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डेल स्टेन का बड़ा बयान: 'टी20 में सफलता से ज़्यादा मिलती है नाकामी, यही है इस फॉर्मेट की असलियत'

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डेल स्टेन का बड़ा बयान: 'टी20 में सफलता से ज़्यादा मिलती है नाकामी, यही है इस फॉर्मेट की असलियत'

सारांश

डेल स्टेन का मानना है कि टी20 क्रिकेट की असलियत यह है — इसमें नाकामी, सफलता से ज़्यादा मिलती है। लेकिन यही इस फॉर्मेट की खूबसूरती भी है। वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी इसी बदली सोच की उपज हैं, जहाँ डर की जगह स्वतंत्रता ने ली है।

मुख्य बातें

डेल स्टेन ने कहा कि टी20 फॉर्मेट में खिलाड़ी सफल होने से ज़्यादा बार नाकाम होते हैं — और यह इस फॉर्मेट की स्वाभाविक प्रकृति है।
स्टेन के अनुसार, अब गेंदबाज़ों को इकोनॉमी रेट से ज़्यादा विकेट लेने पर ध्यान देने को कहा जाता है।
10 साल पहले खराब शॉट खेलने पर बल्लेबाज़ की एक हफ्ते तक आलोचना होती थी; अब यह नज़रिया बदल चुका है।
वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी इसी मानसिक स्वतंत्रता की वजह से पहली गेंद पर छक्का लगाने का साहस दिखाते हैं।
पहले केवल सनत जयसूर्या और वीरेंद्र सहवाग जैसे चुनिंदा बल्लेबाज़ ही इस तरह का आक्रामक खेल खेलते थे।

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ डेल स्टेन ने 12 जून 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष बातचीत में टी20 क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर बेबाकी से अपने विचार रखे। स्टेन के अनुसार, इस फॉर्मेट की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि खिलाड़ी सफल होने से ज़्यादा बार नाकाम होते हैं — और आज के कोच, टीम मैनेजमेंट और क्रिकेट विशेषज्ञ इस हकीकत को पहले से कहीं बेहतर समझते हैं।

टी20 में बदली है सफलता-विफलता की परिभाषा

स्टेन ने कहा कि टी20 क्रिकेट में कुछ सीज़न खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन साबित होते हैं, जबकि कुछ सीज़न में वही खिलाड़ी असाधारण प्रदर्शन करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उतार-चढ़ाव इस फॉर्मेट की स्वाभाविक प्रकृति है। विराट कोहली का उदाहरण देते हुए स्टेन ने कहा कि उनके दौर में बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ हर साल अपने खेल को निखारने की कोशिश करते थे, लेकिन टी20 के लगातार विकसित होने के साथ यह सोच भी बदल गई है।

खराब शॉट पर अब नहीं होती फटकार

स्टेन ने बताया कि दस साल पहले अगर कोई बल्लेबाज़ लापरवाह शॉट खेलकर आउट होता था, तो उसकी चर्चा पूरे एक हफ्ते तक चलती थी — टेलीविज़न पर कमेंटेटर्स उसे घेरते थे और कोच भी नाराज़गी जताते थे। अब यह नज़रिया पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने कहा, 'अब बल्लेबाज़ को यह डर नहीं है कि खराब शॉट खेलने पर उसे टीवी पर या कोच द्वारा फटकार लगाई जाएगी।'

स्टेन के अनुसार, यह बदलाव खिलाड़ियों को मानसिक स्वतंत्रता देता है और वे बिना दबाव के अपनी स्वाभाविक शैली में खेल पाते हैं।

इकोनॉमी नहीं, विकेट है असली मापदंड

गेंदबाज़ों के बढ़ते इकोनॉमी रेट पर बात करते हुए स्टेन ने कहा कि पहले कमेंटेटर्स और कोच गेंदबाज़ों को इकोनॉमी रेट के आधार पर आँकते थे और उसे कम करने का दबाव बनाते थे। लेकिन अब यह सोच बदल गई है। उन्होंने कहा, 'अब कोच और कमेंटेटर्स यह अच्छी तरह जानते हैं कि इस फॉर्मेट में विकेट लेना इकोनॉमी रेट से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है।'

वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी हैं इस बदलाव की मिसाल

स्टेन ने वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी खुले माहौल की वजह से ऐसे युवा खिलाड़ी क्रीज़ पर आते ही पहली गेंद पर छक्का लगाने का साहस दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि पहले के ज़माने में केवल सनत जयसूर्या, वीरेंद्र सहवाग या कुछ गिने-चुने बल्लेबाज़ ही इस तरह का आक्रामक खेल खेलते थे। कमेंटेटर्स, कोच, क्रिकेट विशेषज्ञों और खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल ने इस संस्कृति को बदला है।

खेल का विकास: स्टेन का निष्कर्ष

स्टेन ने अपनी बात को यह कहते हुए समेटा कि अब सभी हितधारक — कोच, कमेंटेटर्स और खिलाड़ी — यह स्वीकार कर चुके हैं कि टी20 क्रिकेट इसी तरह विकसित हो रहा है। उनके अनुसार, यह स्वीकार्यता ही आधुनिक टी20 क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत है। आने वाले वर्षों में यह फॉर्मेट और भी आक्रामक तथा अप्रत्याशित होता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक गहरा बिंदु छुपा है — टी20 क्रिकेट ने 'विफलता' को पुनर्परिभाषित कर दिया है। जब नाकामी को फॉर्मेट का हिस्सा मान लिया जाए, तो जवाबदेही का ढाँचा कमज़ोर पड़ने का खतरा भी रहता है। वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों का उभरना इस बदली संस्कृति का सकारात्मक पहलू है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि 'डर हटाने' और 'अनुशासन हटाने' के बीच की रेखा कहाँ खिंचती है। इकोनॉमी रेट बनाम विकेट की बहस वास्तव में उस बड़े संघर्ष का प्रतिबिंब है, जो टेस्ट क्रिकेट की मानसिकता और टी20 की आवश्यकताओं के बीच आज भी जारी है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डेल स्टेन ने टी20 क्रिकेट के बारे में क्या कहा?
डेल स्टेन ने कहा कि टी20 फॉर्मेट में खिलाड़ी सफल होने से ज़्यादा बार नाकाम होते हैं, और यह इस फॉर्मेट की स्वाभाविक प्रकृति है। उन्होंने कहा कि आज कोच और टीम मैनेजमेंट इस सच्चाई को पहले से बेहतर समझते हैं।
स्टेन के अनुसार टी20 में गेंदबाज़ों का मूल्यांकन कैसे बदला है?
स्टेन के अनुसार पहले गेंदबाज़ों को इकोनॉमी रेट के आधार पर आँका जाता था, लेकिन अब विकेट लेना सबसे अहम मापदंड बन गया है। कोच और कमेंटेटर्स अब इकोनॉमी से ज़्यादा विकेट लेने पर ज़ोर देते हैं।
वैभव सूर्यवंशी का ज़िक्र स्टेन ने क्यों किया?
स्टेन ने वैभव सूर्यवंशी को टी20 क्रिकेट की बदली संस्कृति की मिसाल के तौर पर पेश किया। उनके अनुसार, खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल की वजह से अब युवा खिलाड़ी बिना डर के पहली गेंद पर भी छक्का लगाने का साहस दिखाते हैं।
स्टेन ने विराट कोहली का उदाहरण किस संदर्भ में दिया?
स्टेन ने विराट कोहली का उदाहरण यह बताने के लिए दिया कि उनके दौर में बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ हर साल अपने खेल को बेहतर बनाने की कोशिश करते थे। यह टी20 के मौजूदा दौर से तुलना करने के लिए था, जहाँ सोच और प्राथमिकताएँ बदल चुकी हैं।
टी20 क्रिकेट में बल्लेबाज़ों की आलोचना का नज़रिया कैसे बदला है?
स्टेन के अनुसार, दस साल पहले खराब शॉट खेलकर आउट होने पर बल्लेबाज़ की एक हफ्ते तक कमेंटेटर्स और कोच द्वारा आलोचना होती थी। अब यह नज़रिया पूरी तरह बदल चुका है और खिलाड़ियों को मानसिक स्वतंत्रता मिली है।
राष्ट्र प्रेस
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