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एनआरएआई ने एनएसजीए 2025 के तहत संविधान संशोधन को सर्वसम्मति से दी मंजूरी, शूटिंग प्रशासन में नया अध्याय

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एनआरएआई ने एनएसजीए 2025 के तहत संविधान संशोधन को सर्वसम्मति से दी मंजूरी, शूटिंग प्रशासन में नया अध्याय

सारांश

एनआरएआई ने भुवनेश्वर में सर्वसम्मति से संविधान संशोधन पारित कर एनएसजीए 2025 को अपनाया — यह भारतीय शूटिंग प्रशासन में पारदर्शिता और खिलाड़ी-केंद्रित सुशासन की दिशा में एक ठोस और प्रतीकात्मक कदम है।

मुख्य बातें

नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) ने 18 जुलाई 2025 को भुवनेश्वर में विशेष आम सभा आयोजित कर संविधान संशोधनों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
संशोधनों के बाद एनआरएआई का ढाँचा नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट (एनएसजीए) 2025 के प्रावधानों के अनुरूप हो गया।
नए संविधान में खिलाड़ी कल्याण समितियों का गठन, आचार संहिता और विवाद-समाधान तंत्र शामिल हैं।
अध्यक्ष कालीकेश नारायण सिंह देव ने कहा कि यह कदम अधिक जवाबदेह और खिलाड़ी-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण है।
एनआरएआई एनएसजीए 2025 को औपचारिक रूप से अपनाने वाले अग्रणी राष्ट्रीय खेल महासंघों में शामिल हो गया।

नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) ने 18 जुलाई 2025 को भुवनेश्वर, ओडिशा में आयोजित विशेष आम सभा में अपने संविधान में महत्वपूर्ण संशोधनों को सर्वसम्मति से पारित किया। इन संशोधनों के साथ एनआरएआई का प्रशासनिक ढाँचा अब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट (एनएसजीए), 2025 के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप हो गया है। इस कदम के साथ एनआरएआई उन अग्रणी राष्ट्रीय खेल महासंघों में शामिल हो गया है जिन्होंने नए कानूनी ढाँचे को औपचारिक रूप से अंगीकार किया है।

मुख्य घटनाक्रम

भुवनेश्वर में हुई इस विशेष आम सभा में महासंघ के सभी सदस्यों ने संविधान संशोधनों के पक्ष में मतदान किया — एक भी असहमति दर्ज नहीं हुई। एनएसजीए 2025 भारत सरकार का वह नया कानूनी ढाँचा है जो राष्ट्रीय खेल महासंघों में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ी-केंद्रित प्रशासन को अनिवार्य बनाता है। एनआरएआई का यह निर्णय भारतीय शूटिंग प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

संशोधनों में क्या शामिल है

नए संविधान के तहत खिलाड़ी कल्याण समितियों का गठन, एक कड़ी आचार संहिता का क्रियान्वयन और संगठन के भीतर विवाद-समाधान के लिए एक औपचारिक कानूनी तंत्र स्थापित करना शामिल है। इन प्रावधानों का उद्देश्य संस्थागत पारदर्शिता सुनिश्चित करना और खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करना है। गौरतलब है कि वितरण और जवाबदेही के ये प्रावधान पूर्व के ढाँचे में अनुपस्थित थे।

नेतृत्व की प्रतिक्रिया

एनआरएआई अध्यक्ष कालीकेश नारायण सिंह देव ने कहा कि एनएसजीए 2025 के मानकों को अपनाना एक अधिक मज़बूत, जवाबदेह और खिलाड़ी-केंद्रित खेल व्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, 'महासंघ की आम सभा द्वारा सर्वसम्मति से मिला समर्थन प्रशासनिक सुधारों के प्रति सभी सदस्यों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नए संशोधनों से यह सुनिश्चित होगा कि एनआरएआई राष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह पालन करते हुए अपनी अंतरराष्ट्रीय साख भी बनाए रखे।'

