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कैब ने खेल मंत्री को लिखा पत्र, अभिषेक डालमिया के खुले पत्र पर उठाए सवाल

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कैब ने खेल मंत्री को लिखा पत्र, अभिषेक डालमिया के खुले पत्र पर उठाए सवाल

सारांश

कैब ने खेल मंत्री को पत्र लिखकर अभिषेक डालमिया के भ्रष्टाचार-संबंधी खुले पत्र की मंशा पर सवाल उठाए। एसोसिएशन ने लोकपाल व्यवस्था और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि स्थापित न्यायिक मंच को दरकिनार कर सार्वजनिक पत्र जारी करना उचित नहीं।

मुख्य बातें

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) ने 17 जून 2026 को खेल मंत्री डॉ.
इंद्रनिल खान को औपचारिक पत्र लिखा।
पत्र अभिषेक डालमिया के 13 जून 2026 के उस खुले फेसबुक पत्र के जवाब में है, जिसमें चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई थी।
कैब ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य पिछले दो वर्षों से लोकपाल एवं नीति अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
एसोसिएशन ने रेखांकित किया कि डालमिया 2022 तक कैब प्रशासन में रहे और इस दौरान कभी शिकायत नहीं की।
पत्र पर सौरव गांगुली सहित पाँच वरिष्ठ पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
कैब ने मंत्रालय से भ्रष्टाचार-रोधी हॉटलाइन बनाने और एसोसिएशन का दौरा करने का अनुरोध किया।

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) ने 17 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. इंद्रनिल खान (स्वतंत्र प्रभार) को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपने मौजूदा शिकायत निवारण तंत्र, न्यायिक निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता का बचाव किया है। यह पत्र कैब के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक डालमिया द्वारा 13 जून 2026 को अपने फेसबुक पेज पर जारी किए गए एक खुले पत्र के जवाब में आया है, जिसमें चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपात की आशंकाएं जताई गई थीं।

पत्र में क्या कहा गया

कैब के आधिकारिक लेटरहेड पर लिखे इस पत्र में एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह पारदर्शिता, जवाबदेही और समग्र विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पत्र में कहा गया, 'हमारा मुख्य उद्देश्य आपके कार्यालय को यह भरोसा दिलाना है कि हमारे राज्य के युवाओं के सपने और उम्मीदें एक मजबूत, स्वतंत्र और कानूनी रूप से अनिवार्य प्रशासनिक ढाँचे द्वारा सुरक्षित हैं।' कैब ने यह भी रेखांकित किया कि फुटबॉल और हॉकी जैसे खेल उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

न्यायिक निगरानी का ढाँचा

कैब ने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर जारी संवैधानिक आदेशों का हवाला दिया। इन आदेशों के तहत हर राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में एक स्वतंत्र लोकपाल और नीति अधिकारी का पद अनिवार्य है, जिसके लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति जरूरी है। कैब में पिछले दो वर्षों से न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य, कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, लोकपाल एवं नीति अधिकारी दोनों भूमिकाओं में कार्यरत हैं।

गौरतलब है कि 2019 से अब तक कई न्यायिक हस्तियाँ इस पद पर अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी हैं। कैब के अनुसार, कोई भी हितधारक — चाहे एथलीट हो, कोच हो, अभिभावक हो या प्रशासक — दस्तावेजी साक्ष्य के साथ सीधे लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकता है।

अभिषेक डालमिया की मंशा पर सवाल

पत्र में कैब ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 30 वर्षों में बी.एन. दत्त, जगमोहन डालमिया, सौरव गांगुली, अभिषेक डालमिया और स्नेहाशीष गांगुली जैसे नामों ने अध्यक्ष पद पर काम किया है, और इस हालिया घटनाक्रम से पहले कभी भी इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप सार्वजनिक रूप से नहीं लगाए गए। पत्र में कहा गया, 'हैरानी की बात यह है कि हालिया संवाद से यह आभास होता है कि उनके अपने कार्यकाल को छोड़कर, अन्य प्रशासनों में भी गड़बड़ियाँ रही हैं।'

