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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले याद करें 5 बड़े विवाद: फकीरी का अश्लील इशारा, कोविड पॉजिटिव ताहिला और ₹70,000 करोड़ का घोटाला

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले याद करें 5 बड़े विवाद: फकीरी का अश्लील इशारा, कोविड पॉजिटिव ताहिला और ₹70,000 करोड़ का घोटाला

सारांश

ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत से ठीक पहले — इन खेलों का वह काला अध्याय जिसमें अश्लील इशारे से मेडल छिने, कोविड पॉजिटिव खिलाड़ी मैदान पर उतरी और ₹70,000 करोड़ के घोटाले ने भारत की साख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दाँव पर लगा दिया।

मुख्य बातें

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से ग्लासगो, स्कॉटलैंड में होगा; भारत के 125 एथलीट शामिल।
ऑस्ट्रेलियाई पहलवान हसीन फकीरी को 2010 में अश्लील इशारे के कारण फाइनल से अयोग्य और सिल्वर मेडल जब्त किया गया।
2022 के फाइनल में कोविड पॉजिटिव ताहिला मैक्ग्रा के खेलने पर विवाद; भारत उस मुकाबले में हारा।
2006 में इंग्लैंड की महिला रिले टीम का गोल्ड मेडल नियम उल्लंघन पर वापस लिया गया, ऑस्ट्रेलिया को दिया गया।
2018 में 'नो नीडल पॉलिसी' उल्लंघन पर भारतीय एथलीट राकेश बाबू और केटी इरफान स्वदेश भेजे गए।
2010 दिल्ली गेम्स में लगभग ₹70,000 करोड़ के घोटाले में सुरेश कलमाड़ी गिरफ्तार।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से ग्लासगो, स्कॉटलैंड में होने जा रहा है। भारत के 125 एथलीट पदक की उम्मीद लेकर स्कॉटलैंड पहुँचे हैं। लेकिन इन खेलों का इतिहास केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि कई बड़े विवादों का भी गवाह रहा है — जिन्होंने खेल भावना और प्रशासन दोनों पर सवाल खड़े किए।

हसीन फकीरी का अश्लील इशारा और तत्काल प्रतिबंध

कॉमनवेल्थ गेम्स 2010, जो नई दिल्ली में आयोजित हुए थे, के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पहलवान हसीन फकीरी ने फाइनल मुकाबले में रेफरी के निर्णय से असहमत होकर अश्लील इशारा किया। इस हरकत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें फाइनल से अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनका सिल्वर मेडल भी जब्त कर लिया गया।

फकीरी को लिखित माफी माँगनी पड़ी, लेकिन इस विवाद के बाद वह दोबारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकीं। यह घटना खेल आचार संहिता के उल्लंघन का एक उल्लेखनीय उदाहरण बन गई।

कोविड पॉजिटिव ताहिला मैक्ग्रा को मैदान पर उतारने का विवाद

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के महिला क्रिकेट फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ताहिला मैक्ग्रा के खेलने पर व्यापक विरोध हुआ था। आलोचकों का कहना है कि ताहिला उस समय कोविड-19 पॉजिटिव थीं, फिर भी उन्हें मैदान पर उतरने की अनुमति दी गई।

इस निर्णय की चारों ओर से निंदा हुई, क्योंकि यह खिलाड़ियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और खेल की निष्पक्षता दोनों पर सवाल उठाता था। उस फाइनल मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

इंग्लैंड की महिला रिले टीम से छिना गोल्ड मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2006 में 4×400 मीटर रिले रेस में इंग्लैंड की महिला टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। हालाँकि, नियमों के उल्लंघन के कारण टीम को बाद में अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनका गोल्ड मेडल वापस ले लिया गया।

इसके बाद यह पदक ऑस्ट्रेलिया को दे दिया गया। इस घटना ने खेल प्रशासन में नियम-पालन की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित किया।