महासचिव पवन कुमार सिंह ने कहा कि महासंघ का सबसे बड़ा उद्देश्य खिलाड़ियों को पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध कराना है, ताकि वे पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इन सुधारों से ग्रासरूट स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों की तैयारी और मज़बूत होगी।

आम जनता और खिलाड़ियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शूटिंग टीम आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और वैश्विक प्रशिक्षण चक्र की तैयारी में जुटी है। नई व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संचालन और विकास से जुड़ा बेहतर संस्थागत सहयोग मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रियान्वयन प्रभावी रहा, तो यह भारतीय निशानेबाज़ों के प्रदर्शन को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।

क्या होगा आगे

एनआरएआई के नए संविधान के प्रावधान अब तत्काल प्रभाव से लागू माने जा रहे हैं। भारतीय खेल प्रशासन में यह बदलाव अन्य राष्ट्रीय महासंघों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। माना जा रहा है कि एनएसजीए 2025 को जल्द अपनाने वाले महासंघों को सरकारी अनुदान और मान्यता के मामले में प्राथमिकता मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। भारतीय खेल महासंघों में संविधान संशोधन पहले भी होते रहे हैं, पर खिलाड़ी कल्याण समितियाँ और आचार संहिताएँ कागज़ पर बनकर रह जाती हैं। एनएसजीए 2025 को 'पहले अपनाने' की होड़ में यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अनुपालन और वास्तविक सुधार एक नहीं हैं। जब तक खिलाड़ी इन समितियों तक स्वतंत्र रूप से पहुँच नहीं सकते और विवाद-समाधान तंत्र स्वतंत्र रूप से काम नहीं करता, तब तक यह सुधार अधूरा रहेगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआरएआई ने अपने संविधान में क्या बदलाव किए हैं?
एनआरएआई ने 18 जुलाई 2025 को भुवनेश्वर में विशेष आम सभा में अपने संविधान में वे संशोधन सर्वसम्मति से पारित किए जो नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट (एनएसजीए) 2025 के प्रावधानों के अनुरूप हैं। इनमें खिलाड़ी कल्याण समितियों का गठन, सख्त आचार संहिता और विवाद-समाधान के लिए औपचारिक कानूनी तंत्र शामिल हैं।
नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 क्या है?
नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट (एनएसजीए) 2025 भारत सरकार का वह कानूनी ढाँचा है जो राष्ट्रीय खेल महासंघों में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ी-केंद्रित प्रशासन को अनिवार्य बनाता है। इस कानून के तहत महासंघों को अपने संविधान और प्रशासनिक ढाँचे को निर्धारित मानकों के अनुरूप ढालना आवश्यक है।
इन बदलावों से भारतीय निशानेबाज़ों को क्या फायदा होगा?
नए प्रावधानों के तहत खिलाड़ियों को पारदर्शी और भरोसेमंद प्रशासनिक माहौल मिलेगा, जिससे वे अपने प्रदर्शन पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। ग्रासरूट स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक प्रशिक्षण और विकास से जुड़ा संस्थागत सहयोग बेहतर होने की उम्मीद है।
क्या अन्य खेल महासंघों ने भी एनएसजीए 2025 अपनाया है?
एनआरएआई उन अग्रणी राष्ट्रीय खेल महासंघों में शामिल हो गया है जिन्होंने एनएसजीए 2025 को औपचारिक रूप से अंगीकार किया है। हालाँकि अन्य महासंघों की स्थिति के बारे में स्रोत में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भुवनेश्वर में हुई बैठक में कौन शामिल थे?
18 जुलाई 2025 को भुवनेश्वर में आयोजित विशेष आम सभा में एनआरएआई के सदस्य, अध्यक्ष कालीकेश नारायण सिंह देव और महासचिव पवन कुमार सिंह सहित महासंघ का नेतृत्व शामिल था। सभी उपस्थित सदस्यों ने संविधान संशोधनों के पक्ष में सर्वसम्मति से मतदान किया।
राष्ट्र प्रेस
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