15वीं नैनीताल मॉनसून माउंट मैराथन: हरियाणा की ज्योति ने 21 किमी वर्ग में जीत दर्ज की, केन्या के जॉन दूसरे स्थान पर
सारांश
मुख्य बातें
नैनीताल में 30 अगस्त को 'रन फॉर उत्तराखंड' थीम के तहत आयोजित 15वीं नैनीताल मॉनसून माउंट मैराथन में देश-विदेश के सैकड़ों धावकों ने हिस्सा लिया। हरियाणा की ज्योति ने 21 किलोमीटर वर्ग में पहला स्थान हासिल किया, जबकि केन्या के धावक जॉन ने पर्वतीय चुनौती के बावजूद दूसरा स्थान प्राप्त किया।
मुख्य विजेता और उनका अनुभव
ज्योति, जो सीनियर नेशनल मेडलिस्ट हैं और रेलवे विभाग में रायबरेली में कार्यरत हैं, ने अपनी जीत पर कहा, 'यह बहुत अच्छा आयोजन था और मैंने यहाँ फर्स्ट पोजीशन प्राप्त की है। थोड़ा टफ लगता है, लेकिन सब कुछ अच्छा था। मैनेजमेंट भी अच्छा है और वॉलंटियर्स वगैरह भी सब कुछ अच्छा था।' उन्होंने युवा खिलाड़ियों को संदेश दिया कि आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।
45 प्लस कैटेगरी में पौड़ी गढ़वाल की जयंती थपलियाल ने पहला स्थान हासिल किया। सीआरपीएफ में मेरठ में तैनात जयंती ने बताया कि दौड़ के शुरुआती तीन किलोमीटर में वह संशय में थीं, लेकिन आगे बढ़ने पर रूट का आनंद आने लगा। जयंती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया, जापान, सिंगापुर, अमेरिका और 2024 में बोस्टन में भी प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं।
केन्या के जॉन के लिए अलग थी पहाड़ की चुनौती
केन्या के धावक जॉन के लिए नैनीताल की पर्वतीय दौड़ एक बिल्कुल नया अनुभव रही। उन्होंने बताया कि पहले 10 किलोमीटर तक वह पीछे चल रहे थे और बाद में रफ्तार बढ़ाने की कोशिश में पैर की मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द हुआ। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे स्थान पर रहे। जॉन ने कहा कि रूट मैप अच्छा था, लेकिन कोर्स बेहद कठिन था। इससे पहले वह कश्मीर, पुणे और बेंगलुरु में अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन वे रूट अधिकतर सपाट थे।
जॉन नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता और यहाँ के लोगों की गर्मजोशी से भी प्रभावित हुए। उन्होंने शहर को बेहद खूबसूरत बताया और स्थानीय निवासियों की मेहमाननवाजी की सराहना की।
स्थानीय धावकों का अनुभव और सरकारी सहयोग
कोटद्वार के धावक प्रभु के लिए यह दूरी कोई नई बात नहीं थी — वह 21 किलोमीटर की यह दौड़ कई बार पूरी कर चुके हैं। तीन बार के नेशनल मेडलिस्ट और खेलो इंडिया मीट में रिकॉर्ड बना चुके प्रभु ने अल्मोड़ा, रुड़की और ऊधम सिंह नगर समेत कई जगहों पर मैराथन में हिस्सा लिया है।
प्रभु ने बताया कि नैनीताल का रास्ता चढ़ाई और उतार-चढ़ाव से भरा था, लेकिन रूट पर रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था समेत बाकी इंतजाम संतोषजनक रहे। उनका मानना है कि उत्तराखंड में खिलाड़ियों को मिल रहा सरकारी सहयोग और आर्थिक सहायता नए एथलीटों का हौसला बढ़ा रही है और गाँवों से भी युवा खेलों की ओर आ रहे हैं।
आयोजन का महत्व और आगे की राह
यह आयोजन उत्तराखंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। 15वें संस्करण तक पहुँची इस मैराथन ने अंतरराष्ट्रीय धावकों को भी आकर्षित किया है, जो इस आयोजन की बढ़ती साख का प्रमाण है। प्रतिभागियों के अनुभव बताते हैं कि पर्वतीय मैराथन न केवल शारीरिक दृढ़ता की परीक्षा है, बल्कि नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों को वैश्विक खेल मानचित्र पर स्थापित करने का अवसर भी है।