CWG 2026: ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किग्रा वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर, भारत का पाँचवाँ पदक
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो के एसईसी आर्माडिलो में 53 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर देश की पदक तालिका में पाँचवाँ पदक जोड़ा। कुल 199 किग्रा भार उठाकर उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडिह ने 206 किग्रा के कॉमनवेल्थ व गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
मुख्य घटनाक्रम: स्नैच और क्लीन एंड जर्क का ब्यौरा
ज्ञानेश्वरी यादव ने स्नैच वर्ग में तीनों प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए — पहले प्रयास में 82 किग्रा, दूसरे में 85 किग्रा और तीसरे में 88 किग्रा — कुल 88 किग्रा स्नैच दर्ज किया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 103 किग्रा, 107 किग्रा और 111 किग्रा के तीनों प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए, जिससे उनका कुल स्कोर 199 किग्रा रहा।
स्वर्ण विजेता डिडिह ने स्नैच में 93 किग्रा उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 105 किग्रा, 110 किग्रा व 113 किग्रा के सफल प्रयासों से कुल 206 किग्रा का गेम्स रिकॉर्ड स्थापित किया। कनाडा की रेबेका ग्रौलक्स ने स्नैच में 83 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 95 किग्रा उठाकर कुल 178 किग्रा के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया; हालाँकि वे 99 किग्रा के अगले दो क्लीन एंड जर्क प्रयासों में सफल नहीं हो सकीं।
भारत की पदक तालिका: अब तक का सफर
यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पाँचवाँ पदक है। इससे पहले पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज जीतकर पदकों का खाता खोला था। पुरुष वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह ने 60 किग्रा वर्ग में सिल्वर दिलाया। महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 48 किग्रा भार वर्ग में इस संस्करण का भारत का पहला गोल्ड मेडल जीता। मुथुपांडी राजा ने 65 किग्रा वर्ग में सिल्वर पदक हासिल किया।
फिलहाल भारत कुल पाँच पदकों के साथ समग्र पदक तालिका में आठवें स्थान पर है।
आम जनता पर असर और खेल का महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम ने CWG 2026 में एकाधिक पदक जीतकर देश की भारोत्तोलन में गहरी ताकत को साबित किया है। गौरतलब है कि मीराबाई चानू के नेतृत्व में भारतीय वेटलिफ्टिंग दल ने इस संस्करण में अब तक सर्वाधिक योगदान दिया है।
क्या होगा आगे
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए अभी और प्रतियोगिताएँ शेष हैं और पदक तालिका में ऊपर चढ़ने की संभावनाएँ बनी हुई हैं। ज्ञानेश्वरी यादव का यह प्रदर्शन आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी दावेदारी को और मज़बूत करता है।