'नो नीडल पॉलिसी' उल्लंघन में भारतीय एथलीट स्वदेश रवाना

कॉमनवेल्थ गेम्स 2018, जो गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित हुए, के दौरान भारतीय एथलीट राकेश बाबू और रेस वॉकर केटी इरफान को कॉमनवेल्थ विलेज से निष्कासित कर स्वदेश भेज दिया गया। उनके कमरों में सीरिंज मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

आयोजकों की 'नो नीडल पॉलिसी' के तहत किसी भी खिलाड़ी को सीरिंज, पेनकिलर या अनधिकृत दवाइयाँ रखने की अनुमति नहीं थी। इस घटना ने भारत के खेल प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया।

दिल्ली 2010 का ₹70,000 करोड़ का घोटाला

कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के समापन के बाद सामने आए वित्तीय घोटाले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को गहरी चोट पहुँचाई। रिपोर्टों के अनुसार, इन खेलों के आयोजन में लगभग ₹70,000 करोड़ के घोटाले के आरोप लगे।

तत्कालीन आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को इस घोटाले में मुख्य आरोपी पाया गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया। यह मामला भारत में खेल आयोजनों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बड़े सवाल के रूप में आज भी याद किया जाता है।

ग्लासगो में 23 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले इस संस्करण में भारतीय दल बेहतर प्रदर्शन और विवाद-मुक्त भागीदारी की उम्मीद के साथ उतरेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का घोटाला और 2022 में कोविड पॉजिटिव खिलाड़ी को मैदान पर उतारने का निर्णय — दोनों दिखाते हैं कि जब संस्थागत जवाबदेही कमज़ोर होती है, तो खेल भावना सबसे पहले कुर्बान होती है। ग्लासगो 2026 में भारत के 125 एथलीट जब उतरेंगे, तो असली सवाल यह है कि क्या खेल संस्थाओं ने इन विवादों से कुछ सीखा है — या इतिहास खुद को दोहराने के लिए तैयार है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हसीन फकीरी पर कॉमनवेल्थ गेम्स में क्यों प्रतिबंध लगाया गया था?
2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के कुश्ती फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई पहलवान हसीन फकीरी ने रेफरी के निर्णय से नाराज़ होकर अश्लील इशारा किया, जिसके बाद उन्हें तत्काल अयोग्य घोषित किया गया और उनका सिल्वर मेडल जब्त कर लिया गया। माफी माँगने के बावजूद वह दोबारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकीं।
ताहिला मैक्ग्रा का कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में क्या विवाद था?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के महिला क्रिकेट फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ताहिला मैक्ग्रा कथित तौर पर कोविड-19 पॉजिटिव थीं, फिर भी उन्हें मैदान पर उतरने की अनुमति दी गई। इस निर्णय की आलोचकों ने व्यापक निंदा की और उस फाइनल में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया से हार गई।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के घोटाले में कौन मुख्य आरोपी था?
दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में लगभग ₹70,000 करोड़ के घोटाले के मुख्य आरोपी आयोजन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पाए गए थे, जिन्हें गिरफ्तार किया गया। इस घोटाले ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया।
'नो नीडल पॉलिसी' क्या है और इसमें भारतीय एथलीट कैसे फँसे?
'नो नीडल पॉलिसी' के तहत कॉमनवेल्थ विलेज में किसी भी खिलाड़ी को सीरिंज, अनधिकृत दवाइयाँ या पेनकिलर रखने की अनुमति नहीं होती। 2018 के गोल्ड कोस्ट गेम्स में भारतीय एथलीट राकेश बाबू और रेस वॉकर केटी इरफान के कमरों में सीरिंज मिलने पर दोनों को विलेज से निष्कासित कर स्वदेश भेज दिया गया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत कितने एथलीट भेज रहा है?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के कुल 125 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं, जो 23 जुलाई से ग्लासगो, स्कॉटलैंड में आयोजित इन खेलों में पदक जीतने के लक्ष्य के साथ पहुँचे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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