एशियन गेम्स 2026: भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने जीता ब्रॉन्ज मेडल, लगातार दूसरे एडिशन में पोडियम पर भारत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया — और यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह टीम इवेंट में भारत का लगातार दूसरा एशियन गेम्स पदक है। 24 सितंबर 2026 को इचिनोमिया में हुए इस मुकाबले के बाद खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने खुशी जताई और इस जीत को टीम की एकजुटता और निरंतरता का प्रमाण बताया।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय टीम ने एशियन गेम्स 2023 में सिल्वर मेडल जीता था — वह टीम इवेंट में पहली बार एशियन गेम्स पदक था। इस बार 2026 एडिशन में कांस्य पदक हासिल करके टीम ने साबित किया कि यह उपलब्धि एकबारगी नहीं थी। टीम के सदस्यों ने बताया कि एशियन गेम्स में वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसा ही स्तर होता है, क्योंकि एशिया की सभी शीर्ष बैडमिंटन शक्तियाँ यहाँ हिस्सा लेती हैं।
खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
कांस्य पदक विजेता टीम के सदस्य हरिहरन अम्साकारुनन ने कहा, 'मैं एशियन गेम्स की टीम का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। यह मेरा पहला एशियन गेम्स है। हमने अपनी पूरी कोशिश की और ब्रॉन्ज जीता। मैं अपने देश के लिए यह जीतकर बहुत खुश हूं।'
स्टार शटलर एचएस प्रणय ने कहा, 'दो एशियन गेम्स में लगातार दो मेडल जीतना कभी आसान नहीं होता। पिछली बार 2023 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतना बहुत बड़ी बात थी। एक बार फिर उस पोडियम पर पहुंचना इस टीम की निरंतरता को दिखाता है। एशियन गेम्स सच में एक मुश्किल इवेंट है — यह लगभग वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसा है।'
खिलाड़ी थारुन मन्नेपल्ली ने कहा, 'ब्रॉन्ज मेडल जीतना मेरे लिए बहुत खास पल है। हम एक टीम के तौर पर एक साथ खड़े रहे, एक साथ लड़े और टीम इवेंट में मेडल हासिल किया। मैं अपनी टीम के साथियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ को धन्यवाद देता हूं।'
कोच की नज़र में इस जीत की अहमियत
भारतीय बैडमिंटन कोच आर. एम. वी. गुरुसाईदत्त ने इस पदक को टीम के लिए बेहद ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा, 'बैडमिंटन में एशियन गेम्स ओलंपिक्स जितने ही प्रतिष्ठित हैं। इसे लगातार करना सच में ऐतिहासिक है।' उन्होंने यह भी बताया कि इस बार टीम चीन को हराने के बेहद करीब आ गई थी — जो अपने आप में भारतीय बैडमिंटन की बढ़ती ताकत का संकेत है।
गुरुसाईदत्त ने पिछले चार वर्षों के प्रदर्शन की सराहना की — जिसमें थॉमस कप जीतना और एशियन गेम्स में लगातार पदक शामिल हैं — और कहा कि यह पदक व्यक्तिगत इवेंट्स में खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ाएगा।
भारतीय बैडमिंटन का बड़ा संदर्भ
गौरतलब है कि भारत ने 2022 थॉमस कप जीतकर एशियाई बैडमिंटन में अपनी नई पहचान बनाई थी। एशियन गेम्स में 2023 का सिल्वर और अब 2026 का ब्रॉन्ज — यह क्रम दिखाता है कि भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम अब इस महाद्वीप पर एक स्थायी ताकत के रूप में उभर रही है। एशिया में चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और जापान जैसी परंपरागत शक्तियों के बीच यह उपस्थिति दर्ज कराना असाधारण उपलब्धि है।
आगे की राह
टीम इवेंट के बाद खिलाड़ियों का ध्यान अब व्यक्तिगत स्पर्धाओं पर होगा। कोच गुरुसाईदत्त को उम्मीद है कि टीम पदक से मिले मोमेंटम को व्यक्तिगत इवेंट्स में भी भुना सकेगी। प्रणय ने भी संकेत दिया कि टीम का लक्ष्य आगे भी पदक जीतते रहना है — खासकर टीम इवेंट्स में।