तूलिका मान कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से बाहर, नाडा ने लोकेशन उल्लंघन पर किया निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जूडो स्टार तूलिका मान को राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी एजेंसी (नाडा) ने 12 महीनों के भीतर तीन बार लोकेशन फेलियर के आधार पर अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है, जिसके चलते वे ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से बाहर हो गई हैं। 24 जुलाई 2026 को सामने आई यह खबर भारतीय जूडो दल के लिए दूसरा बड़ा झटका है। 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के +78 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाली मान ग्लासगो में पदक की प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं।
मुख्य घटनाक्रम
27 वर्षीया तूलिका मान का यह मामला पॉजिटिव डोपिंग टेस्ट से भिन्न है। यह वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) के वेयरअबाउट्स नियमों से जुड़ा है, जिसके तहत रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल में शामिल एथलीटों को अपनी ट्रेनिंग और निवास स्थान की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करनी होती है और प्रतिदिन 60 मिनट का टाइम स्लॉट उपलब्ध रखना होता है। वाडा के नियमों के अनुसार, किसी भी 12 महीने की अवधि में तीन फाइलिंग फेलियर, टेस्ट मिस, या दोनों का संयोजन एंटी-डोपिंग नियम उल्लंघन माना जाता है।
वाडा के नियमों के तहत मान पर अब दो वर्ष का प्रतिबंध लग सकता है, हालाँकि अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकरण द्वारा लिया जाएगा।
भारतीय जूडो टीम पर दोहरी मार
तूलिका मान का निलंबन एक और भारतीय जूडोका अरुण कुमार के निलंबन के एक दिन से भी कम समय बाद सामने आया। अरुण कुमार नाडा के आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें भी टीम से बाहर कर दिया गया। इस प्रकार, महज कुछ घंटों में भारतीय जूडो दल को दो प्रमुख खिलाड़ियों से हाथ धोना पड़ा।
गौरतलब है कि भारतीय जूडो टीम अभी तक ग्लासगो के लिए रवाना नहीं हुई थी। टीम के 27 जुलाई 2026 को रवाना होने की योजना थी, क्योंकि भारत के मुकाबले 31 जुलाई से शुरू होने वाले हैं। इन लगातार दो निलंबनों ने टीम की तैयारियों और चयन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
तूलिका मान का करियर
तूलिका मान हाल के वर्षों में भारत की सबसे सफल जूडोका रही हैं। 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक के अलावा उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 2022 तथा 2024 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया। यह निलंबन उनके करियर के लिए एक गंभीर धक्का है।
वेयरअबाउट्स नियम क्या हैं
वाडा के वेयरअबाउट्स नियमों के तहत रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल के एथलीटों को अपनी दैनिक उपस्थिति की जानकारी एंटी-डोपिंग अधिकारियों को देनी होती है, ताकि वे किसी भी समय आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन परीक्षण कर सकें। यह प्रणाली डोपिंग से बचने के लिए बनाई गई है। इस नियम का पालन न करना भी एंटी-डोपिंग उल्लंघन की श्रेणी में आता है, भले ही एथलीट किसी प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन न करे।
आगे क्या होगा
मान के मामले में अंतिम अनुशासनात्मक निर्णय सक्षम एंटी-डोपिंग पैनल द्वारा लिया जाएगा। भारतीय जूडो महासंघ को अब ग्लासगो के लिए अपनी टीम का पुनर्गठन करना होगा। यह घटनाक्रम भारतीय खेल प्रशासन के लिए एथलीटों को वेयरअबाउट्स अनुपालन के प्रति जागरूक करने की जरूरत को रेखांकित करता है।