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एशियन गेम्स 2026: भारतीय बैडमिंटन टीम के ब्रॉन्ज पर कोच गुरु साई दत्त बोले — 'जश्न मनाएं, अफसोस नहीं'

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एशियन गेम्स 2026: भारतीय बैडमिंटन टीम के ब्रॉन्ज पर कोच गुरु साई दत्त बोले — 'जश्न मनाएं, अफसोस नहीं'

सारांश

चीन से 1-3 की हार के बाद भी भारतीय बैडमिंटन टीम ने ब्रॉन्ज के साथ एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार पोडियम पर जगह बनाई। कोच गुरु साई दत्त का संदेश साफ है — अफसोस नहीं, जश्न मनाओ। अब नजर व्यक्तिगत इवेंट्स पर है, जहां सात्विक-चिराग समेत कई खिलाड़ी मेडल के दावेदार हैं।

मुख्य बातें

भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीता — एशियन गेम्स में लगातार दूसरा पदक ।
सेमीफाइनल में भारत चीन से 1-3 से हारा; इससे पहले 2023 हांग्जो में सिल्वर जीता था।
कोच गुरु साई दत्त ने कहा — ब्रॉन्ज मेडल व्यक्तिगत इवेंट्स से पहले खिलाड़ियों को मोमेंटम और आत्मविश्वास देगा।
डबल्स खिलाड़ी हरिहरन अमसाकरुणन के लिए यह पहला एशियन गेम्स था; उन्होंने मेडल गोपीचंद और समर्थकों को समर्पित किया।
कोच ने व्यक्तिगत इवेंट्स में सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की डबल्स जोड़ी, पुरुष-महिला सिंगल्स में मेडल की उम्मीद जताई।

भारतीय बैडमिंटन टीम के कोच गुरु साई दत्त ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुष टीम के ब्रॉन्ज मेडल जीतने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए खिलाड़ियों और प्रशंसकों से सेमीफाइनल की हार का दुख भुलाकर इस सफलता का जश्न मनाने का आग्रह किया। उनका कहना है कि यह मेडल आगे होने वाले व्यक्तिगत इवेंट्स से पहले भारतीय शटलरों के लिए बेहद जरूरी आत्मविश्वास और मोमेंटम लेकर आया है।

मुख्य घटनाक्रम

भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम इचिनोमिया में खेले गए एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में मजबूत चीन के हाथों 1-3 से हार गई। हालांकि, टीम ने तीसरे-चौथे स्थान के मुकाबले में जीत दर्ज कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। यह भारत का एशियन गेम्स बैडमिंटन में लगातार दूसरा पदक है — इससे पहले टीम ने हांग्जो एशियन गेम्स 2023 में सिल्वर मेडल जीता था।

कोच की प्रतिक्रिया

कोच गुरु साई दत्त ने कहा, 'एक टीम के तौर पर यह मेडल हमारे लिए बहुत अहम है। आगे व्यक्तिगत इवेंट्स के लिए, यह मेडल खिलाड़ियों को मोमेंटम बनाए रखने और आत्मविश्वास देने में मदद करेगा।' उन्होंने जोड़ा, 'एशियन गेम्स में बैडमिंटन का स्तर ओलंपिक जैसा ही होता है। यहां मेडल जीतना हमेशा मुश्किल होता है, और लगातार ऐसा करना तारीफ के काबिल है।'

दत्त ने टीम के पिछले चार वर्षों के सफर की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने थॉमस कप जीता और दो क्रमिक एशियन गेम्स में पोडियम पर जगह बनाई। उन्होंने स्वीकार किया, 'हम चीन को हराने के बहुत करीब थे; शायद अलग हालात हमारी मदद करते। मगर टीम की कोशिश शानदार रही।'

टीम संरचना और व्यक्तिगत इवेंट की उम्मीदें

कोच ने टीम की संतुलित संरचना का उल्लेख किया — लक्ष्य सेन सीनियर नेतृत्व में, आयुष युवा ऊर्जा के साथ अच्छी फॉर्म में, अनुभवी जोड़ी सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी डबल्स में, और हरिहरन अमसाकरुणनअर्जुन भी टीम का हिस्सा। उन्होंने कहा कि बेंच पर एचएस प्रणॉय, किदांबी श्रीकांत और तरुण जैसे दिग्गज भी मौजूद हैं।

