दीपिका कुमारी: चार ओलंपिक में भाग लेने वाली भारत की एकमात्र तीरंदाज, 2028 में पदक का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तीरंदाजी की सबसे चमकदार पहचान दीपिका कुमारी ने वह मुकाम हासिल किया है जो देश में आज तक किसी अन्य तीरंदाज को नसीब नहीं हुआ — चार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व। झारखंड की इस बेटी की यात्रा बांस के धनुष से शुरू होकर विश्व रैंकिंग की शीर्ष पायदान तक पहुँची है, और अब उनकी नज़र 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक में ओलंपिक पदक जीतने पर टिकी है।
संघर्ष से शुरू हुई कहानी
13 जून 1994 को रांची, झारखंड में जन्मी दीपिका का बचपन आर्थिक कठिनाइयों के साये में बीता। उनके पिता ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का गुज़ारा करते थे, और तीरंदाजी जैसे महँगे खेल के उपकरण खरीदना परिवार की पहुँच से बाहर था। बचपन में दीपिका बांस से बने अस्थायी धनुष-बाण से ही निशाना साधती थीं।
उनकी प्रेरणा बनीं उनकी कजिन बहन विद्या कुमारी, जो टाटा आर्चरी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही थीं। विद्या को देखकर ही दीपिका के मन में तीरंदाज बनने की चाह जगी। बाद में उन्हें भी टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश मिला, जहाँ उचित प्रशिक्षण और संसाधनों ने उनकी प्रतिभा को नई ऊँचाई दी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभरीं
2009 में दीपिका ने कैडेट विश्व चैंपियनशिप और युवा विश्व चैंपियनशिप जीतकर पहली बार वैश्विक स्तर पर अपनी धाक जमाई। इसके बाद 2012 में तुर्की में आयोजित विश्व कप के रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर वह दुनिया की नंबर-1 महिला रिकर्व तीरंदाज बन गईं — यह उपलब्धि उन्हें भारतीय खेल इतिहास में अमर करती है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण पदक, एशियाई खेलों का कांस्य पदक, विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक और कई विश्व कप पदक शामिल हैं। यह उपलब्धियाँ उन्हें भारतीय तीरंदाजी की सबसे सम्पन्न खिलाड़ी बनाती हैं।
चार ओलंपिक — एक अनोखा रिकॉर्ड
दीपिका चार ओलंपिक में भाग लेने वाली भारत की इकलौती तीरंदाज हैं। हालाँकि वह अब तक ओलंपिक पदक जीतने में सफल नहीं हो सकी हैं, लेकिन क्वार्टरफाइनल तक पहुँचकर उन्होंने बार-बार अपनी विश्वस्तरीय क्षमता का परिचय दिया है। यह ऐसे समय में और भी महत्त्वपूर्ण है जब भारतीय तीरंदाजी टीम ओलंपिक पदक के लिए दशकों से संघर्ष कर रही है।
सम्मान और व्यक्तिगत जीवन
तीरंदाजी में उत्कृष्ट योगदान के लिए दीपिका को 2012 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार और 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2020 में उन्होंने साथी तीरंदाज अतनु दास से विवाह किया। 2022 में वह माँ बनीं और उन्होंने अपनी बेटी का नाम वेदिका रखा।
आगे क्या
मातृत्व के बाद मैदान में वापसी कर चुकीं दीपिका फिलहाल तीरंदाजी में पूरी तरह सक्रिय हैं। उनका स्पष्ट लक्ष्य 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। गौरतलब है कि यह उनका पाँचवाँ ओलंपिक होगा, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।