 58 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने कुल 199 किग्रा (स्नैच 87 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 112 किग्रा) वजन उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया।
बिंद्यारानी देवी 2028 ओलंपिक की तैयारी कैसे करेंगी?
बिंद्यारानी देवी ने बताया कि वे एशियन गेम्स तक 58 किग्रा वर्ग में खेलेंगी, उसके बाद 53 किग्रा भार वर्ग में उतरकर लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 की तैयारी करेंगी। यह भार-वर्ग बदलाव ओलंपिक क्वालीफिकेशन की ज़रूरतों को देखते हुए किया जा रहा है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की 58 किग्रा वेटलिफ्टिंग में गोल्ड किसने जीता?
नाइजीरिया की राफियातू फोलाशादे लावल ने कुल 229 किग्रा (स्नैच 103 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 126 किग्रा) वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता। कनाडा की एन सोफी ताशेरो 215 किग्रा के साथ सिल्वर पर रहीं।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टरों ने कितने पदक जीते?
भारत ने ग्लासगो में वेटलिफ्टिंग में पाँच पदक जीते — मीराबाई चानू (48 किग्रा, गोल्ड), ऋषिकांत सिंह (60 किग्रा, सिल्वर), मुथुपांडी राजा (65 किग्रा, सिल्वर), ज्ञानेश्वरी यादव (53 किग्रा, सिल्वर) और बिंद्यारानी देवी (58 किग्रा, ब्रॉन्ज)।
हेड कोच विजय शर्मा ने एशियन गेम्स को लेकर क्या कहा?
हेड कोच विजय शर्मा ने कहा कि कुछ युवा एथलीट पहले ही एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि टीम 25 साल से चले आ रहे एशियन गेम्स में मेडल के सूखे को इस बार खत्म करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश्वरी ने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ में 6 किलोग्राम जोड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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