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लद्दाख मैराथन 2026: निखिल सिंह ने 2:44:40 में जीती 42 किमी रेस, 8,000 से अधिक धावकों में रहे अव्वल

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लद्दाख मैराथन 2026: निखिल सिंह ने 2:44:40 में जीती 42 किमी रेस, 8,000 से अधिक धावकों में रहे अव्वल

सारांश

समुद्र तल से 3,200 मीटर की ऊँचाई, 8,000 से अधिक प्रतिभागी और 42 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता — फिर भी मुंबई के निखिल सिंह ने 2:44:40 में लद्दाख मैराथन जीत ली। स्पीति घाटी के बाद यह उनकी दूसरी ऊँचाई वाली मैराथन जीत है।

मुख्य बातें

निखिल सिंह ने 13 सितंबर 2026 को लद्दाख मैराथन की 42 किमी रेस 2 घंटे 44 मिनट 40 सेकंड में जीती।
मैराथन में भारत और विदेशों के 8,000 से अधिक धावकों ने भाग लिया।
लेह की ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 3,200 मीटर है; निखिल ने अनुकूलन के लिए रेस से 9-10 दिन पहले पहुँचकर तैयारी की।
निखिल का निजी सर्वश्रेष्ठ 2 घंटे 22 मिनट है; यह ऊँचाई वाले स्थान पर उनका दूसरा मैराथन था — पहला स्पीति घाटी में था।
निखिल मुंबई में प्रशिक्षण लेते हैं और भारत की प्रमुख मैराथन रेसों में भी हिस्सा ले चुके हैं।

लद्दाख मैराथन 2026 में मुंबई के धावक निखिल सिंह ने 42 किलोमीटर की फुल मैराथन 2 घंटे 44 मिनट और 40 सेकंड में पूरी कर पहला स्थान हासिल किया। 13 सितंबर 2026 को लेह में आयोजित इस प्रतिष्ठित मैराथन में भारत और विदेशों के 8,000 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया।

मुख्य प्रदर्शन और समय

निखिल सिंह का यह लद्दाख में पहला मैराथन अनुभव था। उन्होंने रेस जीतने के बाद बताया कि यह उनका किसी ऊँचाई वाले स्थान पर दूसरा मैराथन था — इससे पहले वे स्पीति घाटी में भी मैराथन में भाग ले चुके हैं। उनका निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2 घंटे 22 मिनट का है, जो उन्होंने समतल मैदानी रेसों में हासिल किया था।

निखिल ने कहा, 'मेरा पहला अनुभव काफी अच्छा रहा है और यह हमेशा यादगार रहेगा। मैंने फुल मैराथन ली और इसको करीब 2 घंटे 44 मिनट में पूरा किया। रास्ते और ऊंचाई को देखते हुए मेरा समय काफी अच्छा रहा।'

ऊँचाई और मार्ग की चुनौतियाँ

लेह समुद्र तल से लगभग 3,200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो इस मैराथन को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण दौड़ों में से एक बनाती है। निखिल और उनकी टीम रेस से करीब 9-10 दिन पहले लेह पहुँची थी और शुरुआती 4-5 दिनों में ऊँचाई के कारण शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि रेस का मार्ग विशेष रूप से शुरुआत और अंत में कठिन था। 'करीब छह किलोमीटर शुरुआत में ढलान था, लेकिन उसके बाद ज्यादा कुछ नहीं था। ऊंचाई जो थी वो काफी दिक्कत देने वाली थी।' यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब ऊँचाई वाली मैराथन में सांस लेना स्वयं में एक बड़ी शारीरिक परीक्षा होती है।

रोड ट्रिप और लद्दाख का अनुभव

निखिल और उनकी टीम सड़क मार्ग से लेह पहुँची, जिससे शरीर को धीरे-धीरे ऊँचाई के अनुकूल होने का समय मिला। उन्होंने कहा, 'हम सड़क मार्ग से आए, इसलिए रास्ते के नजारे वाकई बहुत खूबसूरत थे।' दौड़ के दौरान भी लद्दाख के प्राकृतिक दृश्यों ने धावकों को प्रेरणा दी — निखिल के अनुसार उन नज़ारों को 'शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।'

आम जनता और खेल जगत पर असर

लद्दाख मैराथन प्रतिवर्ष भारत के सबसे ऊँचे और सबसे बड़े दौड़ आयोजनों में से एक के रूप में पहचानी जाती है। 8,000 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि हिमालयी मैराथन का आकर्षण देश-विदेश के धावकों में तेज़ी से बढ़ रहा है। गौरतलब है कि निखिल भारत की प्रमुख मैदानी रेसों में भी हिस्सा ले चुके हैं, और यह जीत ऊँचाई पर उनकी बढ़ती विशेषज्ञता को रेखांकित करती है।

आगे की राह

इस जीत के साथ निखिल सिंह की नज़र अब अपने निजी सर्वश्रेष्ठ 2 घंटे 22 मिनट को और बेहतर करने पर होगी। ऊँचाई वाली रेसों में उनका बढ़ता अनुभव — स्पीति घाटी के बाद अब लद्दाख — उन्हें इस विशेष श्रेणी के मैराथन धावकों की कतार में खड़ा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इन विशेष रेसों के लिए संस्थागत प्रशिक्षण ढाँचा उतनी तेज़ी से विकसित हो रहा है। 8,000 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति यह भी बताती है कि लद्दाख अब केवल पर्यटन का नहीं, बल्कि खेल पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बन रहा है — जिसे नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढाँचे की ज़रूरत है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लद्दाख मैराथन 2026 किसने जीती?
मुंबई के धावक निखिल सिंह ने 13 सितंबर 2026 को लद्दाख मैराथन की 42 किलोमीटर की फुल रेस 2 घंटे 44 मिनट और 40 सेकंड में पूरी कर पहला स्थान हासिल किया।
लद्दाख मैराथन 2026 में कितने धावकों ने हिस्सा लिया?
इस वर्ष लद्दाख मैराथन में भारत और विदेशों के 8,000 से अधिक धावकों ने भाग लिया, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी उच्च-ऊँचाई मैराथन में से एक बन गई।
निखिल सिंह का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ मैराथन समय क्या है?
निखिल सिंह का निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2 घंटे 22 मिनट का है, जो उन्होंने मैदानी रेसों में हासिल किया था। लद्दाख की 3,200 मीटर ऊँचाई को देखते हुए उनका 2:44:40 का समय उल्लेखनीय माना जा रहा है।
ऊँचाई पर मैराथन दौड़ना इतना कठिन क्यों होता है?
समुद्र तल से 3,200 मीटर की ऊँचाई पर ऑक्सीजन का स्तर कम होता है, जिससे शरीर को सामान्य से अधिक परिश्रम करना पड़ता है। निखिल ने बताया कि पहुँचने के शुरुआती 4-5 दिनों में उन्हें ऊँचाई की वजह से काफी दिक्कत हुई, जिसके लिए उन्होंने 9-10 दिन पहले ही लेह पहुँचकर अनुकूलन किया।
निखिल सिंह ने इससे पहले किस ऊँचाई वाली मैराथन में भाग लिया था?
लद्दाख मैराथन से पहले निखिल सिंह स्पीति घाटी में भी मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं। लद्दाख उनकी ऊँचाई वाले स्थानों पर दूसरी मैराथन थी।
राष्ट्र प्रेस
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