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डोला बनर्जी: ओलंपिक क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज, 2007 में विश्व कप गोल्ड से रचा इतिहास

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डोला बनर्जी: ओलंपिक क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज, 2007 में विश्व कप गोल्ड से रचा इतिहास

सारांश

8 साल की उम्र में बारानगर क्लब से शुरुआत, 2004 में ओलंपिक का ऐतिहासिक टिकट, और 2007 में दुबई में विश्व कप गोल्ड — डोला बनर्जी ने भारतीय महिला तीरंदाजी को वह पहचान दी जो पहले अकल्पनीय थी।

मुख्य बातें

डोला बनर्जी का जन्म 2 जून 1980 को पश्चिम बंगाल के बारानगर में हुआ; उन्होंने 8 वर्ष की आयु में तीरंदाजी शुरू की।
वह 2004 एथेंस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बनीं; व्यक्तिगत स्पर्धा में 13वाँ स्थान हासिल किया।
2007 में दुबई के मेदिनात एम्फीथिएटर में आयोजित आर्चरी विश्व कप में गोल्ड मेडल जीता।
2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में दीपिका कुमारी व बॉम्बैला देवी के साथ महिला रिकर्व टीम इवेंट में गोल्ड , फाइनल में इंग्लैंड को हराया।
भारत सरकार ने 2005 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

डोला बनर्जी भारतीय तीरंदाजी की वह अग्रदूत हैं जिन्होंने एक ऐसे खेल में महिलाओं के लिए रास्ता बनाया जिसे लंबे समय तक पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। 2 जून 1980 को पश्चिम बंगाल के बारानगर में जन्मी डोला 2004 के एथेंस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बनीं — और यही उपलब्धि उन्हें भारतीय खेल इतिहास में विशेष स्थान दिलाती है।

बारानगर से शुरू हुआ सफर

डोला ने महज 8 वर्ष की आयु में तीरंदाजी शुरू की। खेल के प्रति उनकी असाधारण लगन को देखते हुए माता-पिता ने उनका दाखिला बारानगर तीरंदाजी क्लब में कराया, जहाँ उन्होंने इस विधा की बारीकियाँ सीखीं और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली दस्तक

1996 में सैन डिएगो में आयोजित युवा विश्व चैंपियनशिप में 16 वर्षीय डोला ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन किया। इसी प्रतिस्पर्धा ने उन्हें वैश्विक तीरंदाजी के मानचित्र पर स्थापित किया और आगे आने वाली बड़ी उपलब्धियों की नींव रखी।

ओलंपिक इतिहास और करियर की ऊँचाई

2004 में डोला एथेंस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बनीं — यह अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। व्यक्तिगत स्पर्धा में वह 13वें स्थान पर रहीं। इसके बाद 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भी वह भारतीय दल का हिस्सा रहीं।

करियर की सर्वोच्च उपलब्धि 2007 में आई, जब डोला ने दुबई के मेदिनात एम्फीथिएटर में आयोजित आर्चरी विश्व कप के फाइनल में गोल्ड मेडल जीता। यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि थी, बल्कि इसने देश भर की युवतियों को तीरंदाजी को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स में टीम गोल्ड

2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में डोला ने दीपिका कुमारी और बॉम्बैला देवी के साथ मिलकर महिला रिकर्व टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को पराजित किया। यह जीत भारतीय महिला तीरंदाजी के लिए एक सामूहिक उत्कर्ष का प्रतीक बनी।

सम्मान और विरासत

तीरंदाजी में अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने डोला को 2005 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। डोला बनर्जी की विरासत केवल पदकों तक सीमित नहीं है — उन्होंने भारत में महिला तीरंदाजी की एक पूरी पीढ़ी को दिशा दी और यह साबित किया कि लैंगिक बाधाएँ संकल्प के सामने टिक नहीं सकतीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत उपेक्षा के बावजूद आगे बढ़ने की है — उस दौर में जब महिला तीरंदाजी के लिए न पर्याप्त बुनियादी ढाँचा था, न मीडिया कवरेज। उनके 2004 ओलंपिक क्वालीफिकेशन ने भारतीय तीरंदाजी संघ को महिला वर्ग में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जिसकी परिणति बाद में दीपिका कुमारी जैसी खिलाड़ियों के उभार में दिखी। यह सिलसिला बताता है कि एक अग्रदूत की उपलब्धि किस तरह पूरी पीढ़ी की दिशा बदल देती है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोला बनर्जी कौन हैं और वे क्यों प्रसिद्ध हैं?
डोला बनर्जी भारत की पहली महिला तीरंदाज हैं जिन्होंने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक, 2007 आर्चरी विश्व कप गोल्ड और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स टीम गोल्ड सहित कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं।
डोला बनर्जी ने तीरंदाजी कब और कहाँ शुरू की?
डोला ने 8 वर्ष की आयु में पश्चिम बंगाल के बारानगर में तीरंदाजी शुरू की। उनके माता-पिता ने उनका दाखिला बारानगर तीरंदाजी क्लब में कराया, जहाँ उन्होंने इस खेल की बारीकियाँ सीखीं।
डोला बनर्जी का 2007 आर्चरी विश्व कप में क्या प्रदर्शन रहा?
2007 में दुबई के मेदिनात एम्फीथिएटर में आयोजित आर्चरी विश्व कप के फाइनल में डोला ने गोल्ड मेडल जीता। यह उनके करियर की सर्वोच्च व्यक्तिगत उपलब्धि मानी जाती है।
2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में डोला बनर्जी का योगदान क्या रहा?
2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में डोला ने दीपिका कुमारी और बॉम्बैला देवी के साथ मिलकर महिला रिकर्व टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को हराया था।
डोला बनर्जी को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने डोला बनर्जी को तीरंदाजी में उनके अतुलनीय योगदान के लिए 2005 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
राष्ट्र प्रेस
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