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क्या ए.जी. कृपाल सिंह अपने पहले विकेट के लिए सबसे ज्यादा गेंद फेंकने वाले क्रिकेटर हैं?

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क्या ए.जी. कृपाल सिंह अपने पहले विकेट के लिए सबसे ज्यादा गेंद फेंकने वाले क्रिकेटर हैं?

सारांश

क्या ए. जी. कृपाल सिंह अपने पहले विकेट के लिए सबसे ज्यादा गेंद फेंकने वाले क्रिकेटर हैं? जानें उनके अद्भुत करियर और परिवार की क्रिकेट परंपरा के बारे में।

मुख्य बातें

कृपाल सिंह ने 9 पारियों में 588 गेंदें फेंककर पहला विकेट लिया।
उन्होंने 1954-55 में रणजी ट्रॉफी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कृपाल का परिवार क्रिकेट के लिए जाना जाता है।
उनका एकमात्र टेस्ट शतक 100 रन था।
उन्होंने 96 प्रथम श्रेणी मैचों में 4,939 रन बनाए।

नई दिल्ली, 5 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिनका परिवार इस खेल से गहरा संबंध रखता है, जिनमें से एक प्रमुख नाम ए. जी. कृपाल सिंह का है।

6 अगस्त 1933 को मद्रास में जन्मे ए. जी. कृपाल सिंह का पूरा नाम अमृतसर गोविंदसिंह कृपाल सिंह था। वे एक प्रसिद्ध क्रिकेट परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता ए. जी. राम सिंह एक उत्कृष्ट क्रिकेटर थे लेकिन उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने का अवसर नहीं मिला। उनके भाई मिल्खा सिंह एक टेस्ट क्रिकेटर थे जिन्होंने भारत के लिए चार टेस्ट मैच खेले। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सक्रिय रहे हैं। ए. जी. कृपाल सिंह एक आक्रामक बल्लेबाज और उपयोगी ऑफ स्पिन गेंदबाज थे।

ए. जी. कृपाल सिंह ने 1954-55 में मद्रास को रणजी ट्रॉफी जिताने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने उस सीजन में 636 रन बनाए और 13 विकेट लिए। सेमीफाइनल में उन्होंने बंगाल के खिलाफ 98 और 97 रन की पारी खेली, जबकि फाइनल में 75 और 91 रन बनाकर 7 विकेट लिए। इस अद्भुत प्रदर्शन के चलते मद्रास ने रणजी ट्रॉफी का खिताब हासिल किया।

इस सफलता के आधार पर उन्हें 1955 में न्यूजीलैंड के खिलाफ डेब्यू का अवसर मिला। उनके डेब्यू मैच में उन्होंने नाबाद 100 रन की पारी खेली, जो उनके टेस्ट करियर का एकमात्र शतक था। 1958-59 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई 53 रन की पारी भी उनके करियर के महत्वपूर्ण क्षणों में से एक थी।

कृपाल ने 1959 में इंग्लैंड का दौरा किया, जहां उन्होंने लंकाशायर के खिलाफ 178 रन की पारी खेली। उन्होंने भारत के लिए एकमात्र टेस्ट में 41 रन का योगदान दिया लेकिन उंगली की चोट के कारण टीम से बाहर हो गए। उन्होंने 1961-62 में तीन और 1963-64 में दो टेस्ट मैच खेले, सभी इंग्लैंड के खिलाफ थे।

कृपाल को टेस्ट करियर में अपना पहला विकेट 9 पारियों और 10 टेस्ट मैचों में 588 गेंदें फेंकने के बाद मिला, और वे ऐसे पहले गेंदबाज हैं जिन्होंने अपने पहले विकेट के लिए इतनी गेंदें फेंकी।

1955 से 1964 के बीच कृपाल ने 14 टेस्ट मैचों में 1 शतक और 2 अर्धशतक लगाते हुए 422 रन बनाए और 10 विकेट लिए।

घरेलू क्रिकेट में उन्होंने 96 प्रथम श्रेणी मैचों में 10 शतक और 24 अर्धशतक लगाकर 4,939 रन बनाए और 177 विकेट लिए। उनका सर्वोच्च स्कोर 208 रन था।

कृपाल सिंह का 22 जुलाई 1987 को 53 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनकी मृत्यु के समय वे राष्ट्रीय चयनकर्ता थे और अगस्त 1987 में चयन समिति के अध्यक्ष बनने वाले थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

ए. जी. कृपाल सिंह का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कैसे परिवार की क्रिकेट परंपरा को आगे बढ़ाया जा सकता है। उनका करियर और योगदान आज भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ए. जी. कृपाल सिंह का जन्म कब हुआ?
6 अगस्त 1933 को मद्रास में ए. जी. कृपाल सिंह का जन्म हुआ।
कृपाल सिंह ने अपने टेस्ट करियर में कितने विकेट लिए?
कृपाल सिंह ने 10 टेस्ट मैचों में 10 विकेट लिए।
कृपाल सिंह का सर्वोच्च स्कोर क्या था?
कृपाल सिंह का सर्वोच्च स्कोर 208 रन था।
कृपाल सिंह का निधन कब हुआ?
कृपाल सिंह का निधन 22 जुलाई 1987 को हुआ।
कृपाल सिंह का परिवार क्रिकेट से कैसे जुड़ा था?
कृपाल सिंह का परिवार क्रिकेट में गहरा जुड़ाव रखता था, जिसमें उनके पिता और भाई भी शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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