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देवदत्त पडिक्कल 'प्लेयर ऑफ द सीरीज': 109.33 औसत से 328 रन, पर कोलंबो जीत की कमी खली

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देवदत्त पडिक्कल 'प्लेयर ऑफ द सीरीज': 109.33 औसत से 328 रन, पर कोलंबो जीत की कमी खली

सारांश

धीमी उपमहाद्वीप पिचों पर 167, 44 और 117 रनों की पारियाँ खेलकर देवदत्त पडिक्कल ने 109.33 की औसत से 328 रन बनाए और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का खिताब जीता। भारत ने सीरीज 1-0 से जीती, पर कोलंबो में जीत न मिलने का मलाल पडिक्कल की खुशी पर भारी पड़ा।

मुख्य बातें

देवदत्त पडिक्कल को श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया।
पडिक्कल ने सीरीज में 109.33 की औसत से 328 रन बनाए — पारियाँ: 167, 44 और 117 ।
भारत ने सीरीज 1-0 से जीती; कोलंबो टेस्ट ड्रॉ रहा।
साई सुदर्शन की जगह खेलते हुए पडिक्कल ने धीमी पिचों पर उल्लेखनीय परिपक्वता दिखाई।
पडिक्कल ने कहा कि बैटिंग नंबर से ज्यादा टीम की जीत उनके लिए मायने रखती है।

भारत के बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 109.33 की शानदार औसत से 328 रन बनाने के लिए 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया। 27 अगस्त को कोलंबो में सीरीज का दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहने के बाद भारत ने 1-0 से सीरीज अपने नाम की, लेकिन पडिक्कल ने कहा कि व्यक्तिगत पुरस्कार के साथ-साथ अगर कोलंबो में भी जीत मिलती तो यह अनुभव और भी यादगार होता।

सीरीज में पडिक्कल का प्रदर्शन

पडिक्कल के लिए यह श्रीलंका दौरा किसी सपने से कम नहीं रहा। उन्होंने गाले टेस्ट में 167 और 44 रन, तथा कोलंबो टेस्ट में 117 रन की पारी खेली। चोट के कारण बी. साई सुदर्शन की अनुपस्थिति में पडिक्कल ने उपमहाद्वीप की धीमी और टर्न लेने वाली पिचों पर जिस परिपक्वता का प्रदर्शन किया, वह उनकी बढ़ती तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

पडिक्कल के अपने शब्दों में

अवॉर्ड स्वीकार करने के बाद पडिक्कल ने कहा, 'यह बहुत अच्छा है, लेकिन अगर हमें इस मैच में जीत मिलती तो और भी बेहतर होता। दोनों पिचें — गाले और कोलंबो — काफी हद तक एक जैसी थीं। यहां पिच काफी धीमी थी, लेकिन आखिर में बल्लेबाजों ने ऐसी सतहों पर खेलकर बेहतर सीखा और पिछले कुछ दिनों में यह बात स्पष्ट तौर पर नजर आई।'

धीमी पिचों पर रणनीतिक सोच के बारे में उन्होंने कहा, 'इसके लिए बहुत स्पष्ट सोच की जरूरत होती है। आपके पास स्पष्ट योजना होनी चाहिए। यहां हर कोई अपनी योजना के साथ आया था, और बल्लेबाजों ने जिस तरह से उन्हें लागू किया, वह मैदान पर दिखा।'

टीम से बाहर रहने के बाद वापसी

राष्ट्रीय टेस्ट टीम में वापसी के सफर पर बात करते हुए पडिक्कल ने कहा, 'आप देश के लिए खेलना चाहते हैं, इसलिए कड़ी मेहनत करते रहते हैं, अपने साथियों की मदद करने की कोशिश करते हैं और जब मौका मिलता है तो उसका फायदा उठाते हैं। यह जरूरी है कि आप उसे जितनी जल्दी हो सके भूल जाएं और अगली गेंद पर ध्यान दें। मैंने यही करने की कोशिश की।'

बैटिंग ऑर्डर और टीम-फर्स्ट सोच

अपनी पसंदीदा बैटिंग पोजीशन पर पडिक्कल ने टीम-हित को सर्वोपरि रखते हुए कहा, 'सच कहूं तो, मैं बस रन बनाने से खुश हूं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं किस नंबर पर बैटिंग कर रहा हूं। टीम को जीतना चाहिए, और जब तक मैं उसमें योगदान दे रहा हूं, मैं खुश हूं।' उन्होंने युवा टीम की भूख का भी जिक्र किया: 'हमारी टीम बहुत युवा है। हमारे लिए सीखते रहना जरूरी है। हर कोई बहुत उत्साहित है और बेहतर बनने के लिए उत्सुक है।'

गौरतलब है कि यह सीरीज पडिक्कल के टेस्ट करियर में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है — आने वाले महीनों में भारत के व्यस्त टेस्ट कार्यक्रम में उनकी दावेदारी अब और मजबूत हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ एक युवा खिलाड़ी टीम से बाहर रहने के बाद लौटकर सीरीज का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बन जाता है। हालाँकि, कोलंबो में जीत न मिलना यह भी दर्शाता है कि भारत अभी भी उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में निरंतरता की चुनौती से जूझ रहा है। पडिक्कल की टीम-फर्स्ट सोच प्रशंसनीय है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि वे इस फॉर्म को ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड जैसी कठिन परिस्थितियों में कितना बरकरार रख पाते हैं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवदत्त पडिक्कल को 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' क्यों चुना गया?
पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 109.33 की औसत से 328 रन बनाए, जिसमें 167, 44 और 117 रन की पारियाँ शामिल हैं। धीमी और टर्न लेने वाली पिचों पर उनके इस असाधारण प्रदर्शन ने उन्हें यह पुरस्कार दिलाया।
भारत बनाम श्रीलंका टेस्ट सीरीज 2026 का नतीजा क्या रहा?
भारत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती। गाले टेस्ट में भारत ने जीत दर्ज की, जबकि कोलंबो का दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहा।
पडिक्कल ने कोलंबो टेस्ट में कितने रन बनाए?
पडिक्कल ने कोलंबो टेस्ट में 117 रन की पारी खेली। इससे पहले गाले टेस्ट में उन्होंने 167 और 44 रन बनाए थे।
बी. साई सुदर्शन की अनुपस्थिति का टीम पर क्या असर पड़ा?
चोट के कारण बी. साई सुदर्शन इस सीरीज में नहीं खेल सके। उनकी जगह पडिक्कल ने खेलते हुए इतना शानदार प्रदर्शन किया कि वे 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने।
पडिक्कल की धीमी पिचों पर बैटिंग रणनीति क्या रही?
पडिक्कल ने बताया कि धीमी पिचों पर सफल होने के लिए स्पष्ट मानसिक योजना जरूरी है। उनके अनुसार पूरी टीम स्पष्ट योजना के साथ मैदान पर उतरी और बल्लेबाजों ने उसे प्रभावी ढंग से लागू किया।
राष्ट्र प्रेस
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