रक्षा खडसे ने जिंदल पैंथर और जयपुर टीमों की सराहना की, बोले- 'पोलो में घोड़े और सवार का तालमेल अनूठा'
सारांश
Key Takeaways
- पोलो खेल की अद्वितीयता और सुंदरता का प्रदर्शन करता है।
- रक्षा खडसे ने जिंदल स्टील इंडियन ओपन पोलो चैंपियनशिप की सराहना की।
- इस खेल में सवार और घोड़े के बीच का तालमेल आवश्यक है।
- चैंपियनशिप में उच्च स्तर की रणनीति और टीमवर्क देखने को मिलता है।
- पोलो, जिसे 'खेलों का राजा' कहा जाता है, की भारत में एक समृद्ध परंपरा है।
नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने जिंदल स्टील इंडियन ओपन पोलो चैंपियनशिप की प्रशंसा की। उन्होंने पोलो को 'सहज वृत्ति और अनुशासन का संवाद' बताया।
रक्षा खडसे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में पोलो खेल की गहरी सुंदरता और उसके महत्व को व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, "पोलो केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह सहज वृत्ति और अनुशासन के बीच एक संवाद है; जहां सवार और घोड़ा, विश्वास, संतुलन और शांत सटीकता के मार्गदर्शन में, एक-दूसरे के साथ एकाकार होकर आगे बढ़ते हैं। यह रणनीति और लालित्य का एक अद्वितीय मेल है, जहां हर पल मानसिक सजगता और खेल के प्रति सम्मान की आवश्यकता होती है।"
रक्षा खडसे ने जिंदल स्टील इंडियन ओपन पोलो चैंपियनशिप का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता में जिंदल पैंथर और जयपुर ऑप्टिमस अचीवर्स जैसी टीमों को खेलते देखना एक सुखद अनुभव है।
उन्होंने लिखा, "जिंदल स्टील इंडियन ओपन पोलो चैंपियनशिप में भाग लेना और जिंदल पैंथर तथा जयपुर ऑप्टिमस अचीवर्स जैसी टीमों को मैदान पर खेलते हुए देखना, इस बात की याद दिलाता है कि कैसे परंपरा और उत्कृष्टता मिलकर मैदान पर जीवंत होती हैं, जिन्हें वैश्विक प्रतिभाओं और भारत की समृद्ध विरासत से और भी अधिक समृद्ध किया गया है।"
पोलो, जिसे 'खेलों का राजा' कहा जाता है, भारत में सदियों पुरानी परंपरा है। राजस्थान, हैदराबाद और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में यह खेल राजघरानों और सेना से जुड़ा रहा है।
जिंदल स्टील इंडियन ओपन पोलो चैंपियनशिप भारत की प्रमुख पोलो इवेंट्स में से एक है, जिसमें देश और विदेश की शीर्ष टीमें भाग लेती हैं। इस चैंपियनशिप में उच्च स्तर की रणनीति, घोड़ों की ट्रेनिंग, सवारों की कुशलता और टीमवर्क की मिसाल देखने को मिलती है।