ओडिशा CM माझी बोले: खेल अनुशासन और संघर्ष की पाठशाला, ₹5,000 करोड़ से बनेंगे नए स्टेडियम
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 7 जून को भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' के समापन सत्र में कहा कि खेल केवल पदक, रिकॉर्ड या जीत-हार तक सीमित नहीं हैं — बल्कि ये जीवन में अनुशासन, टीमवर्क और विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता विकसित करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। राज्य के खेल एवं युवा सेवा विभाग द्वारा आयोजित इस शिविर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल विशेषज्ञों, प्रशासकों तथा खिलाड़ियों ने भाग लिया।
चिंतन शिविर का उद्देश्य
मुख्यमंत्री माझी ने बताया कि ओडिशा में पहली बार आयोजित यह 'चिंतन शिविर' राज्य में खेलों के भावी विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप और ठोस कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने जोर दिया कि खेल युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण और राज्य के समग्र विकास में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2028 में ओडिशा वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप और एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा। राज्य ने पिछले वर्ष वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर ब्रॉन्ज प्रतियोगिता की सफलतापूर्वक मेजबानी की थी, और इसी वर्ष इस प्रतियोगिता के सिल्वर स्तर के आयोजन की भी मेजबानी ओडिशा करेगा। गौरतलब है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की सफल मेजबानी के कारण ओडिशा को अब वैश्विक स्तर पर एक विशेष पहचान मिल चुकी है।
खेल ढाँचे में ₹5,000 करोड़ से अधिक का निवेश
भुवनेश्वर के गोठापटना में लगभग ₹1,000 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक बहुउद्देशीय खेल परिसर विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर खेल ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए राज्यभर के ब्लॉक स्तर पर ₹4,000 करोड़ से अधिक की लागत से आधुनिक बहुउद्देशीय स्टेडियम निर्मित किए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा पहले से ही हॉकी विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों की मेजबानी के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है।
ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान और प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री माझी ने बताया कि मुख्यमंत्री ट्रॉफी कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की उभरती प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें उन्नत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने 'हैप्पी कोच, हैप्पी एथलीट और हैप्पी अचीवर्स' की अवधारणा का भी उल्लेख किया, जो खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के मनोबल को केंद्र में रखती है।
2036 और 2047 का लक्ष्य
मुख्यमंत्री माझी ने विश्वास व्यक्त किया कि खेल क्षेत्र वर्ष 2036 तक 'समृद्ध ओडिशा' और वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में ओडिशा केवल खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय चैंपियन खिलाड़ी तैयार करने के केंद्र के रूप में भी जाना जाएगा।