व्यक्तिगत इवेंट्स को लेकर दत्त आशावादी दिखे — 'मुझे लगता है कि सिंगल्स में हमारे पास बहुत अच्छा मौका है — पुरुष और महिला दोनों में। साथ ही सात्विक और चिराग के साथ डबल्स में भी, जो मौजूदा चैंपियन हैं। मुझे भरोसा है कि ये खिलाड़ी व्यक्तिगत इवेंट में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और शायद मेडल भी जीतेंगे।'

खिलाड़ियों की आवाज़

अपने पहले एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज जीतने वाले डबल्स खिलाड़ी हरिहरन अमसाकरुणन ने कहा, 'मैं एशियन गेम्स की टीम का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। उस दिन हम पूरी तरह से खेल नहीं पाए थे, हालांकि हमने अपनी पूरी कोशिश की। हमने ब्रॉन्ज मेडल जीता।' उन्होंने यह मेडल अपने समर्थकों और मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद को समर्पित किया।

पुरुष टीम के खिलाड़ी थारुन मन्नेपल्ली ने कहा, 'ब्रॉन्ज मेडल जीतना मेरे लिए बहुत खास पल है। एक टीम के तौर पर भारत के लिए मेडल जीतना बहुत मायने रखता है। हम साथ मिलकर संघर्ष किए और टीम इवेंट में मेडल हासिल किया।'

आगे का रोडमैप

गौरतलब है कि एशियन गेम्स 2026 में अब व्यक्तिगत इवेंट आने हैं, जहां भारत की नजर एकाधिक पदकों पर है। सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी मौजूदा एशियन गेम्स डबल्स चैंपियन के रूप में अपना खिताब बचाने उतरेंगे। टीम के इस मनोबल के साथ, भारतीय बैडमिंटन का एशियन गेम्स अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या टीम चीन और इंडोनेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल की दीवार तोड़ पाएगी। थॉमस कप जीत के बाद भी एशियाई सर्किट में शीर्ष दो में जगह बनाना मुश्किल बना हुआ है। कोच का 'जश्न मनाएं' वाला संदेश मनोवैज्ञानिक रूप से सही है, पर यह उस खाई को नहीं भरता जो भारत और चीन के बीच तकनीकी गहराई में दिखती है। व्यक्तिगत इवेंट्स असली कसौटी होंगे — सात्विक-चिराग की जोड़ी अगर डबल्स खिताब बचाती है, तो यह ब्रॉन्ज सिर्फ सांत्वना नहीं, बल्कि भारतीय बैडमिंटन के नए युग का संकेत बनेगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय बैडमिंटन पुरुष टीम को कौन सा मेडल मिला?
भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीता। सेमीफाइनल में चीन से 1-3 से हारने के बाद टीम ने तीसरे स्थान का मुकाबला जीतकर यह पदक हासिल किया।
भारत ने एशियन गेम्स बैडमिंटन में पिछली बार कौन सा मेडल जीता था?
भारत ने 2023 के हांग्जो एशियन गेम्स में पुरुष बैडमिंटन टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था। 2026 का ब्रॉन्ज एशियन गेम्स में लगातार दूसरा पदक है।
कोच गुरु साई दत्त ने ब्रॉन्ज मेडल के बारे में क्या कहा?
कोच गुरु साई दत्त ने कहा कि खिलाड़ियों और प्रशंसकों को सेमीफाइनल की हार का अफसोस करने के बजाय ब्रॉन्ज मेडल का जश्न मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पदक व्यक्तिगत इवेंट्स से पहले खिलाड़ियों को जरूरी आत्मविश्वास और मोमेंटम देगा।
भारत के व्यक्तिगत बैडमिंटन इवेंट्स में मेडल की क्या उम्मीद है?
कोच गुरु साई दत्त ने पुरुष और महिला सिंगल्स के साथ-साथ सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की डबल्स जोड़ी से मेडल की उम्मीद जताई है। सात्विक-चिराग मौजूदा एशियन गेम्स डबल्स चैंपियन हैं।
हरिहरन अमसाकरुणन के लिए यह एशियन गेम्स क्यों खास था?
यह हरिहरन अमसाकरुणन का पहला एशियन गेम्स था और उन्होंने अपने पहले ही एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने यह पदक कोच पुलेला गोपीचंद, अपने परिवार, पुराने कोचों और समर्थकों को समर्पित किया।
राष्ट्र प्रेस
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