राजेश्वरी गायकवाड़: वनडे डेब्यू में 2 विकेट, 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स सिल्वर मेडलिस्ट स्पिनर का सफर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी बाएं हाथ की स्पिनर राजेश्वरी गायकवाड़ ने तीनों अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट — टेस्ट, वनडे और टी20 — में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 171 विकेट अपने नाम किए हैं। बीजापुर, कर्नाटक से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुँचने का उनका सफर संघर्ष, पारिवारिक बलिदान और असाधारण प्रतिभा की कहानी है। विमेंस वर्ल्ड कप 2017 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ उनकी 5 विकेट की गेंदबाज़ी इस सफर का सबसे चमकदार अध्याय रही।
प्रारंभिक जीवन और क्रिकेट की शुरुआत
1 जून 1991 को कर्नाटक के बीजापुर में जन्मीं राजेश्वरी के पिता शिवानंद गायकवाड़ एक शिक्षक थे। पाँच बच्चों के परिवार में क्रिकेट जैसे खर्चीले खेल को संभालना आसान नहीं था, फिर भी शिवानंद ने अपनी बेटी के सपने को हार नहीं मानने दिया।
राजेश्वरी की शुरुआती रुचि जैवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो और वॉलीबॉल में थी, लेकिन पिता की प्रेरणा पर उन्होंने क्रिकेट अपनाया। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी छोटी बहन रामेश्वरी के साथ क्रिकेट ट्रायल में हिस्सा लिया और चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक की अंडर-19 टीम में जगह बनाई।
स्पिन की ओर मोड़ और डेब्यू का जलवा
शुरुआत में राजेश्वरी तेज़ गेंदबाज़ी करती थीं, लेकिन कोच की सलाह पर उन्होंने स्पिन गेंदबाज़ी की राह पकड़ी — और यही निर्णय उनके करियर की नींव बना।
19 जनवरी 2014 को श्रीलंका के विरुद्ध वनडे में डेब्यू करते हुए राजेश्वरी ने 7.3 ओवरों में 3 मेडन समेत केवल 11 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। कुछ दिनों बाद टी20 डेब्यू में उन्होंने 24 रन देकर 3 विकेट निकाले। दोनों फॉर्मेट के पहले ही मैच में ऐसा प्रदर्शन किसी भी युवा गेंदबाज़ के लिए असाधारण माना जाता है।
व्यक्तिगत त्रासदी के बीच करियर को थामे रखना
अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के कुछ ही समय बाद राजेश्वरी के पिता शिवानंद गायकवाड़ का निधन हो गया। इस दुखद घटना ने परिवार पर गहरा आर्थिक और भावनात्मक संकट ला दिया। यह ऐसे समय में आया जब राजेश्वरी अभी अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत ही कर रही थीं। लेकिन उन्होंने हालात से हार नहीं मानी और खेल में अपनी पकड़ बनाए रखी।
विमेंस वर्ल्ड कप 2017 — करियर का शिखर
जून-जुलाई 2017 के महिला वनडे विश्व कप में राजेश्वरी ने भारत की ऐतिहासिक फाइनल यात्रा में अहम भूमिका निभाई। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ उन्होंने 7.3 ओवर में केवल 15 रन देकर 5 विकेट झटके — यह टूर्नामेंट का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
भारत उस विश्व कप के फाइनल में पहुँचा, जहाँ इंग्लैंड के हाथों 9 रन के करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा। यह फाइनल भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में एक मील का पत्थर बना।
टेस्ट डेब्यू और कॉमनवेल्थ गेम्स सिल्वर
नवंबर 2014 में राजेश्वरी को टेस्ट क्रिकेट में भी डेब्यू का अवसर मिला। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में वे उस भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा रहीं जिसने सिल्वर मेडल जीता।
आँकड़ों के अनुसार राजेश्वरी ने 5 टेस्ट में 11 विकेट, 64 वनडे में 99 विकेट और 58 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 61 विकेट लिए हैं। तीनों फॉर्मेट में उनके कुल 171 विकेट भारतीय महिला क्रिकेट में उनकी स्थायी छाप के प्रमाण हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे वनडे में 100 विकेट का मील का पत्थर कब पार करती हैं।