सीए भवानी देवी: ओलंपिक क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 2 स्वर्ण पदक
सारांश
मुख्य बातें
चदलवाड़ा आनंदा भवानी देवी — जिन्हें देश सीए भवानी देवी के नाम से जानता है — भारतीय तलवारबाजी का वह नाम हैं जिन्होंने इस खेल को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया। चेन्नई में 27 अगस्त 1993 को जन्मी भवानी देवी ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज हैं और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में 2 स्वर्ण पदक जीतने का गौरव उनके नाम है। 33 वर्ष की होने के बावजूद वह आज भी सक्रिय प्रतिस्पर्धा में हैं।
शुरुआत: 11 साल की उम्र में थामी तलवार
भवानी देवी ने 2004 में मात्र 11 वर्ष की आयु में तलवारबाजी की शुरुआत की। दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे थालास्सेरी, केरल स्थित साई केंद्र पहुँचीं, जहाँ उन्होंने इस खेल की बारीकियाँ सीखीं। 14 वर्ष की उम्र में तुर्की में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलकर उन्होंने वैश्विक मंच पर पदार्पण किया। उस पहले अनुभव के बाद भवानी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मुख्य उपलब्धियाँ और पदक
2014 में एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भवानी ने अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद 2018 में कैनबरा में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप की व्यक्तिगत स्पर्धा में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। 2022 में लंदन में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने एक बार फिर स्वर्ण पदक हासिल किया। 2023 में एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता — यह उपलब्धि भी किसी भारतीय तलवारबाज द्वारा पहली बार हासिल की गई।
ओलंपिक इतिहास में दर्ज नाम
भवानी देवी ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया — यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह देश की पहली तलवारबाज हैं। यह ऐसे समय में आया जब भारत में तलवारबाजी को मुख्यधारा के खेलों में शायद ही जगह मिलती थी। गौरतलब है कि एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली भी वह पहली भारतीय हैं, जो उनके करियर की दोहरी ऐतिहासिक उपलब्धि है।
सरकारी सम्मान
तलवारबाजी में असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने 2021 में भवानी देवी को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार भारतीय खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।
आगे की राह
27 अगस्त 2026 को 33 वर्ष की होने वाली भवानी देवी अभी भी प्रतिस्पर्धी तलवारबाजी में सक्रिय हैं। उनका संघर्ष और समर्पण भारत की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनसे पदक की उम्मीद बनी रहेगी।