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गुरु हनुमान: भारतीय कुश्ती को दी नई दिशा, सुशील कुमार और रवि दहिया के गुरु सतपाल का योगदान

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गुरु हनुमान: भारतीय कुश्ती को दी नई दिशा, सुशील कुमार और रवि दहिया के गुरु सतपाल का योगदान

सारांश

गुरु हनुमान, जिन्हें विजय पाल यादव के नाम से भी जाना जाता है, ने भारतीय कुश्ती को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाला। उनके शिष्य सुशील कुमार और रवि दहिया ने ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया। जानें उनकी कुश्ती यात्रा और योगदान के बारे में।

मुख्य बातें

गुरु हनुमान ने भारतीय कुश्ती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई।
उनके शिष्यों ने ओलंपिक में पदक जीते हैं।
गुरु हनुमान अखाड़ा भारत का सबसे पुराना कुश्ती स्कूल है।
उन्होंने पारंपरिक कुश्ती को आधुनिक रूप में ढाला।
गुरु हनुमान को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले।

नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कुश्ती भारत का एक प्राचीन खेल है। समय-समय पर ऐसे अद्भुत पहलवानों का उदय हुआ है जिन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से भारतीय कुश्ती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। गुरु हनुमान के नाम से प्रसिद्ध विजय पाल यादव का नाम भी इन महान पहलवानों में विशेष रूप से लिया जाता है।

विजय पाल यादव का जन्म 15 मार्च 1901 को चिड़ावा, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने औपचारिक शिक्षा नहीं ली, लेकिन बहुत छोटी उम्र से ही कुश्ती के प्रति उनका जुनून था। वे कुश्ती में कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे और इसलिए कम उम्र से ही अखाड़े में प्रतिस्पर्धा करने लगे। 1919 में, वे सब्जी मूंदी में बिड़ला मिल्स के पास एक दुकान खोलने के लिए दिल्ली आए, लेकिन उनका ध्यान पहलवानी में ही था। उन्होंने दुकानदारी की बजाय पहलवानी को अपना समय दिया और तेजी से क्षेत्र में प्रसिद्ध हो गए।

एक कुश्ती कोच और पहलवान के रूप में, गुरु हनुमान ने पारंपरिक भारतीय कुश्ती के शैली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित किया और उसे आधुनिक रूप दिया। उन्होंने भारत के लगभग सभी प्रमुख फ्रीस्टाइल अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को प्रशिक्षित किया। उनके शिष्यों में सुदेश कुमार और प्रेम नाथ ने 1958 में कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीते। सतपाल और करतार सिंह ने क्रमशः 1982 और 1986 में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक प्राप्त किए। उनके आठ शिष्यों को भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान अर्जुन अवॉर्ड भी मिल चुका है। गुरु हनुमान शाकाहारी आहार को प्राथमिकता देते थे।

उनका निधन 24 मई 1999 को हरिद्वार जाते समय मेरठ के पास एक कार दुर्घटना में हुआ। उन्हें 1987 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार और 1983 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। 9 अगस्त 2003 को, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदान लाल खुराना ने नई दिल्ली के कल्याण विहार स्पोर्ट्स स्टेडियम में गुरु हनुमान की एक मूर्ति का अनावरण किया।

भारतीय उद्योगपति के. के. बिड़ला ने उन्हें मलकागंज, सब्जी मंडी (पुरानी दिल्ली) में एक अखाड़ा खोलने के लिए जमीन प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप 1925 के आसपास 'बिड़ला मिल्स व्यायामशाला' की स्थापना हुई। यह बाद में गुरु हनुमान अखाड़ा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। गुरु हनुमान अखाड़ा पारंपरिक हिंदी बोली में पहलवानों का प्रशिक्षण केंद्र है।

1925 में नॉर्थ दिल्ली के रोशनआरा बाग के पास शक्ति नगर में शुरू हुआ यह अखाड़ा भारत का सबसे पुराना मौजूदा कुश्ती स्कूल है। इस अखाड़े से दारा सिंह, हंस राम, गुरु सतपाल, उद्दल सिंह, सुभाष वर्मा, वीरेंद्र सिंह, सुशील कुमार, योगेंद्र कुमार, विशाल त्रिखा, अनुज चौधरी, राजीव तोमर, अनिल मान, सुजीत मान, चांद खत्री, नवीन, और राकेश गूंगा जैसे कई महान पहलवान निकले हैं। यह जगह पहलवानों के लिए शुभ मानी जाती है। 2014 में, कुश्ती अकादमी को भारत सरकार ने 2014 के राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चुना था।

गुरु हनुमान के शिष्य सतपाल सिंह मौजूदा समय के प्रमुख कुश्ती कोच हैं। उनके शिष्यों में सुशील कुमार और रवि दहिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिन्होंने ओलंपिक में देश के लिए पदक जीते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय कुश्ती के क्षेत्र में एक अद्वितीय व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। उनका समर्पण और प्रशिक्षण पद्धति ने न केवल कुश्ती को नई दिशा दी, बल्कि कई युवा पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। यह उनके योगदान को सम्मान देने का समय है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु हनुमान का असली नाम क्या था?
गुरु हनुमान का असली नाम विजय पाल यादव था।
गुरु हनुमान ने कब और कहाँ जन्म लिया?
उनका जन्म 15 मार्च 1901 को चिड़ावा, राजस्थान में हुआ था।
गुरु हनुमान ने किन प्रमुख पहलवानों को प्रशिक्षित किया?
उन्होंने सुशील कुमार, रवि दहिया, और कई अन्य प्रमुख पहलवानों को प्रशिक्षित किया।
गुरु हनुमान को किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया?
उन्हें 1987 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और 1983 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
गुरु हनुमान अखाड़ा कहाँ स्थित है?
गुरु हनुमान अखाड़ा दिल्ली के कमला नगर में स्थित है।
राष्ट्र प्रेस
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