कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: फ्लू से बचाव के लिए डॉ. दिनशॉ पारदीवाला की एथलीटों को सख्त हिदायत, डोपिंग पर भी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी के बीच भारत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने 25 जुलाई को भारतीय एथलीटों को साफ-सफाई के कड़े नियमों का पालन करने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमित हाथ धोने जैसी सरल आदतें संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
मुख्य चिकित्सा सलाह
डॉ. पारदीवाला ने कहा कि भारतीय दल के सभी सदस्यों — खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ दोनों — को स्वच्छता के प्रति सचेत रहना होगा। उन्होंने विशेष रूप से निरंतर हाथ धोने पर जोर दिया और कहा कि यह छोटी-सी आदत फ्लू के प्रसार को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है। बड़े खेल आयोजनों में एथलीट एक-दूसरे के निकट संपर्क में रहते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा स्वाभाविक रूप से अधिक होता है।
डोपिंग पर कड़ा रुख
डॉ. पारदीवाला ने डोपिंग के मुद्दे पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि डोपिंग खेलों में एक बड़ी समस्या है। हमें इसे किसी भी तरह खत्म करना होगा। असल में, डोपिंग एक तरह की धोखाधड़ी है और भारतीय होने के नाते हम नहीं चाहेंगे कि हमारी पहचान धोखेबाजों के तौर पर हो। अक्सर ऐसा होता है कि कोई एक व्यक्ति गलत काम करता है और उस एक व्यक्ति की वजह से पूरे देश की बदनामी होती है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि सख्ती बरतना जरूरी है। ऐसे लोगों की पहचान करना और उन्हें खेल से बाहर करना जरूरी है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने 'क्लीन स्पोर्ट' के लिए नीरज चोपड़ा फाउंडेशन के साथ मिलकर एक बहुत अच्छी पहल शुरू की है। मुझे लगता है कि अगले एक-दो सालों में इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा।'
भारतीय जूडो टीम पर डोपिंग का संकट
यह सलाह ऐसे समय में आई है जब भारतीय जूडो टीम डोपिंग मामलों के कारण गंभीर संकट में है। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में रजत पदक जीत चुकीं तूलिका मान (27 वर्ष) को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने 12 महीनों के भीतर तीन बार लोकेशन फेल होने के कारण अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया, जिससे वे ग्लासगो खेलों से बाहर हो गईं। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के नियमों के तहत उन पर दो साल का प्रतिबंध लग सकता है।
इससे भी कम समय पहले, एक अन्य भारतीय जूडोका अरुण कुमार भी नाडा के आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्थायी रूप से निलंबित हुए और टीम से बाहर किए गए। इन दोनों मामलों ने ग्लासगो में भारतीय जूडो दल की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।
आगे की राह
IOA और नीरज चोपड़ा फाउंडेशन की 'क्लीन स्पोर्ट' पहल इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डॉ. पारदीवाला के अनुसार, यह पहल आने वाले वर्षों में भारतीय खेलों में डोपिंग की संस्कृति को बदलने में सहायक हो सकती है। फिलहाल, भारतीय दल का ध्यान फ्लू से बचाव और शेष प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर केंद्रित है।