भागीरथी बिष्ट ने हैदराबाद मैराथन में जीता रजत, 2 घंटे 51 मिनट में पूरी की 42 किमी दौड़
सारांश
मुख्य बातें
चमोली जिले के सीमांत वाण गांव की 24 वर्षीय धाविका भागीरथी बिष्ट ने हैदराबाद मैराथन में 42 किलोमीटर की दूरी मात्र 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर दूसरा स्थान हासिल किया। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ने वाली भागीरथी की इस उपलब्धि ने पूरी देवभूमि में उत्साह की लहर दौड़ा दी है।
मुख्य प्रदर्शन
30 अगस्त 2026 को हैदराबाद में आयोजित इस प्रतिष्ठित मैराथन में भागीरथी ने अपनी श्रेणी में रजत पदक अपने नाम किया। ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी इस पर्वत-पुत्री का यह प्रदर्शन इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि वाण गांव की ऊँचाई और भौगोलिक चुनौतियाँ ही उनके प्रशिक्षण का आधार बनी हैं।
कोच की भूमिका और प्रशिक्षण
भागीरथी के कोच सुनील शर्मा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से हैं और स्वयं एक अनुभवी अंतरराष्ट्रीय मैराथन एथलीट हैं। उन्होंने बताया कि भागीरथी निरंतर कड़े अनुशासन और समर्पण के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं। कोच के अनुसार, उनमें प्रतिभा के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहने का असाधारण जज्बा है।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव
हैदराबाद से पहले भागीरथी ईरान में आयोजित 42 किलोमीटर की मैराथन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में हुई अनेक मैराथन प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड से महिला एथलीटों की राष्ट्रीय उपस्थिति धीरे-धीरे बढ़ रही है।
ओलंपिक का सपना
कोच सुनील शर्मा के अनुसार, भागीरथी का अंतिम लक्ष्य ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए मैराथन में स्वर्ण पदक जीतना और भारत का नाम वैश्विक मंच पर रोशन करना है। वाण गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ उनका दौड़ का सफर अब ओलंपिक स्वर्ण की ओर बढ़ रहा है।
प्रेरणा का स्रोत
भागीरथी की यह उपलब्धि पहाड़ की उन तमाम बेटियों के लिए एक जीवंत उदाहरण है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। गौरतलब है कि चमोली जैसे दूरदराज़ जिलों में खेल अवसंरचना की कमी के बावजूद इस क्षेत्र से राष्ट्रीय स्तर के एथलीट उभर रहे हैं, जो राज्य की खेल संभावनाओं को नई दिशा दे रहे हैं।