ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ट्रिपल जंप फाइनल से पहले प्रवीण चित्रवेल बोले — 'परिणाम नहीं, प्रक्रिया पर है फोकस'
सारांश
मुख्य बातें
भारत के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी ट्रिपल जंपर प्रवीण चित्रवेल ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की ट्रिपल जंप फाइनल से पूर्व स्पष्ट किया कि उनका ध्यान पदक की गणना पर नहीं, बल्कि अपनी जंप के प्रत्येक चरण को सटीकता से निभाने पर है। 25 वर्षीय इस एथलीट ने क्वालिफिकेशन राउंड में 16.41 मीटर का श्रेष्ठ प्रयास कर फाइनल में जगह बनाई है।
बर्मिंघम की चूक से मिली सीख
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में चित्रवेल केवल तीन सेंटीमीटर के अंतर से पदक से वंचित रह गए थे — एक ऐसी निराशा जिसे उन्होंने अपनी ताकत में बदला। उन्होंने कहा, "बर्मिंघम में इतने कम अंतर से पदक चूकने से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। तब से, हर सीजन तकनीकी, शारीरिक और मानसिक तौर पर एक बेहतर एथलीट बनने के बारे में रहा है।" यह अनुभव उनके लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जिसने उनकी तैयारी की दिशा और गहराई दोनों को नया आकार दिया।
मानसिक दृष्टिकोण: परिणाम नहीं, प्रक्रिया
चित्रवेल ने फाइनल से पहले अपनी मानसिक रणनीति को भी साझा किया। उन्होंने कहा, "मैं प्रतियोगिता से पहले परिणाम के बारे में ज़्यादा नहीं सोचना चाहता। मेरा काम अपनी जंप के हर फेज को अच्छे से करना, शांत रहना और अपनी मेहनत पर भरोसा करना है। अगर मैं ऐसा कर सकता हूँ, तो मुझे पता है कि प्रदर्शन अच्छा होगा।" यह दृष्टिकोण उन्हें दबाव के क्षणों में स्थिर रखता है — एक गुण जो बड़े मंचों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
IIS बल्लारी: हाई-परफॉर्मेंस माहौल की भूमिका
चित्रवेल बल्लारी स्थित इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (IIS) में क्यूबन कोच योआंद्री बेटानजोस के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेते हैं। उन्होंने अपनी तकनीकी प्रगति का श्रेय इस संस्थान के एकीकृत ढाँचे को दिया। उन्होंने कहा, "ट्रिपल जंप एक ऐसा इवेंट है जहाँ छोटी-छोटी बातें भी बड़ा फ़र्क डालती हैं। IIS में, मुझे हर दिन उन चीज़ों पर काम करने का मौका मिलता है — चाहे वह तकनीकी फीडबैक हो, मजबूती का कार्य हो, रिकवरी हो या न्यूट्रिशन — सब कुछ एक ही जगह पर।" गौरतलब है कि यह निरंतरता ही उच्च-स्तरीय एथलेटिक्स में दीर्घकालिक प्रगति की नींव होती है।
ग्लासगो फाइनल में क्या है लक्ष्य
फाइनल को लेकर चित्रवेल ने कहा, "हर कॉम्पिटिशन आपको कुछ नया सिखाता है, और हर सीजन उस लेवल के करीब जाने का मौका होता है जिस तक मैं पहुँचना चाहता हूँ। अभी, मेरा फोकस ग्लासगो में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने, प्रतियोगिता का मजा लेने और हर जंप को अहम बनाने पर है।" बर्मिंघम की चूक और उसके बाद की मेहनत को देखते हुए, ग्लासगो में चित्रवेल भारत के सबसे प्रबल पदक दावेदारों में से एक हैं।