15 अगस्त 2026
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प्रतिभा खोज अभियान: PM मोदी की पहल पर साई के खिलाड़ियों ने कहा — गांव-गांव में छुपी है खेल प्रतिभा

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प्रतिभा खोज अभियान: PM मोदी की पहल पर साई के खिलाड़ियों ने कहा — गांव-गांव में छुपी है खेल प्रतिभा

सारांश

PM मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 'प्रतिभा खोज अभियान' का ऐलान किया — 5 से 15 साल के बच्चों को गांव-गांव से पहचानकर SAI में ट्रेनिंग देने की योजना। गांधीनगर के एथलीटों और कोचों ने इसे 2036 ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए निर्णायक कदम बताया।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 'प्रतिभा खोज अभियान' की घोषणा की।
अभियान के तहत 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को पहचानकर प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी।
SAI गांधीनगर की अंतरराष्ट्रीय एथलीट सुजाता और राष्ट्रीय एथलीट नितिन व सचिन ने पहल की सराहना की।
हैंडबॉल कोच बीनोए डीएस के अनुसार SAI हर राज्य में जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की तलाश करेगा।
यह अभियान कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और 2036 ओलंपिक की तैयारियों से सीधे जुड़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लगातार 13वीं बार देश को संबोधित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने देशव्यापी 'प्रतिभा खोज अभियान' की घोषणा की, जिसके तहत 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचानकर उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस घोषणा का सीधा संबंध कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और भविष्य के ओलंपिक खेलों की तैयारियों से भी बताया गया।

खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया

गांधीनगर स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में प्रशिक्षण ले रहीं अंतरराष्ट्रीय एथलीट सुजाता ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री का प्रतिभा खोज अभियान एक शानदार पहल है। अगर हमें 2036 के लिए एक मजबूत टीम तैयार करनी है, तो अभी से छोटे शहर-गांव में छिपी प्रतिभाओं को पहचाना होगा।' उन्होंने आगे कहा, '5 से 10 साल के बच्चों को अगर सही समय पर मौका, अच्छी कोचिंग और बेहतरीन सुविधाएं मिलें तो भारत कई नए खेलों में विश्व स्तर पर आगे बढ़ सकता है। प्रतिभा देश के हर कोने में है, हमें सिर्फ उसे पहचानने की जरूरत है।'

राष्ट्रीय स्तर के एथलीट नितिन ने भी इस अभियान को अहम बताते हुए कहा, 'भारत के कई खेलों की टीमें बाहर नहीं जा पाती हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह पहल शानदार है।' नितिन ने यह भी कहा कि नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) और SAI में उपलब्ध विश्वस्तरीय प्रशिक्षण का लाभ अब जमीनी स्तर पर चुने गए बच्चों को मिल सकेगा, जिससे भविष्य में और अधिक पदक आने की संभावना है।

कोचों का नज़रिया

हैंडबॉल कोच बीनोए डीएस ने बताया कि SAI हर राज्य में जमीनी स्तर पर जाकर खिलाड़ियों की तलाश करेगा और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय टीम तैयार की जाएगी। उनके अनुसार यह अभियान केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूरदराज के गांवों और कस्बों तक पहुंचेगा।

अन्य एथलीटों की राय

राष्ट्रीय स्तर के एथलीट सचिन ने भी प्रधानमंत्री की इस घोषणा की सराहना की। उनका कहना था कि यदि कम उम्र में ही सही दिशा और संसाधन मिलें, तो आने वाले वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपनी उपस्थिति और मजबूत कर सकता है।

अभियान का महत्व और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी के साथ-साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारियों में जुटा है। गौरतलब है कि भारत में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं, बल्कि उन्हें समय पर पहचानने और संसाधन उपलब्ध कराने की चुनौती रही है। 'प्रतिभा खोज अभियान' इसी अंतर को पाटने का प्रयास है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो अगले एक दशक में भारतीय खेल परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव देखा जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — भारत में ऐसी योजनाओं की कमी नहीं रही, कमी रही है उनके जमीनी स्तर पर टिकाऊ अनुवाद की। SAI के पास बुनियादी ढांचा है, पर ग्रामीण पहुंच और स्थानीय कोचिंग इकोसिस्टम की खाई अभी भी चौड़ी है। 2036 ओलंपिक की दावेदारी के साथ यह अभियान राजनीतिक रूप से समयबद्ध है, लेकिन बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र और राज्य-स्तरीय जवाबदेही के, यह सुर्खियों से आगे जाने में संघर्ष कर सकता है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी का 'प्रतिभा खोज अभियान' क्या है?
यह 15 अगस्त 2026 को लाल किले से घोषित एक राष्ट्रव्यापी खेल प्रतिभा पहचान कार्यक्रम है, जिसके तहत 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को देशभर के गांवों और छोटे शहरों से चुनकर पेशेवर प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी। इसका लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और 2036 ओलंपिक के लिए मजबूत खेल टीमें तैयार करना है।
इस अभियान से किन बच्चों को फायदा होगा?
5 से 15 वर्ष की आयु के वे बच्चे जो छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में रहते हैं और जिनकी खेल प्रतिभा अब तक संसाधनों की कमी के कारण उभर नहीं पाई, उन्हें इस अभियान से सीधा लाभ मिलेगा। SAI और NCOE में चयन के बाद उन्हें विश्वस्तरीय कोचिंग मिलेगी।
SAI इस अभियान में क्या भूमिका निभाएगा?
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) हर राज्य में जाकर जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करेगा। चुने गए बच्चों को SAI और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जहां पहले से विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यह अभियान कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 से कैसे जुड़ा है?
PM मोदी ने अपने भाषण में कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और ओलंपिक तैयारियों का विशेष उल्लेख किया। हैंडबॉल कोच बीनोए डीएस के अनुसार, इस अभियान के जरिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय टीम तैयार करने की योजना है।
खिलाड़ियों ने इस पहल पर क्या कहा?
SAI गांधीनगर में प्रशिक्षण ले रहीं अंतरराष्ट्रीय एथलीट सुजाता ने कहा कि 2036 ओलंपिक के लिए अभी से ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचानना जरूरी है। राष्ट्रीय एथलीट नितिन और सचिन ने भी इसे भारतीय खेलों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।
राष्ट्र प्रेस
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