कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: खेल मंत्री मांडविया ने ग्लासगो में 'चीयर 4 भारत' साइकिलिंग इवेंट से एथलीटों का हौसला बढ़ाया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 23 जुलाई 2026 को ग्लासगो, स्कॉटलैंड में प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ मिलकर 'चीयर 4 भारत' बैनर तले एक विशेष साइकिलिंग इवेंट का आयोजन किया। इसका उद्देश्य 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग ले रहे भारतीय एथलीटों का मनोबल बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर फिटनेस जागरूकता का संदेश फैलाना था।
'चीयर 4 भारत' पहल का संदेश
इस अवसर पर मांडविया ने कहा, 'चीयर 4 भारत' पहल के ज़रिए भारतीय समुदाय अपने एथलीटों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'फिट इंडिया मूवमेंट' से प्रेरित यह आयोजन यह साबित करता है कि फिटनेस केवल एक व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की बुनियाद है। मंत्री ने कहा, 'फिट नागरिक ही स्वस्थ समाज बनाते हैं और स्वस्थ समाज ही समृद्ध राष्ट्र की नींव रखता है।'
साइकिलिंग: पर्यावरण और स्वास्थ्य का समाधान
मांडविया ने साइकिलिंग को एक साथ तीन समस्याओं का समाधान बताया — पर्यावरण प्रदूषण, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शहरी यातायात जाम। उन्होंने कहा, 'साइकिलिंग के ज़रिए हम दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि आइए, अपने ग्रह को बचाने के लिए मिलकर काम करें।' यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक स्तर पर टिकाऊ जीवनशैली अपनाने की माँग तेज़ हो रही है।
हाई कमिश्नर की उम्मीदें और 2030 का लक्ष्य
यूनाइटेड किंगडम में भारत के हाई कमिश्नर पेरियासामी कुमारन ने कहा कि 2026 का यह संस्करण कुछ सीमित खेलों के साथ आयोजित हो रहा है, लेकिन 2030 में अहमदाबाद में होने वाला कॉमनवेल्थ गेम्स इसका पूर्ण और भव्य रूप होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस बार पिछले प्रदर्शनों की तुलना में अधिक पदक जीतेगा और देश में इस आयोजन को लेकर ज़बरदस्त उत्साह है।
भारतीय दल: 19वीं भागीदारी, 124 एथलीट
भारत 19वीं बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतर रहा है। गौरतलब है कि भारत का इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता से नाता 1934 के दूसरे संस्करण से जुड़ा है, जब उसने पहली बार भाग लिया था। इस बार 124 सदस्यीय भारतीय दल आठ खेलों और पाँच पैरा-स्पोर्ट्स में पदक के लिए मैदान में उतरेगा। भारत अपने अभियान की शुरुआत पुरुष और महिला लॉन बाउल इवेंट्स से करेगा।
यह आयोजन भारत की खेल कूटनीति और वैश्विक प्रवासी समुदाय को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। 2030 के अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी को देखते हुए, ग्लासगो में यह उत्साह आने वाले वर्षों के लिए भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं का संकेत देता है।