गौतम गंभीर ने दिल्ली हाईकोर्ट में एआई डीपफेक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की

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गौतम गंभीर ने दिल्ली हाईकोर्ट में एआई डीपफेक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की

सारांश

गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एआई द्वारा उत्पन्न डीपफेक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल होने पर उन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • गौतम गंभीर ने एआई के गलत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है।
  • उन्होंने 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है।
  • सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
  • यह मुकदमा कई प्रमुख टेक कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ है।
  • गौतम गंभीर ने अपनी पहचान की सुरक्षा की मांग की है।

नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक सिविल केस दाखिल किया है, जिसमें डिजिटल नकल, एआई द्वारा बने डीपफेक और उनकी आवाज एवं चेहरे के बिना अनुमति के इस्तेमाल के खिलाफ अपने व्यक्तित्व अधिकारों की पूरी सुरक्षा की मांग की गई है।

गौतम गंभीर की कानूनी टीम ने देखा कि 2025 के अंत से इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और फेसबुक पर नकली डिजिटल सामग्री में तेजी से वृद्धि हुई है। कई खातों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस-स्वैपिंग, और वॉइस-क्लोनिंग तकनीक का उपयोग किया, जिसमें गंभीर को ऐसे बयान देते हुए गलत तरीके से दिखाया गया जो उन्होंने कभी नहीं दिए। इसमें एक नकली इस्तीफे की घोषणा भी शामिल थी, जिसे 29 लाख से अधिक बार देखा गया। एक नकली क्लिप जिसमें उन्हें सीनियर क्रिकेटरों के विश्व कप में भाग लेने के बारे में टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था, इसे 17 लाख से अधिक बार देखा गया।

सोशल मीडिया के अलावा, बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिना किसी इजाजत के उनके नाम और तस्वीर वाले पोस्टर के माध्यम से सामान बेचने में लगे हुए थे।

यह मुकदमा 16 प्रतिवादियों के खिलाफ दायर किया गया है। इसमें कुछ सोशल मीडिया खातों जैसे जैनकी फ्रेम्स, भूपेंद्र पेंटोला, लीजेंड्स रेवोल्यूशन, आदि शामिल हैं। इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों में ऐमेजॉन और फ्लिपकार्ट का नाम है। वहीं टेक कंपनियों में मेटा प्लेटफॉर्म, एक्स, गूगल, यूट्यूब आदि शामिल हैं। साथ ही आईटी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी शामिल किया गया है, जो किसी भी कोर्ट ऑर्डर को लागू करने में मदद के लिए प्रोफार्मा पार्टी हैं।

यह मुकदमा कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क्स एक्ट 1999, और कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट 2015 के तहत दायर किया गया है, और दिल्ली हाई कोर्ट के मजबूत न्यायशास्त्र का उपयोग करता है—जिसमें अमिताभ बच्चन बनाम रजत नागी, अनिल कपूर बनाम सिंपली लाइफ इंडिया, और हाल ही में सुनील गावस्कर बनाम क्रिकेट जैसे ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं, जो पर्सनैलिटी राइट्स को एआई से होने वाले शोषण के खिलाफ लागू करते हैं।

गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना, सभी अकाउंट्स को हटाने, स्थायी रोक लगाने और सभी उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने की मांग की है। उन्होंने भविष्य में अपने नाम, चेहरे और आवाज का इस्तेमाल नहीं किए जाने की मांग भी कोर्ट से की है। इस मामले में उन्होंने कोर्ट से जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

गौतम गंभीर ने कहा, "मेरी पहचान, मेरा नाम, मेरा चेहरा, मेरी आवाज को गुमनाम अकाउंट्स ने गलत जानकारी फैलाने और मेरे खर्च पर राजस्व कमाने के लिए हथियार बनाया है। यह किसी व्यक्तिगत चोट का मामला नहीं है। यह कानून, सम्मान और उस सुरक्षा का मामला है जिसका हर सार्वजनिक हस्ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में हकदार है।"

Point of View

बल्कि यह उन सभी सार्वजनिक हस्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है, जो अपनी पहचान के हनन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

गौतम गंभीर ने किस मामले में कोर्ट में शिकायत की?
गौतम गंभीर ने डिजिटल नकल और एआई द्वारा बने डीपफेक के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में शिकायत की है।
गौतम गंभीर ने कितने हर्जाने की मांग की है?
गौतम गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है।
इस मुकदमे में कौन-कौन से प्लेटफॉर्म शामिल हैं?
इस मुकदमे में इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब, फ्लिपकार्ट और ऐमेजॉन जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
गौतम गंभीर ने कोर्ट से क्या मांग की है?
गौतम गंभीर ने सभी नकली अकाउंट्स को हटाने और उनके नाम, चेहरा और आवाज का भविष्य में इस्तेमाल न किए जाने की मांग की है।
यह मुकदमा किस कानून के तहत दायर किया गया है?
यह मुकदमा कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क्स एक्ट 1999, और कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट 2015 के तहत दायर किया गया है।
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