कैब ने यह भी कहा कि अभिषेक डालमिया 2022 तक सचिव और अध्यक्ष के रूप में इस प्रणाली से भलीभाँति परिचित थे, फिर भी उन्होंने 2022 से आज तक कभी कोई शिकायत नहीं की। एसोसिएशन ने इसे 'स्थापित न्यायिक फोरम को दरकिनार कर सार्वजनिक धारणा बनाने की कोशिश' करार दिया।

सौरव गांगुली की साख का उल्लेख

पत्र में मौजूदा कैब अध्यक्ष सौरव गांगुली की विश्वसनीयता का विशेष उल्लेख किया गया। गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान, बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और आईसीसी क्रिकेट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। पत्र के अनुसार उनकी ईमानदारी पर कभी कोई आरोप नहीं लगा। यही बात बी.एन. दत्त और जगमोहन डालमिया पर भी लागू होती है।

मंत्रालय से अनुरोध और आगे की राह

कैब ने खेल मंत्री से अनुरोध किया है कि वे एसोसिएशन का दौरा करें और 140 सदस्यों से सीधे मिलें। इसके अलावा, एक भ्रष्टाचार-रोधी हॉटलाइन बनाने का सुझाव भी दिया गया है, हालाँकि यह भी स्पष्ट किया गया कि लोकपाल को पहले से ही ऐसे मामलों को संभालने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। पत्र पर कैब अध्यक्ष सौरव गांगुली, उपाध्यक्ष नीतिश रंजन दत्ता, कोषाध्यक्ष संजय दास, सचिव बबलू कोलाय और पूर्व संयुक्त सचिव मदन मोहन घोष के हस्ताक्षर हैं। यह पत्र पश्चिम बंगाल में क्रिकेट प्रशासन के इर्द-गिर्द उभरते विवाद को एक नई दिशा देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कैब का यह जवाब शिकायतों के सार को संबोधित करने के बजाय प्रेषक की मंशा पर केंद्रित है — जो एक क्लासिक रक्षात्मक रणनीति है। लोकपाल व्यवस्था की तारीफ करते हुए कैब यह नहीं बताती कि पिछले वर्षों में उस व्यवस्था के तहत कितनी शिकायतें आईं और उनका क्या हश्र हुआ। जब तक ये आँकड़े सार्वजनिक नहीं होते, पारदर्शिता के दावे खोखले लगते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैब ने खेल मंत्री को पत्र क्यों लिखा?
कैब ने यह पत्र पूर्व अध्यक्ष अभिषेक डालमिया के 13 जून 2026 के उस खुले फेसबुक पत्र के जवाब में लिखा, जिसमें चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपात की आशंकाएं जताई गई थीं। कैब ने अपनी मौजूदा न्यायिक निगरानी व्यवस्था का बचाव करते हुए डालमिया की मंशा पर सवाल उठाए।
कैब में लोकपाल व्यवस्था कैसे काम करती है?
सर्वोच्च न्यायालय के लोढ़ा कमेटी-आधारित आदेशों के तहत हर राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में एक स्वतंत्र लोकपाल और नीति अधिकारी अनिवार्य है। कैब में पिछले दो वर्षों से कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य इस दोहरी भूमिका में कार्यरत हैं।
अभिषेक डालमिया ने किन मुद्दों पर चिंता जताई थी?
अभिषेक डालमिया ने अपने 13 जून 2026 के खुले पत्र में भ्रष्टाचार, गड़बड़ी और चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता को लेकर आशंकाएं जताई थीं। यह पत्र उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर सार्वजनिक किया था, जिसे बाद में कई मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित किया।
कैब ने डालमिया के पत्र पर क्या आपत्ति जताई?
कैब ने कहा कि डालमिया 2022 तक कैब में सचिव और अध्यक्ष रहे और उस दौरान कभी कोई शिकायत नहीं की। एसोसिएशन ने इसे स्थापित न्यायिक फोरम को दरकिनार कर सार्वजनिक धारणा बनाने की कोशिश करार दिया।
इस पत्र पर किन पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं?
पत्र पर कैब अध्यक्ष सौरव गांगुली, उपाध्यक्ष नीतिश रंजन दत्ता, कोषाध्यक्ष संजय दास, सचिव बबलू कोलाय और पूर्व संयुक्त सचिव मदन मोहन घोष के हस्ताक्षर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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