25 जुलाई 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: फ्लू से बचाव के लिए डॉ. दिनशॉ पारदीवाला की एथलीटों को सख्त हिदायत, डोपिंग पर भी चेतावनी

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: फ्लू से बचाव के लिए डॉ. दिनशॉ पारदीवाला की एथलीटों को सख्त हिदायत, डोपिंग पर भी चेतावनी

सारांश

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में फ्लू का खतरा और डोपिंग का दोहरा संकट — भारत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने एथलीटों को स्वच्छता की सख्त हिदायत दी, जबकि तूलिका मान और अरुण कुमार के निलंबन ने भारतीय जूडो टीम को बड़ा झटका दिया।

मुख्य बातें

भारत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.
दिनशॉ पारदीवाला ने 25 जुलाई 2026 को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में फ्लू से बचाव के लिए एथलीटों को निरंतर हाथ धोने की सलाह दी।
जूडोका तूलिका मान को नाडा ने 12 महीनों में तीन बार लोकेशन फेल होने पर निलंबित किया; वाडा के तहत 2 साल का बैन संभव।
जूडोका अरुण कुमार आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए, टीम से बाहर किए गए।
IOA और नीरज चोपड़ा फाउंडेशन ने 'क्लीन स्पोर्ट' पहल शुरू की है, जिसे डॉ.
पारदीवाला ने डोपिंग को 'धोखाधड़ी' करार देते हुए दोषी खिलाड़ियों की पहचान और निष्कासन पर जोर दिया।

ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी के बीच भारत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने 25 जुलाई को भारतीय एथलीटों को साफ-सफाई के कड़े नियमों का पालन करने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमित हाथ धोने जैसी सरल आदतें संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

मुख्य चिकित्सा सलाह

डॉ. पारदीवाला ने कहा कि भारतीय दल के सभी सदस्यों — खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ दोनों — को स्वच्छता के प्रति सचेत रहना होगा। उन्होंने विशेष रूप से निरंतर हाथ धोने पर जोर दिया और कहा कि यह छोटी-सी आदत फ्लू के प्रसार को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है। बड़े खेल आयोजनों में एथलीट एक-दूसरे के निकट संपर्क में रहते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा स्वाभाविक रूप से अधिक होता है।

डोपिंग पर कड़ा रुख

डॉ. पारदीवाला ने डोपिंग के मुद्दे पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि डोपिंग खेलों में एक बड़ी समस्या है। हमें इसे किसी भी तरह खत्म करना होगा। असल में, डोपिंग एक तरह की धोखाधड़ी है और भारतीय होने के नाते हम नहीं चाहेंगे कि हमारी पहचान धोखेबाजों के तौर पर हो। अक्सर ऐसा होता है कि कोई एक व्यक्ति गलत काम करता है और उस एक व्यक्ति की वजह से पूरे देश की बदनामी होती है।'

उन्होंने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि सख्ती बरतना जरूरी है। ऐसे लोगों की पहचान करना और उन्हें खेल से बाहर करना जरूरी है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने 'क्लीन स्पोर्ट' के लिए नीरज चोपड़ा फाउंडेशन के साथ मिलकर एक बहुत अच्छी पहल शुरू की है। मुझे लगता है कि अगले एक-दो सालों में इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा।'

भारतीय जूडो टीम पर डोपिंग का संकट

यह सलाह ऐसे समय में आई है जब भारतीय जूडो टीम डोपिंग मामलों के कारण गंभीर संकट में है। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में रजत पदक जीत चुकीं तूलिका मान (27 वर्ष) को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने 12 महीनों के भीतर तीन बार लोकेशन फेल होने के कारण अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया, जिससे वे ग्लासगो खेलों से बाहर हो गईं। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के नियमों के तहत उन पर दो साल का प्रतिबंध लग सकता है।

इससे भी कम समय पहले, एक अन्य भारतीय जूडोका अरुण कुमार भी नाडा के आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्थायी रूप से निलंबित हुए और टीम से बाहर किए गए। इन दोनों मामलों ने ग्लासगो में भारतीय जूडो दल की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

आगे की राह

IOA और नीरज चोपड़ा फाउंडेशन की 'क्लीन स्पोर्ट' पहल इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डॉ. पारदीवाला के अनुसार, यह पहल आने वाले वर्षों में भारतीय खेलों में डोपिंग की संस्कृति को बदलने में सहायक हो सकती है। फिलहाल, भारतीय दल का ध्यान फ्लू से बचाव और शेष प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि निवारक। IOA-नीरज चोपड़ा फाउंडेशन की 'क्लीन स्पोर्ट' पहल सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि शिक्षा कार्यक्रम उन खिलाड़ियों तक कब पहुँचेंगे जो लोकेशन नियमों जैसी प्रक्रियात्मक ज़िम्मेदारियों से अनजान हैं। फ्लू की चेतावनी और डोपिंग संकट एक साथ आना भारतीय दल के प्रबंधन पर दबाव को उजागर करता है — ग्लासगो में प्रदर्शन से पहले ही लड़ाई मैदान के बाहर शुरू हो चुकी है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में फ्लू से बचाव के लिए डॉ. पारदीवाला ने क्या सलाह दी?
डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने भारतीय एथलीटों और दल के सभी सदस्यों को साफ-सफाई का कड़ाई से पालन करने और निरंतर हाथ धोते रहने की सलाह दी। उनके अनुसार यह सरल उपाय ग्लासगो में फ्लू संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
तूलिका मान को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से क्यों बाहर किया गया?
जूडोका तूलिका मान को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने 12 महीनों के भीतर तीन बार लोकेशन फेल होने पर अस्थायी रूप से निलंबित किया। वाडा के नियमों के तहत उन पर दो साल का प्रतिबंध लग सकता है।
अरुण कुमार पर डोपिंग का क्या मामला है?
भारतीय जूडोका अरुण कुमार नाडा के आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए, जिसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की टीम से बाहर कर दिया गया। यह घटना तूलिका मान के निलंबन के एक दिन से भी कम समय बाद सामने आई।
IOA और नीरज चोपड़ा फाउंडेशन की 'क्लीन स्पोर्ट' पहल क्या है?
इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने नीरज चोपड़ा फाउंडेशन के साथ मिलकर 'क्लीन स्पोर्ट' पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य भारतीय खेलों में डोपिंग को खत्म करना है। डॉ. पारदीवाला के अनुसार, यह पहल अगले एक-दो वर्षों में भारतीय खेलों में बड़ा बदलाव ला सकती है।
डोपिंग पर डॉ. पारदीवाला का क्या कहना है?
डॉ. पारदीवाला ने डोपिंग को खेलों में 'धोखाधड़ी' करार दिया और कहा कि एक खिलाड़ी की गलती से पूरे देश की छवि खराब होती है। उन्होंने दोषी खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें खेल से बाहर करने की सख्त जरूरत पर बल दिया।
राष्ट्र प्रेस
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