पंजाब एफसी का जापान में 5-0 का धमाका, बेंगलुरु एफसी ने 3-2 से जीत दर्ज की; एफसी गोवा 1-0 से हारी
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब एफसी, बेंगलुरु एफसी और एफसी गोवा ने 14 जुलाई 2026 को जापान के कुराते में जे-लीग क्लबों के खिलाफ डेवलपमेंटल मैच खेले। पंजाब और बेंगलुरु ने जीत दर्ज की, जबकि गोवा एकमात्र गोल से पराजित हुई — कुल मिलाकर यह दिन भारतीय फुटबॉल के लिए उत्साहजनक रहा।
पंजाब एफसी का दबदबा: 5-0 की करारी जीत
दिन का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन पंजाब एफसी ने किया, जिसने अविस्पा फुकुओका को 5-0 से ध्वस्त कर दिया। सिंगमायुम शमी ने तीसरे और 28वें मिनट में दो त्वरित गोल दागकर मैच की नींव रखी। ओमांग डोडम ने 42वें मिनट में और नगारिन शाइजा ने 55वें मिनट में बढ़त को विस्तार दिया। विशाल यादव ने 90+2वें मिनट में स्टॉपेज टाइम में पाँचवाँ गोल करके जीत पर मुहर लगाई।
यह प्रदर्शन भारतीय डेवलपमेंटल फुटबॉल के लिए उल्लेखनीय है, क्योंकि जे-लीग क्लब अपनी संगठित रक्षापंक्ति और तकनीकी दक्षता के लिए जाने जाते हैं।
बेंगलुरु एफसी की कड़ी वापसी: 3-2 से जीत
बेंगलुरु एफसी के लिए राह आसान नहीं रही। गिरावांज किताक्युशु के र्युनोसुके इमाई ने 40वें मिनट में गोल करके जापानी टीम को बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ में बेंगलुरु ने जबरदस्त वापसी की — रक्षित प्रिया अनिल ने 61वें मिनट में बराबरी का गोल दागा।
एक दुर्भाग्यपूर्ण 'ओन गोल' से जापानी टीम ने फिर बढ़त हासिल की, लेकिन सेर्टो वोर्नेइलेन कॉम ने 75वें मिनट में गोल कर बेंगलुरु को आगे कर दिया। मोहम्मद अरबाश के 90वें मिनट के गोल से जापानी टीम ने बराबरी की कोशिश की, लेकिन बेंगलुरु के मज़बूत डिफेंस ने अंतिम मिनटों में जीत सुरक्षित कर ली — अंतिम स्कोर 3-2 रहा।
एफसी गोवा की निराशा: 1-0 से हार
एफसी गोवा को सागन तोसु के खिलाफ 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। जेनर्यू ओनो ने मात्र छठे मिनट में एकमात्र गोल दागकर जापानी टीम को बढ़त दिला दी। दूसरे हाफ में गोवा ने गेंद पर अधिक कब्जा जमाया और कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन सागन तोसु की अनुशासित रक्षापंक्ति को भेद नहीं पाई।
भारतीय फुटबॉल के लिए क्या मायने रखता है यह दौरा
यह जापान दौरा भारतीय क्लबों के लिए उच्च-स्तरीय प्रतिस्पर्धा का एक दुर्लभ अवसर है। जे-लीग क्लब एशियाई फुटबॉल में तकनीकी रूप से सबसे उन्नत माने जाते हैं। पंजाब एफसी का 5-0 का परिणाम और बेंगलुरु एफसी की जुझारू वापसी दोनों ही भारतीय डेवलपमेंटल फुटबॉल की बढ़ती गुणवत्ता के संकेत हैं। गौरतलब है कि ये मैच आधिकारिक प्रतियोगिता के नहीं, बल्कि डेवलपमेंटल प्रकृति के हैं, इसलिए परिणामों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
आने वाले मैचों में भारतीय टीमें इस अनुभव को आईएसएल सीज़न की तैयारी में काम लाना चाहेंगी।